सिर्फ एक गीत नहीं, ये भारत की आत्मा का जयघोष है वन्दे मातरम्के 150 साल पूरे होने पर बोले CM योगी

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News India Live, Digital Desk : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'वन्दे मातरम्' गीत के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्होंने इस ऐतिहासिक गीत के रचयिता बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि 'वन्दे मातरम्' सिर्फ़ एक राष्ट्रगीत नहीं, बल्कि यह करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा का वह महामंत्र है जिसने आज़ादी की लड़ाई में क्रांतिकारियों के दिलों में जोश भर दिया था।

लखनऊ में आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने 'वन्दे मातरम्' के गौरवशाली इतिहास को याद किया। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज़ादी के बाद इस गीत को लेकर कई तरह के विवाद पैदा करने की कोशिश की गई, जबकि सच तो यह है कि यह गीत किसी जाति, धर्म या संप्रदाय का नहीं, बल्कि मां भारती की वंदना का गीत है।

"हर भारतीय का कंठहार है वन्दे मातरम्"

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में कहा, "जब देश ग़ुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था, तब 'वन्दे मातरम्' के इस जयघोष ने हर भारतीय के मन में स्वाभिमान और स्वतंत्रता की ज्वाला को जलाए रखा। यह वह मंत्र था जिसे गाते हुए हज़ारों स्वतंत्रता सेनानियों ने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया था।"

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि 'वन्दे मातरम्' भारत की सनातन परंपरा का प्रतीक है और हर भारतीय को इस पर गर्व होना चाहिए। सीएम योगी ने कहा, "यह गीत हमें हमारी जड़ों से जोड़ता है और हमें यह याद दिलाता है कि हमारी पहचान हमारी महान संस्कृति और विरासत से है। 'वन्दे मातरम्' हर भारतीय का कंठहार है और इसे किसी भी तरह के विवाद से जोड़ना इसके महान इतिहास का अपमान है।"

युवाओं से की ख़ास अपील

सीएम योगी ने कार्यक्रम में मौजूद युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे 'वन्दे मातरम्' के असली अर्थ और इसके पीछे की भावना को समझें। उन्होंने कहा कि आज जब देश 'अमृत काल' से गुज़र रहा है, तो यह ज़रूरी है कि हमारी युवा पीढ़ी अपनी विरासत को समझे और उस पर गर्व करे।

यह कार्यक्रम 'वन्दे मातरम्' की 150वीं वर्षगांठ को समर्पित था, जिसकी रचना बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय ने 1870 के दशक में की थी और इसे उनके प्रसिद्ध उपन्यास 'आनंदमठ' में शामिल किया गया था।