मुसलमानों का वोट लेकर मंदिर बनवा रहीं दीदी, ओवैसी के नए साथी हुमायूं कबीर का ममता बनर्जी पर बड़ा हमला
News India Live, Digital Desk: पश्चिम बंगाल में आगामी 2026 विधानसभा चुनावों की बिसात अभी से बिछने लगी है और सियासी पारा गरमा गया है। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच चल रही सियासी जंग में अब एक नए गठबंधन ने एंट्री मार ली है। आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख हुमायूं कबीर ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के चीफ असदुद्दीन ओवैसी के साथ हाथ मिला लिया है। इस नए गठबंधन के ऐलान के साथ ही हुमायूं कबीर ने सूबे की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर मुस्लिम मतदाताओं की अनदेखी और 'हिंदू तुष्टिकरण' का गंभीर आरोप लगाकर सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है।
ममता बनर्जी पर लगाया 'हिंदू तुष्टिकरण' का आरोप
एजेयूपी (AJUP) प्रमुख हुमायूं कबीर ने मुख्यमंत्री की नीतियों पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि ममता बनर्जी चुनाव जीतने के लिए मुसलमानों का वोट लेती हैं, लेकिन तीन बार सत्ता में आने के बाद अब वह मंदिर बनवाने पर जोर दे रही हैं। कबीर ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री एक तरफ जगन्नाथ धाम का निर्माण करवा रही हैं, तो दूसरी तरफ राजारहाट में मुसलमानों की जमीन लेकर दुर्गा मंदिर भी बनवा रही हैं। उन्होंने दो टूक लहजे में कहा, "जब वह (ममता बनर्जी) हिंदुओं के लिए काम कर सकती हैं, तो क्या मैं मुसलमानों के अधिकारों के लिए काम नहीं करूंगा?"
मस्जिद विवाद, टीएमसी से निष्कासन और नई पार्टी का उदय
बता दें कि हुमायूं कबीर का यह बागी तेवर कोई नया नहीं है। एक समय में वह खुद टीएमसी का अहम हिस्सा हुआ करते थे। लेकिन, मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर एक नई मस्जिद बनाने के उनके विवादित प्रस्ताव ने तूल पकड़ लिया था, जिसके बाद टीएमसी ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस निष्कासन के बाद ही कबीर ने अपनी स्वतंत्र राजनीतिक राह चुनी और पश्चिम बंगाल में एक नए सियासी विकल्प के रूप में 'आम जनता उन्नयन पार्टी' का गठन किया।
'लक्ष्मीर भंडार' का काट: महिलाओं को 3,500 रुपये देने का बड़ा वादा
ममता सरकार को सत्ता से बेदखल करने की हुंकार भरते हुए हुमायूं कबीर ने सूबे की आधी आबादी यानी महिलाओं को साधने के लिए एक बड़ा चुनावी दांव चला है। कबीर ने दावा किया है कि वह किसी भी सूरत में ममता बनर्जी की सत्ता में वापसी नहीं होने देंगे। टीएमसी सरकार की लोकप्रिय 'लक्ष्मीर भंडार' योजना पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को मात्र 1,500 रुपये की आर्थिक मदद दे रही है। इसके मुकाबले, कबीर ने अपनी सरकार बनने पर महिलाओं को हर महीने 3,500 रुपये का बड़ा भत्ता देने का चुनावी वादा किया है।
ओवैसी का दांव: मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए 'स्वतंत्र नेतृत्व' की मांग
इस नए गठबंधन को लेकर एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी पूरी तरह से सक्रिय नजर आ रहे हैं। हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ओवैसी ने स्पष्ट किया कि हुमायूं कबीर के साथ उनके गठबंधन का मुख्य मकसद बंगाल में मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए एक मजबूत और स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व तैयार करना है।
ओवैसी ने भारत सरकार, राज्य सरकार और एनएसएसओ (NSSO) के आंकड़ों का हवाला देते हुए एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में मुस्लिम समुदाय के पास अपना स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व नहीं है, वहां के सामाजिक, आर्थिक और मानव विकास सूचकांक बेहद निचले स्तर पर हैं। उनका मानना है कि विकास और स्वतंत्र नेतृत्व के बीच सीधा और जैविक संबंध होता है। उन्होंने साफ किया कि यह गठबंधन सिर्फ इन चुनावों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजनीतिक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए यह एक लंबी लड़ाई का हिस्सा है।
182 सीटों पर चुनाव लड़ेगा गठबंधन, जानें चुनाव का पूरा कार्यक्रम
हुमायूं कबीर और ओवैसी के इस गठबंधन ने 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए अपना पूरा ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। कबीर ने ऐलान किया है कि उनकी पार्टी आगामी चुनाव में कुल 182 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। सीटों के बंटवारे के तहत, इन 182 में से लगभग 8 सीटें एआईएमआईएम (AIMIM) को दी जाएंगी।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव इस बार दो चरणों में संपन्न कराए जाएंगे। मतदान का पहला चरण 23 अप्रैल और दूसरा चरण 29 अप्रैल को आयोजित होगा। वहीं, चुनाव के नतीजे 4 मई को वोटों की गिनती के बाद घोषित किए जाएंगे।