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March 29 2026 01:51 am

ईरान युद्ध के बीच चीन की सीक्रेट चाल अमेरिका का बड़ा खुलासा तेहरान को भेजे जा रहे हैं घातक सेमीकंडक्टर चिप्स

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News India Live, Digital Desk: वाशिंगटन और बीजिंग के बीच चल रही 'कोल्ड वॉर' अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुँच गई है। अमेरिका ने सनसनीखेज दावा किया है कि चीन की सबसे बड़ी चिप निर्माता कंपनी, SMIC (Semiconductor Manufacturing International Corporation), युद्ध के बीच ईरान की सेना को गुप्त रूप से सेमीकंडक्टर चिप्स और उन्हें बनाने वाले टूल्स सप्लाई कर रही है। अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यह सहयोग केवल सामान भेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि चीन ईरान को इस तकनीक का सैन्य उपयोग करने के लिए तकनीकी ट्रेनिंग भी दे रहा है। इस खुलासे के बाद ह्वाइट हाउस में हलचल तेज हो गई है और चीन पर नए कड़े प्रतिबंधों की तलवार लटक गई है।

ईरान की सैन्य ताकत बढ़ा रहा है ड्रैगन? अमेरिका ने घेरा

अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के हवाले से यह बात सामने आई है कि SMIC पिछले एक साल से ईरान के 'मिलिट्री इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स' को आधुनिक चिप्स भेज रहा है। इन चिप्स का इस्तेमाल घातक मिसाइलों, रडार सिस्टम और सैन्य संचार उपकरणों (Communication Systems) में किया जा सकता है। अमेरिका का मानना है कि चीन जानबूझकर ईरान को ऐसी तकनीक दे रहा है जिससे वह युद्ध के मैदान में अधिक घातक साबित हो सके। वाशिंगटन ने इसे वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताते हुए कहा है कि चीन का यह कदम अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का खुला उल्लंघन हो सकता है।

क्या है 'Axis of Evasion'? प्रतिबंधों को ठेंगा दिखा रहा चीन

विशेषज्ञों ने चीन और ईरान के इस मेलजोल को 'Axis of Evasion' यानी 'प्रतिबंधों से बचने वाला धुरा' करार दिया है। चीन खुद भी अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, ऐसे में वह ईरान के साथ मिलकर एक समानांतर सप्लाई चेन तैयार करने की कोशिश में है। अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि इन मशीनों या टूल्स में 'मेड इन यूएसए' तकनीक का थोड़ा भी हिस्सा पाया गया, तो चीन के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, चीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे 'सामान्य व्यापार' बताया है, लेकिन अमेरिका के पास मौजूद सबूत कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।

भारत और दुनिया पर क्या होगा इसका असर?

चीन द्वारा ईरान को सेमीकंडक्टर तकनीक की सप्लाई से न केवल पश्चिम एशिया का संतुलन बिगड़ सकता है, बल्कि वैश्विक टेक मार्केट में भी भारी उथल-पुथल मच सकती है। अगर अमेरिका चीन की चिप कंपनियों पर और कड़े प्रतिबंध लगाता है, तो स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल और एआई (AI) इंडस्ट्री में चिप्स की भारी कमी हो सकती है। भारत के लिए भी यह चिंता का विषय है, क्योंकि मध्य पूर्व में अस्थिरता और सप्लाई चेन में रुकावट का सीधा असर तेल की कीमतों और इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स की उपलब्धता पर पड़ेगा।