धुंध में लिपटी दिल्ली की सुबह: सांसों पर फिर संकट, जानिए आज कितनी ज़हरीली है हवा

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सोमवार की सुबह दिल्लीवालों की आंखें एक बार फिर धुंध की मोटी चादर में खुलीं। यह कोई कोहरा नहीं, बल्कि ज़हरीला स्मॉग था, जिसने पूरी राजधानी को अपनी चपेट में ले लिया है। शहर की हवा लगातार 'बहुत खराब' बनी हुई है और ऐसा लग रहा है मानो दिल्ली एक गैस चैंबर में तब्दील हो गई हो।

आज सुबह 6 बजे के करीब, दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 360 दर्ज किया गया, जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। पिछले एक महीने से हालात ऐसे ही बने हुए हैं। कृत्रिम बारिश जैसी कोशिशें भी हवा को साफ करने में नाकाम रही हैं।

हालत इतनी खराब है कि बवाना, जहांगीरपुरी और रोहिणी जैसे 6 इलाकों में तो हवा 'गंभीर' यानी जानलेवा स्तर पर पहुंच गई, जहां AQI 400 के पार चला गया। बाकी 32 इलाकों में भी स्थिति 'बहुत खराब' बनी हुई है।

नियम तो हैं, पर मान कौन रहा है?

बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली में GRAP-3 के कड़े नियम लागू हैं, लेकिन इसका कोई खास असर जमीन पर नहीं दिख रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इन नियमों को तोड़ा जा रहा है, और हैरानी की बात यह है कि तोड़ने वालों में आम लोगों के साथ-साथ सरकारी प्रोजेक्ट भी शामिल हैं।

  • खुलेआम उड़ रही धूल: ग्रेटर नोएडा में बन रहे एक सरकारी फ्लाईओवर के पास खुले में मिट्टी फेंकी जा रही है। शहर में जगह-जगह निर्माण सामग्री बिना ढके पड़ी है, जिससे धूल उड़कर हवा में जहर घोल रही है।
  • आग का धुआं: लोग अभी भी कूड़े के ढेरों में आग लगा रहे हैं, जिसका धुआं स्मॉग को और घना बना रहा है।
  • पुरानी गाड़ियां और पराली: एक्सपर्ट्स का मानना है कि सड़कों पर दौड़ती पुरानी गाड़ियां, कूड़े और पराली का जलना और अनियंत्रित धूल ही इस समस्या की असली जड़ हैं। अगर इन पर साल भर काम किया जाए, तो सर्दियों में स्थिति इतनी गंभीर नहीं होगी।

डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यह हवा बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए बेहद खतरनाक है। उन्होंने सभी को सलाह दी है कि जितना हो सके घर के अंदर रहें और अगर बाहर जाना ही पड़े तो N95 मास्क ज़रूर पहनें।

 

तो अब करें क्या? सिर्फ सरकार नहीं, हमारी भी है जिम्मेदारी

यह लड़ाई सिर्फ सरकार के आदेशों से नहीं जीती जा सकती। इसमें हर एक इंसान की भागीदारी जरूरी है।

सरकार को क्या करना चाहिए?

  1. सख्ती और निगरानी: नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सिर्फ सर्दियों में नहीं, बल्कि पूरे साल सख्ती से कार्रवाई हो। ड्रोन से निगरानी और प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों का ऑटोमैटिक चालान काटा जाए।
  2. धूल पर कंट्रोल: निर्माण वाली जगहों पर हरे रंग का कपड़ा लगाना अनिवार्य हो। सड़कों की रोज़ाना धुलाई की जाए।
  3. जागरूकता: स्कूल-कॉलेजों में अभियान चलाकर बच्चों और युवाओं को इस समस्या के बारे में जागरूक किया जाए।

एक आम नागरिक होने के नाते हम क्या कर सकते हैं?

  1. कम करें गाड़ी का इस्तेमाल: जब तक बहुत जरूरी न हो, अपनी गाड़ी निकालने से बचें। पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें या कार-पूलिंग करें।
  2. पेड़ लगाएं: अपने घर के आसपास, गली-मोहल्लों में पेड़ लगाने के लिए खुद भी आगे आएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
  3. कूड़ा न जलाएं: अपने आसपास किसी को भी कूड़ा जलाते देखें तो उसे रोकें और इसकी शिकायत करें।

यह लड़ाई किसी एक की नहीं, बल्कि हम सबकी है। अगर सरकार और जनता मिलकर कोशिश करें, तभी दिल्ली की हवा में घुले इस जहर को साफ किया जा सकता है।