CJI का कड़ा रुख न्यायपालिका में भ्रष्टाचार वाले NCERT चैप्टर पर भड़के मुख्य न्यायाधीश

Post

News India Live, Digital Desk : भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने स्कूली किताबों में न्यायपालिका की छवि को लेकर एक गंभीर मुद्दा उठाया है। NCERT की किताबों में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' के उल्लेख पर कड़ी आपत्ति जताते हुए CJI ने इसे संस्थान पर एक 'नियोजित हमला' करार दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह की बातें युवा पीढ़ी के मन में देश के सबसे भरोसेमंद स्तंभ के प्रति अविश्वास पैदा कर सकती हैं।

CJI की नाराजगी की मुख्य वजह

हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान CJI ने NCERT (National Council of Educational Research and Training) की पाठ्यपुस्तकों में शामिल कुछ अंशों का जिक्र किया।

नकारात्मक चित्रण: उन्होंने कहा कि बिना किसी ठोस डेटा या संदर्भ के न्यायपालिका को भ्रष्ट बताना गलत है।

संस्थान की गरिमा: CJI के अनुसार, व्यक्तिगत मामलों में भ्रष्टाचार हो सकता है, लेकिन पूरे संस्थान को इस तरह से चित्रित करना न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्ठा पर चोट है।

NCERT का पक्ष: हालांकि NCERT ने इन बदलावों को 'तथ्यात्मक' बताया था, लेकिन CJI ने इसे 'कैलकुलेटेड अटैक' (Calculated Attack) की संज्ञा दी है।

क्यों गरमाया है यह विवाद?

विवाद की जड़ NCERT की राजनीति विज्ञान (Political Science) की किताबों में किए गए कुछ बदलाव हैं।

पुराने चैप्टर्स का हवाला: किताबों में अदालती देरी और भ्रष्टाचार के उदाहरणों को शामिल किया गया है।

भ्रम की स्थिति: कानून विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों को कानून की बारीकियों के बजाय उसकी कमियों पर केंद्रित किया जा रहा है।

सुधार की मांग: न्यायपालिका की ओर से संकेत दिए गए हैं कि शैक्षणिक सामग्री में सुधार की जरूरत है ताकि वह निष्पक्ष और संतुलित रहे।

न्यायपालिका बनाम कार्यपालिका?

यह पहली बार नहीं है जब न्यायपालिका और सरकार (जिसके तहत NCERT काम करता है) के बीच किसी मुद्दे पर असहमति दिखी हो।

कॉलेजियम सिस्टम: इससे पहले जजों की नियुक्ति को लेकर भी दोनों पक्षों में खींचतान रही है।

पाठ्यक्रम का राजनीतिकरण: विशेषज्ञों का एक वर्ग इसे शिक्षा के राजनीतिकरण के रूप में देख रहा है, जबकि दूसरा इसे सिस्टम की पारदर्शिता के लिए जरूरी मानता है।

CJI ने क्या समाधान सुझाया?

CJI ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका आलोचना के खिलाफ नहीं है, लेकिन आलोचना तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि:

छात्रों को यह सिखाया जाना चाहिए कि न्यायपालिका कैसे काम करती है।

भ्रष्टाचार के इक्का-दुक्का मामलों को पूरे सिस्टम की विफलता के रूप में नहीं दिखाया जाना चाहिए।

अदालती सुधारों और ऐतिहासिक फैसलों को भी समान महत्व मिलना चाहिए।