Congress Leader's Remark : जब इंसानियत पर सियासत भारी पड़ गई, एक तस्वीर और एक असंवेदनशील सवाल

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News India Live, Digital Desk: इंटरनेट और सोशल मीडिया की दुनिया भी अजीब है। यहाँ कब, कौन, क्या कह दे और उस पर कैसा हंगामा खड़ा हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। लेकिन कभी-कभी कुछ ऐसी बातें हो जाती हैं जो हमें सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि क्या हम अपनी इंसानियत खोते जा रहे हैं? ऐसा ही एक मामला सामने आया जब एक कांग्रेस नेता ने एक ऐसी तस्वीर पर टिप्पणी की, जिसे देखकर किसी का भी दिल दहल जाए।

वो दर्दनाक तस्वीर जिस पर शुरू हुआ विवाद

एक तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की गई थी। यह तस्वीर किसी धमाके वाली जगह की थी, जहाँ एक शख्स बुरी तरह से घायल अवस्था में खून से लथपथ ज़मीन पर पड़ा था। उसके कपड़े जल चुके थे और शरीर पर गहरे ज़ख्म दिख रहे थे। यह तस्वीर अपने आप में उस हादसे की भयावहता और उस इंसान के दर्द को बयां कर रही थी। ऐसी तस्वीरों को देखकर अक्सर लोग पीड़ित के लिए प्रार्थना करते हैं या दुख जताते हैं।

लेकिन इस तस्वीर पर एक कांग्रेस नेता ने कुछ ऐसा लिख दिया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। उन्होंने उस दर्दनाक तस्वीर को शेयर करते हुए एक सवाल पूछा, जिसका मतलब कुछ ऐसा था कि, "क्या इसके बाद वो बच गया होगा या...?" यह सवाल किसी मज़ाक की तरह लग रहा था, जैसे किसी फिल्म का सीन देखकर पूछा जा रहा हो कि हीरो बच पाएगा या नहीं।

एक कमेंट और इंसानियत पर उठे सवाल

जैसे ही यह टिप्पणी लोगों की नज़र में आई, सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया। लोगों को यकीन ही नहीं हो रहा था कि कोई किसी की तकलीफ और दर्द को देखकर ऐसा सवाल कैसे पूछ सकता है। यह किसी व्यक्ति की मौत और जिंदगी का सवाल था, न कि मनोरंजन का विषय।

लोगों ने कांग्रेस नेता को उनकी इस असंवेदनशील टिप्पणी के लिए जमकर लताड़ा। कई लोगों ने लिखा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन इंसानियत से बढ़कर कुछ नहीं होता। किसी के दुख का मज़ाक उड़ाना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता। यह मामला इतना बढ़ा कि राजनीतिक गलियारों में भी इसकी चर्चा होने लगी।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सोशल मीडिया पर हम क्या लिख रहे हैं और उसका दूसरों पर क्या असर पड़ सकता है। किसी की पीड़ा को समझे बिना उस पर हल्की-फुल्की टिप्पणी करना कितना गलत है, यह इस घटना से साफ़ ज़ाहिर होता है। यह हमें याद दिलाता है कि वर्चुअल दुनिया में भी हमें अपनी संवेदनाओं को ज़िंदा रखने की ज़रूरत है, क्योंकि शब्दों में भी किसी के ज़ख्मों पर मरहम लगाने और उन्हें कुरेदने की ताकत होती है।