दिल्ली कांपी, यूपी-हरियाणा ठिठुरे: 5.7 डिग्री तक गिरा पारा, मौसम विभाग ने बजाई खतरे की घंटी

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Delhi weather news today: दिसंबर शुरू होते ही ठंड ने अपने असली रंग दिखाने शुरू कर दिए हैं। अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं, तो आपने पिछले दो दिनों में हवा का वो बर्फीलापन जरूर महसूस किया होगा। हालत यह है कि रजाई से बाहर निकलने में भी अब दस बार सोचना पड़ रहा है।

दिल्ली का मौसम अचानक से बदल गया है और पारा धड़ाम से नीचे गिर गया है। सोमवार को राजधानी का न्यूनतम तापमान (Minimum Temperature) लुढ़क कर 5.7 डिग्री सेल्सियस पर आ गया, जो इस मौसम के सामान्य तापमान से करीब 4.6 डिग्री कम है। इसी को देखते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दिल्ली में 'येलो अलर्ट' जारी कर दिया है। यानी, अभी राहत की उम्मीद कम है और अगले कुछ दिन शीत लहर (Cold Wave) का सामना करना पड़ेगा।

11 दिनों तक चलेगा 'शीत लहर' का टॉर्चर

आमतौर पर हम देखते हैं कि कड़ाके की सर्दी 4 से 6 दिन पड़ती है और फिर थोड़ी राहत मिल जाती है। लेकिन, IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने जो भविष्यवाणी की है, वो डराने वाली है। उन्होंने कहा कि इस बार 'शीत लहर' जल्दी जाने वाली नहीं है। इस बार सर्दी का यह दौर 11 दिनों तक लंबा खिंच सकता है।

इस बार की यह जानलेवा सर्दी 'ला-नीना' (La Nina) की वजह से पड़ रही है। जब प्रशांत महासागर में ला-नीना की स्थिति बनती है, तो भारत में कड़ाके की ठंड पड़ती है।

इन राज्यों वालों, मफलर-जैकेट तैयार रखो!

मौसम विभाग ने साफ़ कर दिया है कि उत्तर भारत के मैदानी इलाके सबसे ज्यादा ठिठुरेंगे। अगर आप इन राज्यों में रहते हैं, तो अपना खास ख्याल रखें:

  • पंजाब और हरियाणा
  • राजस्थान
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्य प्रदेश
  • महाराष्ट्र (विदर्भ और मराठवाड़ा इलाके)

दिसंबर, जनवरी और फरवरी के महीनों में यहाँ दिन का तापमान सामान्य से काफी कम रहने वाला है।

हैरान करने वाली बात: पहाड़ों पर कम सर्दी?

मौसम का गणित इस बार थोड़ा उल्टा चल रहा है। एक तरफ जहां मैदानी इलाकों में लोगों की कंपकंपी छूट रही है, वहीं पहाड़ी और पूर्वोत्तर (North-East) इलाकों में सर्दी 'थोड़ी कम' रहने का अनुमान है।
IMD के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और बिहार-झारखंड के कुछ हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से थोड़ा 'ज्यादा' रह सकता है। यानी, पहाड़ों पर उतनी भीषण ठंड शायद न पड़े जितनी मैदानों में पड़ने वाली है। पहाड़ी इलाकों में इस बार बर्फबारी भी औसत से कम होने के आसार हैं।