Dharmendra Interview : काश सनी-बॉबी मेरे साथ बैठें,जब अपने ही बेटों के लिए छलका धर्मेंद्र का दर्द

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News India Live, Digital Desk: धर्मेंद्र, हिंदी सिनेमा के वो 'ही-मैन' जिन्होंने पर्दे पर अपने दमदार एक्शन और रोमांटिक अंदाज से लाखों दिलों पर राज किया. आज 88 साल की उम्र में भी वो फिल्मों में सक्रिय हैं और अपने फैंस का मनोरंजन कर रहे हैं. लेकिन चकाचौंध से भरी इस दुनिया के पीछे एक पिता का दिल भी है, जो कभी-कभी अपने बच्चों के साथ थोड़ा और वक्त बिताने के लिए तरसता है.

हाल ही में उनका एक पुराना इंटरव्यू फिर से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने अपने बेटों, सनी देओल और बॉबी देओल को लेकर अपने दिल की एक ऐसी ख्वाहिश जाहिर की थी, जिसे सुनकर शायद हर पिता और बेटे की आंखें नम हो जाएं.

"बचपन में तो बहुत वक्त बिताते थे, अब..."

आज तक को दिए एक इंटरव्यू में जब धर्मेंद्र से पूछा गया कि क्या उनके बेटे उनके साथ उतना ही वक्त बिताते हैं जितना वे अपने पिता के साथ बिताते थे, तो उनका जवाब बेहद भावुक कर देने वाला था.

उन्होंने कहा, "मेरे पिता मुझसे बहुत प्यार करते थे. हम दोस्त की तरह थे. हम साथ बैठते थे, खाते-पीते थे और दिल की हर बात करते थे. काश, मेरे बच्चे... सनी और बॉबी भी मेरे साथ बैठें... कभी-कभी..."

धर्मेंद्र ने आगे कहा, "अब वो बड़े हो गए हैं. वो मेरे दोस्त हैं, लेकिन एक दूरी सी है. मैं चाहता हूं कि ये दूरी खत्म हो जाए." उन्होंने यह भी बताया कि जब सनी और बॉबी छोटे थे, तब वे उनके साथ खूब वक्त बिताते थे. सनी तो उनके पेट पर बैठकर खाना खाते थे. धर्मेंद्र को इस बात का भी अफसोस है कि आज की तेज रफ्तार जिंदगी में बच्चों के पास अपने मां-बाप के लिए उतना वक्त नहीं रह गया है.

बेटों से बेपनाह प्यार, लेकिन जता नहीं पाते

धर्मेंद्र ने यह भी माना कि वो अपने बच्चों से बेहद प्यार करते हैं, लेकिन वो कभी अपना प्यार खुलकर जता नहीं पाते. उन्होंने कहा, "मैं एक्सप्रेसिव नहीं हूं. मुझे लगता है कि यह शायद मेरी परवरिश का असर है."

यह इंटरव्यू धर्मेंद्र की उस शख्सियत को सामने लाता है जो पर्दे के 'ही-मैन' से बिल्कुल अलग है - एक आम पिता की तरह, जो अपने बच्चों के साथ की कमी को महसूस करता है. यह हमें यह भी याद दिलाता है कि चाहे इंसान कितना भी बड़ा क्यों न हो जाए, उसे अपने परिवार और खासकर अपने बच्चों के साथ की हमेशा जरूरत होती है.

धर्मेंद्र का यह दर्द भरा बयान उन सभी बच्चों के लिए एक संदेश भी है जो काम और जिंदगी की भागदौड़ में अपने माता-पिता को वक्त देना भूल जाते हैं.