Delhi Politics : जज और भाजपा के बीच क्या रिश्ता है? सौरभ भारद्वाज के तीखे सवालों से मचा हड़कंप
News India Live, Digital Desk: दिल्ली के कैबिनेट मंत्री और AAP के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान न्यायपालिका और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच "कथित तालमेल" पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यह विवाद दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा द्वारा शराब नीति मामले (CBI Case) में दिए गए एक ताज़ा स्टे ऑर्डर (Stay Order) के बाद शुरू हुआ है।
विवाद की मुख्य वजह (The Spark of Conflict)
हाल ही में राउज एवेन्यू कोर्ट (निचली अदालत) ने दिल्ली शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल सहित सभी 23 आरोपियों को आरोपमुक्त (Discharge) कर दिया था। साथ ही, अदालत ने सीबीआई की जांच पर कड़ी टिप्पणियां करते हुए जांच अधिकारी पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
हाईकोर्ट का हस्तक्षेप: जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सीबीआई की याचिका पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत की उन टिप्पणियों और कार्रवाई के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।
सौरभ भारद्वाज का हमला: इस स्टे ऑर्डर के बाद सौरभ भारद्वाज ने पूछा— "भाजपा नेताओं को पहले से कैसे पता होता है कि कोर्ट में क्या होने वाला है?"
सौरभ भारद्वाज द्वारा उठाए गए 3 बड़े सवाल
भाजपा का 'पूर्वानुमान': भारद्वाज ने दावा किया कि भाजपा नेता कपिल मिश्रा और प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कोर्ट के आदेश से पहले ही सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया था कि "पिक्चर अभी बाकी है"। उन्होंने सवाल किया कि क्या भाजपा को अदालती आदेशों की पहले से जानकारी मिल रही है?
जस्टिस और भाजपा का संबंध: मंत्री ने सीधे तौर पर पूछा कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा और भाजपा के बीच क्या संबंध है, जो भाजपा नेता इतने आश्वस्त नजर आते हैं।
न्यायपालिका की निष्पक्षता: भारद्वाज ने चिंता जताई कि क्या जांच एजेंसियां और भाजपा मिलकर अदालती प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
कोर्ट का पक्ष और अगली कार्यवाही
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने स्पष्ट किया है कि प्रथम दृष्टया निचली अदालत की टिप्पणियां 'त्रुटिपूर्ण' (Erroneous) प्रतीत होती हैं।
नोटिस जारी: हाई कोर्ट ने सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी कर इस मामले में अपना पक्ष रखने को कहा है।
तारीख: इस मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च 2026 को होगी। तब तक सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगी रहेगी।
भाजपा का पलटवार
भाजपा ने सौरभ भारद्वाज के इन बयानों को 'अदालत की अवमानना' करार दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि जब फैसला पक्ष में आता है तो AAP न्यायपालिका की तारीफ करती है, और जब प्रक्रिया के तहत रोक लगती है, तो वे जजों पर निजी हमले शुरू कर देते हैं।