Constitutional Right : लाखों यात्रियों को मिलेगी सुविधा, कर्नाटक HC ने बाइक टैक्सी संचालन को वैध बनाने की राह खोली

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News India Live, Digital Desk:  Constitutional Right : कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए राज्य सरकार को बाइक टैक्सी सेवाओं के नियमन के लिए एक व्यापक नीति बनाने का निर्देश दिया है. इस फैसले ने बाइक टैक्सी चालकों और इन सेवाओं का उपयोग करने वाले यात्रियों दोनों को बड़ी राहत प्रदान की है, क्योंकि न्यायालय ने अंतरिम अवधि के लिए इन चालकों के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है.

न्यायालय ने कहा है कि जब तक कोई ठोस नीति नहीं बन जाती, तब तक संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी) के तहत किसी भी पेशे का पालन करने या किसी व्यापार को करने के मौलिक अधिकार को ध्यान में रखते हुए चालकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए. न्यायमूर्ति सी नागार्जुन गौड़ा ने यह आदेश वीनस इंटीग्रेटेड सर्विसेज (आरडीक्स बाइकों के ऑपरेटर) द्वारा दायर एक याचिका पर दिया है. याचिकाकर्ताओं ने इस बात पर जोर दिया था कि कर्नाटक में मौजूदा कानून उन्हें बाइक टैक्सी संचालित करने से नहीं रोकता है.

उच्च न्यायालय ने इस मुद्दे की गंभीरता को समझते हुए परिवहन विभाग को 60 दिनों के भीतर नीति का मसौदा तैयार करने का आदेश दिया है. यह समय सीमा यह सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित की गई है कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे को लंबित न रखा जाए. राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया कि नीति बनाने की प्रक्रिया पहले से ही जारी है. उच्च न्यायालय ने 23 अप्रैल, 2021 को सरकार द्वारा जारी उस नोटिफिकेशन पर भी रोक लगा दी है, जो अनिश्चित प्रकृति का था और जिसमें केवल बिजली से चलने वाली बाइक टैक्सियों के परिचालन की अनुमति थी, जबकि पारंपरिक ईंधन से चलने वाली बाइक टैक्सियों को प्रतिबंधित किया गया था. न्यायालय ने यह तर्क दिया कि नोटिफिकेशन में स्पष्टता का अभाव था और यह मनमाना प्रतीत होता है.

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का भी उल्लेख किया, जिसमें केंद्र सरकार को बाइक टैक्सी सहित एग्रीगेटर्स के नियमन के लिए एक राष्ट्रव्यापी नीति बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया था. कर्नाटक सरकार की इस नई नीति से यह उम्मीद है कि इससे बाइक टैक्सी बाजार में अधिक स्थिरता और स्पष्टता आएगी, जिससे न केवल सेवा प्रदाताओं को लाभ होगा बल्कि यात्रियों को भी सस्ती और सुलभ परिवहन सुविधाएँ मिलेंगी. यह फैसला दिखाता है कि कैसे न्यायपालिका, सार्वजनिक सेवाओं और नागरिकों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

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