Congress Leader : अलविदा मोहसिना किदवई सियासत के एक सुनहरे अध्याय का समापन, 94 साल की उम्र में दिग्गज कांग्रेस नेत्री का निधन
News India Live, Digital Desk: भारतीय राजनीति की एक बेहद शालीन और कद्दावर शख्सियत मोहसिना किदवई अब हमारे बीच नहीं रहीं। 94 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से कांग्रेस खेमे सहित पूरे देश के राजनीतिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई है। मोहसिना जी सिर्फ एक नेता नहीं थीं, बल्कि वे इंदिरा गांधी की उस 'कोर टीम' का हिस्सा थीं, जिसने मुश्किल दौर में कांग्रेस को फिर से खड़ा करने में जान फूंक दी थी।
आजमगढ़ की वो ऐतिहासिक जीत, जिसने बदल दी थी देश की किस्मत
मोहसिना किदवई का नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में तब दर्ज हुआ, जब उन्होंने 1978 के आजमगढ़ उपचुनाव में जीत हासिल की। यह वह दौर था जब इमरजेंसी के बाद कांग्रेस पूरी तरह बिखर चुकी थी और इंदिरा गांधी राजनीतिक निर्वासन जैसा समय काट रही थीं। उस समय मोहसिना किदवई की जीत ने दिल्ली तक हलचल मचा दी थी। इसी जीत को 'कांग्रेस के पुनरुद्धार' की शुरुआत माना जाता है, जिसने बाद में इंदिरा गांधी की सत्ता में वापसी की राह आसान की।
यूपी से दिल्ली तक रहा रसूख, संभाली बड़ी जिम्मेदारियां
1932 में जन्मी मोहसिना किदवई का राजनीतिक सफर लगभग पांच दशकों तक फैला रहा। वे उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रहने के अलावा केंद्र में भी कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की कमान संभाल चुकी थीं। वे लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों की सदस्य रहीं और कांग्रेस संगठन में महासचिव जैसे अहम पदों पर कार्य किया। उनकी गिनती उन गिने-चुने नेताओं में होती थी जिन पर गांधी परिवार आंख मूंदकर भरोसा करता था। महिला सशक्तिकरण और अल्पसंख्यक कल्याण के लिए उनके कार्यों को हमेशा याद किया जाएगा।
सादगी और सिद्धांतों की मिसाल: एक युग का अंत
अपनी मृदुभाषी छवि और अडिग सिद्धांतों के लिए मशहूर मोहसिना किदवई ने भारतीय राजनीति के कई उतार-चढ़ाव देखे। उन्होंने सोनिया गांधी और राहुल गांधी के दौर में भी मार्गदर्शक की भूमिका निभाई। उनके निधन पर विभिन्न दलों के राजनेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आज हमने एक ऐसी नेत्री को खो दिया है जो गंगा-जमुनी तहजीब की सच्ची मिसाल थीं। उनके जाने से जो खालीपन पैदा हुआ है, उसे भरना नामुमकिन होगा।