Dasha Mata Vrat 2026 : घर की सुख-समृद्धि के लिए आज ही करें ये विशेष पूजा जानें शुभ मुहूर्त, विधि और नियम
News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में दशा माता व्रत (Dasha Mata Vrat) का विशेष महत्व है। यह व्रत हर साल चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत घर की बिगड़ी हुई 'दशा' (आर्थिक और मानसिक स्थिति) को सुधारने और सुख-समृद्धि वापस लाने के लिए किया जाता है। सुहागिन महिलाएं अपने परिवार की खुशहाली और सौभाग्य के लिए यह कठिन व्रत रखती हैं।
दशा माता व्रत 2026: तिथि और मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, इस साल दशमी तिथि का विवरण इस प्रकार है:
दशमी तिथि प्रारंभ: 12 मार्च 2026, गुरुवार शाम 05:45 बजे से।
दशमी तिथि समाप्त: 13 मार्च 2026, शुक्रवार रात 08:11 बजे तक।
व्रत की तारीख: उदयातिथि के अनुसार, दशा माता का व्रत आज यानी 13 मार्च 2026 (शुक्रवार) को रखा जा रहा है।
पूजा की सरल विधि और 'डोरा' परंपरा
स्नान और संकल्प: आज सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (संभव हो तो पीले या लाल) धारण कर व्रत का संकल्प लें।
सूत का डोरा: इस व्रत में कच्चे सूत का 10 गांठ वाला डोरा तैयार किया जाता है। इसे हल्दी और कुमकुम से रंगा जाता है।
पीपल पूजा: दशा माता के रूप में पीपल के वृक्ष की पूजा की जाती है। वृक्ष पर रोली, अक्षत, फूल और भोग अर्पित करें।
कथा और परिक्रमा: पीपल के तने पर सूत लपेटते हुए 10 बार परिक्रमा करें और दशा माता की पौराणिक कथा (राजा नल और रानी दमयंती की कथा) सुनें।
डोरा धारण करना: पूजा के बाद उस 10 गांठ वाले पवित्र डोरे को गले में धारण किया जाता है। इसे साल भर पहनने की परंपरा है।
व्रत के जरूरी नियम (क्या करें, क्या न करें?)
एक समय भोजन: इस व्रत में दिन में केवल एक बार ही भोजन किया जाता है।
नमक का त्याग: भोजन में नमक का प्रयोग वर्जित माना गया है। गेहूं से बने पकवान या लापसी का सेवन करना शुभ होता है।
वस्तुओं का लेन-देन: आज के दिन घर की कोई भी वस्तु (जैसे दूध, दही या धन) किसी बाहरी व्यक्ति को नहीं देनी चाहिए। माना जाता है कि इससे घर की बरकत चली जाती है।
साफ-सफाई: व्रत के दिन घर में झाड़ू-पोछा या साफ-सफाई करने से बचना चाहिए (इसे पूजा से पहले ही संपन्न कर लें)।
क्यों किया जाता है यह व्रत?
पौराणिक कथा के अनुसार, जब राजा नल की 'दशा' खराब हुई थी, तब रानी दमयंती ने यह व्रत किया था, जिससे उनका खोया हुआ राजपाठ और वैभव वापस मिल गया था। तभी से यह विश्वास है कि जो भी महिला पूरी श्रद्धा से यह व्रत करती है, उसके घर से दरिद्रता दूर होती है।