खेजड़ी काटने पर लगा पूर्ण विराम ,राजस्थान सरकार का बड़ा ऐलान नया कानून आने तक नहीं कटेगा एक भी पेड़
News India Live, Digital Desk: राजस्थान का राजकीय वृक्ष 'खेजड़ी' अब पूरी तरह सुरक्षित है। पर्यावरण प्रेमियों और बिश्नोई समाज के लंबे संघर्ष के बाद, राज्य सरकार ने खेजड़ी की कटाई पर पूरी तरह रोक लगा दी है। सरकार ने विधानसभा में आश्वासन दिया है कि खेजड़ी को बचाने के लिए जल्द ही एक नया विधान लाया जाएगा।
1. विधानसभा में सरकार का बड़ा वादा
बीकानेर और पश्चिमी राजस्थान के इलाकों में सोलर प्रोजेक्ट्स और विकास कार्यों के नाम पर खेजड़ी के पेड़ों की कटाई का मुद्दा सदन में गूँजा।
पूर्ण पाबंदी: सरकार ने कहा कि जब तक खेजड़ी संरक्षण कानून (Khejri Protection Act) पारित नहीं हो जाता, तब तक किसी भी सरकारी या निजी प्रोजेक्ट के लिए एक भी खेजड़ी का पेड़ काटने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
दोषियों पर होगी कार्रवाई: यदि कोई अवैध रूप से खेजड़ी काटते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
2. क्यों खास है खेजड़ी का पेड़?
खेजड़ी को 'रेगिस्तान का कल्पवृक्ष' कहा जाता है। यह राजस्थान की पारिस्थितिकी और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है:
पर्यावरण रक्षक: यह शून्य से कम और 50 डिग्री से अधिक तापमान में भी जीवित रहता है और भूमि की उर्वरता बनाए रखता है।
सांस्कृतिक महत्व: 1730 में खेजड़ली गांव में अमृता देवी बिश्नोई के नेतृत्व में 363 लोगों ने खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया था।
3. सोलर प्रोजेक्ट्स और खेजड़ी का विवाद
पिछले कुछ समय से बीकानेर और जैसलमेर बेल्ट में सोलर कंपनियों द्वारा हजारों खेजड़ी के पेड़ काटने की खबरें सामने आई थीं।
बिश्नोई समाज का विरोध: इस मुद्दे पर बिश्नोई समाज और पर्यावरण कार्यकर्ता लंबे समय से आंदोलनरत थे।
नया नियम: अब सरकार कंपनियों को ऐसे वेन्यू चुनने के लिए बाध्य करेगी जहाँ खेजड़ी के पेड़ कम हों या उन्हें बिना काटे प्रोजेक्ट पूरा किया जा सके।
4. क्या होगा नए कानून में?
संभावित कानून के तहत खेजड़ी काटने को 'संगीन अपराध' की श्रेणी में रखा जा सकता है। इसमें:
पेड़ों की गिनती (Census) अनिवार्य होगी।
अनिवार्य वृक्षारोपण (Compensatory Afforestation) की दर को बढ़ाया जाएगा।
खेजड़ी के संरक्षण के लिए स्थानीय समुदायों को और अधिक अधिकार दिए जाएंगे।