देश से जातिवाद खत्म हो जाएगा तो हम आरक्षण छोड़ देंगे': रिजर्वेशन के विरोध पर केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले का बड़ा पलटवार
भारतीय राजनीति में आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर से केंद्रीय मंच पर गर्मा गया है और इस बार इस पर केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने बेहद तीखा और स्पष्ट बयान दिया है। देश में इन दिनों आरक्षण व्यवस्था को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो चुकी है, जिसके केंद्र में केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले का यह नया बयान है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि जिस दिन इस देश से जाति व्यवस्था और जातिवाद की मानसिकता पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी, उसी दिन दलित और पिछड़े वर्ग के लोग खुद-ब-खुद आरक्षण छोड़ देंगे। केंद्रीय मंत्री का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब देश के विभिन्न हिस्सों में आरक्षण के विरोध और समर्थन में लगातार आवाजें उठ रही हैं।
#जातिवाद के खात्मे तक जारी रहेगा आरक्षण का समर्थन
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने स्पष्ट किया है कि जब तक समाज में ऊंच-नीच का भेद और जातीय भेदभाव जीवित है, तब तक शोषित और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए आरक्षण एक अनिवार्य सुरक्षा कवच की तरह काम करता रहेगा। उन्होंने उन लोगों पर जमकर निशाना साधा जो आए दिन आरक्षण व्यवस्था को समाप्त करने या इसमें बदलाव करने की मांग उठाते रहते हैं। आठवले के मुताबिक, आरक्षण कोई दान या खैरात नहीं है, बल्कि यह सदियों से पीड़ित रहे लोगों को मुख्यधारा में शामिल करने और उन्हें सामाजिक न्याय दिलाने का एक संवैधानिक अधिकार है। उनका मानना है कि जब तक समाज के हर वर्ग को समान अवसर और सम्मान नहीं मिल जाता, तब तक इस व्यवस्था को हटाना सामाजिक न्याय के साथ बड़ा अन्याय होगा।
#आरक्षण के विरोधियों को आठवले का खुला चैलेंज
रामदास आठवले ने आरक्षण का विरोध करने वाले राजनीतिक दलों और संगठनों को आड़े हाथों लेते हुए तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि जो लोग आज आरक्षण व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा रहे हैं और इसके विरोध में रैलियां या बयानबाजी कर रहे हैं, वे असल में देश की सामाजिक समरसता को कमजोर करना चाहते हैं। केंद्रीय मंत्री ने चुनौती भरे अंदाज में कहा कि अगर विरोधियों में वास्तव में दम है, तो वे पहले देश के कोने-कोने से जातिवाद, छुआछूत और सामाजिक भेदभाव को हमेशा के लिए खत्म करके दिखाएं। जिस दिन समाज से जात-पात का जहर पूरी तरह से साफ हो जाएगा, उस दिन किसी भी वर्ग को आरक्षण की आवश्यकता ही नहीं बचेगी और वे खुद इसके पक्ष में त्याग करने के लिए तैयार खड़े मिलेंगे।
#सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में वर्तमान राजनीतिक बहस
देश में आरक्षण के इस ताजा घमासान ने एक बार फिर से यह बहस छेड़ दी है कि क्या भारतीय समाज वाकई जातिगत बंधनों से मुक्त हो पा रहा है या नहीं। विश्लेषकों का मानना है कि रामदास आठवले का यह बयान एनडीए सरकार के भीतर सामाजिक संतुलन बनाए रखने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जो दलित वोट बैंक को यह संदेश देने का काम करता है कि सरकार उनके अधिकारों के साथ पूरी दृढ़ता से खड़ी है। दूसरी ओर, विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। बहरहाल, जब तक देश में चुनावी राजनीति और सामाजिक समीकरणों का ताना-बाना जाति के इर्द-गिर्द बुना रहेगा, तब तक रामदास आठवले जैसे नेताओं के ऐसे बयान राजनीतिक गलियारों में खलबली मचाते रहेंगे और आम जनता के बीच चर्चा का एक बड़ा विषय बने रहेंगे।