Cow State Animal Demand : गौ माता को मिले राज्य पशु का दर्जा ,वाराणसी में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की हुंकार; सीएम योगी से की विशेष अपील

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News India Live, Digital Desk : धर्म नगरी काशी पहुंचे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश सरकार से गाय को 'राज्य पशु' घोषित करने की पुरजोर मांग की है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे आध्यात्मिक राज्य में गौ रक्षा केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक कर्तव्य होना चाहिए।

1. क्यों उठी 'राज्य पशु' बनाने की मांग?

शंकराचार्य ने अपने संबोधन में कई महत्वपूर्ण तर्क दिए:

सांस्कृतिक महत्व: हिंदू धर्म में गाय को माता का दर्जा प्राप्त है और वे समस्त देवी-देवताओं का निवास स्थान मानी जाती हैं।

संरक्षण की आवश्यकता: गाय को राज्य पशु घोषित करने से उनके संरक्षण के लिए कड़े कानून बनेंगे और सड़कों पर घूम रहे गोवंश को सुरक्षित आश्रय मिल सकेगा।

उत्तर प्रदेश की पहचान: उन्होंने तर्क दिया कि जब अन्य राज्यों ने अपने विशिष्ट पशुओं को यह दर्जा दिया है, तो 'राम-कृष्ण' की धरती पर गाय को यह सम्मान मिलना ही चाहिए।

2. 'गौ प्रतिष्ठा ध्वज' और राष्ट्रव्यापी अभियान

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पिछले काफी समय से 'गौ ध्वज स्थापना यात्रा' के माध्यम से देश भर में जनजागरण कर रहे हैं।

लक्ष्य: उनका अंतिम लक्ष्य गाय को भारत का 'राष्ट्रमाता' घोषित करवाना और गौहत्या को पूरी तरह से प्रतिबंधित करना है।

शपथ: वाराणसी में उन्होंने भक्तों को संकल्प दिलाया कि वे तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक गौ माता को वह सम्मान नहीं मिल जाता जिसकी वे हकदार हैं।

3. उत्तर प्रदेश में वर्तमान स्थिति

उत्तर प्रदेश सरकार पहले से ही गौ संरक्षण के लिए कई योजनाएं चला रही है, लेकिन आधिकारिक दर्जे को लेकर तुलनात्मक स्थिति यहाँ दी गई है:

वर्तमान दर्जामांगसरकार के प्रयास
बारासिंघा (उत्तर प्रदेश का वर्तमान राज्य पशु)गाय को राज्य पशु घोषित किया जाए।'मुख्यमंत्री निराश्रित गौवंश सहभागिता योजना'।
कोई नहींगाय को 'राष्ट्रमाता' का दर्जा मिले।बड़े पैमाने पर गौशालाओं का निर्माण।

4. सरकार के लिए संदेश

शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में गौशालाओं के लिए बहुत काम हुआ है, लेकिन अब समय आ गया है कि इसे एक 'संवैधानिक सम्मान' में बदला जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि गाय को राज्य पशु बनाया जाता है, तो इसके प्रति लोगों की श्रद्धा और बढ़ेगी तथा गौ-तस्करी जैसी घटनाओं पर पूर्ण विराम लगेगा।

 क्या बदलेगा फैसला?

राजनीतिक गलियारों में इस मांग को काफी गंभीरता से देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी चुनाव और धार्मिक भावनाओं को देखते हुए सरकार इस दिशा में कोई बड़ा कदम उठा सकती है। हालांकि, 'बारासिंघा' के स्थान पर गाय को राज्य पशु बनाना एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिस पर कैबिनेट को विचार करना होगा।

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