छत्तीसगढ़ का टाइगर- जशपुर के लड़के ने हिमालय पर रचा ऐसा इतिहास, जो आज तक कोई नहीं कर पाया

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News India Live, Digital Desk : कहते हैं कि अगर हौसलों में जान हो, तो इंसान चट्टानों का सीना चीरकर भी अपना रास्ता बना लेता है। इस कहावत को सच कर दिखाया है छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के एक छोटे से गांव के लड़के अनीश कुमार टोप्पो ने। पहाड़ों जैसे मजबूत इरादों वाले इस युवा ने हिमाचल प्रदेश की 17,353 फीट ऊंची 'फ्रेंडशिप पीक' पर चढ़ाई कर न केवल छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है, बल्कि एक नया इतिहास भी रच दिया है। वह इस खतरनाक चोटी पर पहुंचने वाले छत्तीसगढ़ के पहले और एकमात्र व्यक्ति बन गए हैं।

सिर्फ चढ़ाई नहीं, दोस्ती की मिसाल भी कायम की

अनीश का यह सफर सिर्फ एक पर्वतारोहण अभियान नहीं था, बल्कि यह दोस्ती, हिम्मत और हार न मानने वाले जज्बे की एक मिसाल भी था। इस अभियान में उनके साथ पांच और साथी थे। चढ़ाई के दौरान, जब वे पीक से महज कुछ सौ मीटर की दूरी पर थे, तभी उनके एक साथी की तबीयत ऑक्सीजन की कमी के कारण अचानक बहुत ज्यादा बिगड़ गई।

माइनस 15 डिग्री सेल्सियस के तापमान और बर्फीली हवाओं के बीच, जब जिंदगी और मौत की जंग चल रही थी, अनीश ने अपने साथी को बचाने के लिए अपनी जान की परवाह नहीं की। उन्होंने लगभग 20 किलोग्राम वजन के अपने दोस्त को अपनी पीठ पर लादा और उसे सुरक्षित बेस कैंप तक पहुंचाया।

एक दोस्त को बचाया, पर सपना नहीं छोड़ा

इतनी खतरनाक स्थिति से गुजरने और शारीरिक-मानसिक रूप से थक जाने के बाद कोई भी शायद वापस लौट जाता, लेकिन अनीश के दिल में तो तिरंगा फहराने का जुनून सवार था। अपने दोस्त को सुरक्षित पहुंचाने के बाद, उन्होंने एक बार फिर अपनी हिम्मत जुटाई और अकेले ही उस बर्फीली चोटी की ओर बढ़ चले, जहां ऑक्सीजन न के बराबर थी।

आखिरकार, उनकी मेहनत रंग लाई। 22 अक्टूबर को सुबह 11:35 बजे, अनीश कुमार टोप्पो ने फ्रेंडशिप पीक की चोटी पर कदम रखा। वहां उन्होंने न केवल तिरंगा फहराया, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान, 'छत्तीसगढ़िया गमछा' को भी लहराकर यह साबित कर दिया कि छत्तीसगढ़ के युवा किसी से कम नहीं हैं।

कौन हैं अनीश टोप्पो?

अनीश जशपुर के बगीचा ब्लॉक के एक साधारण किसान परिवार से आते हैं। पहाड़ों के प्रति उनका जुनून बचपन से ही था। सीमित संसाधनों के बावजूद, उन्होंने कभी हार नहीं मानी। इससे पहले भी वह छत्तीसगढ़ की सबसे ऊंची चोटी 'गौरलाटा' और मैनपाट की 'भालूमाड़ा चोटी' पर चढ़ाई कर चुके हैं।

अनीश टोप्पो की यह सफलता सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। यह छत्तीसगढ़ के उन हजारों-लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणा है, जो अभावों के बावजूद बड़े सपने देखने की हिम्मत रखते हैं। अनीश ने साबित कर दिया है कि अगर जज्बा हो, तो हिमालय भी आपके कदमों में झुक जाता है।