डायबिटीज की दवाएं बढ़ रही हैं, लेकिन शरीर की ऊर्जा घट रही है? जानिए इसके पीछे का असली विज्ञान
आजकल डायबिटीज के करोड़ों मरीजों के साथ एक अजीब स्थिति देखने को मिल रही है—शुगर लेवल तो कंट्रोल में रहता है, लेकिन शरीर में थकान, सुस्ती और कमजोरी (Low Energy) लगातार बढ़ती जाती है। अक्सर लोग इसे बीमारी का हिस्सा मान लेते हैं, लेकिन मेडिकल रिसर्च कुछ और ही कहती है। अगर आपकी दवा की डोज बढ़ रही है और ऊर्जा का स्तर गिर रहा है, तो इसके पीछे 3 मुख्य कारण हो सकते हैं।
1. दवाओं का 'साइड इफेक्ट': विटामिन B12 और को-एंजाइम Q10 की कमी
डायबिटीज की सबसे आम दवा मेटफॉर्मिन (Metformin) लंबे समय तक लेने से शरीर में विटामिन B12 का अवशोषण (Absorption) कम हो जाता है।
ऊर्जा का कनेक्शन: विटामिन B12 हमारे नर्वस सिस्टम और लाल रक्त कोशिकाओं के लिए जरूरी है। इसकी कमी से एनीमिया और नसों में कमजोरी (Neuropathy) होती है, जिससे आप हर वक्त थका हुआ महसूस करते हैं।
माइटोकॉन्ड्रिया पर असर: कुछ दवाएं सेल्स के पावरहाउस यानी 'माइटोकॉन्ड्रिया' की कार्यक्षमता को प्रभावित करती हैं, जिससे शरीर भोजन को ऊर्जा में नहीं बदल पाता।
2. इंसुलिन रेजिस्टेंस: 'सेल के दरवाजे' का बंद होना
डायबिटीज में समस्या यह नहीं है कि आपके खून में शुगर (ग्लूकोज) कम है, बल्कि समस्या यह है कि वह ग्लूकोज आपके सेल्स (Cells) के अंदर नहीं जा पा रहा है।
ईंधन की कमी: जब इंसुलिन सही से काम नहीं करता (Insulin Resistance), तो खून में तो शुगर का पहाड़ खड़ा रहता है, लेकिन शरीर की कोशिकाओं को 'ईंधन' नहीं मिलता।
परिणाम: दवाएं खून से शुगर तो कम कर देती हैं, लेकिन अगर वह शुगर ऊर्जा में नहीं बदली, तो शरीर भूखा महसूस करेगा और आपको थकान होगी।
3. 'रिएक्टिव हाइपोग्लाइसीमिया': शुगर लेवल का अचानक गिरना
जब दवाओं की डोज ज्यादा होती है, तो कई बार शुगर लेवल सामान्य से भी नीचे (Hypoglycemia) चला जाता है।
झटका: शुगर लेवल में अचानक आने वाली गिरावट मस्तिष्क और मांसपेशियों को सुस्त कर देती है।
चक्र: इसे ठीक करने के लिए मरीज अक्सर मीठा या ज्यादा कार्बोहाइड्रेट खाता है, जिससे शुगर फिर बढ़ती है और फिर दवा लेनी पड़ती है। यह 'शुगर रोलरकोस्टर' शरीर की ऊर्जा को पूरी तरह सोख लेता है।
थकान दूर करने के लिए क्या करें? (Expert Tips)
अगर आप इस स्थिति से गुजर रहे हैं, तो केवल दवा पर निर्भर न रहें:
B12 चेकअप: डॉक्टर की सलाह पर विटामिन B12 और विटामिन D3 के सप्लीमेंट्स लें।
मसल्स मास (Muscle Mass): मांसपेशियों में ही शुगर बर्न होती है। हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या पैदल चलना शुरू करें ताकि इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़े।
लो-कार्ब डाइट: अपनी डाइट में प्रोटीन और गुड फैट्स (जैसे नट्स, सीड्स) बढ़ाएं ताकि एनर्जी लेवल स्थिर रहे।