Citing Tradition: महाकाल मंदिर का प्रबंधन चाहता है महानिर्वाणी अखाड़ा
- by Archana
- 2025-08-13 09:53:00
Newsindia live,Digital Desk: विश्व प्रसिद्ध द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर के प्रबंधन को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। शैव परंपरा के सबसे पुराने और प्रमुख अखाड़ों में से एक, श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी ने मंदिर के संचालन और प्रबंधन को अपने हाथ में सौंपने की मांग उठाई है। अखाड़े का दावा है कि ऐतिहासिक और धार्मिक परंपराओं के अनुसार मंदिर के प्रबंधन का अधिकार उन्हीं के पास होना चाहिए।
महानिर्वाणी अखाड़े का यह दावा मुख्य रूप से महाकाल मंदिर की सबसे अनूठी और विश्व प्रसिद्ध 'भस्म आरती' की परंपरा पर आधारित है। पौराणिक काल से ही महाकाल की भस्म आरती करने का एकमात्र अधिकार महानिर्वाणी अखाड़े के नागा साधुओं के पास रहा है। यह एक ऐसी परंपरा है जो आज भी जीवित है और केवल इसी अखाड़े के संत इस आरती को संपन्न कराते हैं। अखाड़े का तर्क है कि जब मंदिर की आत्मा मानी जाने वाली इस सबसे महत्वपूर्ण पूजा का अधिकार उनके पास है, तो मंदिर का संपूर्ण प्रबंधन भी उन्हें ही सौंपा जाना चाहिए।
वर्तमान में, महाकाल मंदिर का प्रबंधन एक सरकारी समिति द्वारा किया जाता है, जिसके अध्यक्ष उज्जैन के कलेक्टर होते हैं। महानिर्वाणी अखाड़े का आरोप है कि सरकारी प्रबंधन के तहत मंदिर की प्राचीन परंपराओं और मर्यादाओं का सही ढंग से पालन नहीं हो रहा है। उनका मानना है कि मंदिर को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर अखाड़े को सौंप देना चाहिए ताकि पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक अनुष्ठान पूरी तरह से शास्त्र सम्मत तरीके से संपन्न हो सकें।
यह मांग केवल एक प्रशासनिक नियंत्रण की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह परंपरा और आधुनिक प्रबंधन प्रणाली के बीच के टकराव को भी दर्शाती है। महानिर्वाणी अखाड़े का मानना है कि केवल वे ही महाकाल की पूजा के असली रहस्य और महत्व को समझते हैं और इसलिए मंदिर का संचालन भी उनके हाथों में सुरक्षित रहेगा। अब देखना यह होगा कि सरकार और प्रशासन इस मांग पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
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