महंगाई की मार: सरकार ने बढ़ाया बस यात्रा का किराया

महंगाई की मार: सरकार ने बढ़ाया बस यात्रा का किराया

देशभर में लगातार बढ़ती महंगाई के इस दौर में आम आदमी के जीवन का हर एक पहलू प्रभावित होता नजर आ रहा है। रोजमर्रा की जरूरत की चीजों, खाद्य पदार्थों और ईंधन के दामों में उछाल के बाद अब परिवहन क्षेत्र से भी एक बुरी खबर सामने आई है। सरकार और परिवहन विभाग ने बस यात्रा के किराए में बढ़ोतरी (Bus Fare Hike) करने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है, जिसके लागू होने के बाद से आम यात्रियों की जेब पर आर्थिक बोझ काफी बढ़ गया है। नौकरीपेशा लोग, छात्र, व्यापारी और रोजाना सफर करने वाले आम नागरिक जो अपनी दैनिक यात्रा के लिए सरकारी या अनुबंधित बसों पर निर्भर रहते हैं, उनके मासिक बजट पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। पेट्रोल, डीजल और स्पेयर पार्ट्स की बढ़ती कीमतों का हवाला देते हुए बस ऑपरेटर्स और परिवहन निगमों द्वारा लंबे समय से किराया बढ़ाने की मांग की जा रही थी, जिसे अब मंजूरी मिलने के बाद यात्रियों को महंगे टिकट के साथ सफर करना पड़ रहा है।

क्यों बढ़ानी पड़ी बस यात्रा की कीमतें? जानिए डीजल, मेंटेनेंस और परिचालन लागत का पूरा गणित

बस यात्रा के किराए में अचानक हुई इस बढ़ोतरी के पीछे परिवहन निगमों और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मुख्य रूप से परिचालन लागत (Operating Cost) में आई बेतहाशा तेजी को जिम्मेदार ठहराया गया है। पिछले कुछ महीनों में ग्लोबल मार्केट और घरेलू स्तर पर डीजल और सीएनजी के दाम लगातार उच्च स्तर पर बने हुए हैं। इसके अलावा बसों के टायर्स, इंजन ऑयल, स्पेयर पार्ट्स और बसों के रख-रखाव (Maintenance) का खर्च भी बहुत ज्यादा बढ़ गया है। बस मालिकों और ट्रांसपोर्ट संघों का कहना था कि पुरानी दरों पर बसों का संचालन करना अब पूरी तरह से घाटे का सौदा साबित हो रहा था, क्योंकि कर्मचारियों का वेतन और टैक्स चुकाना भी मुश्किल हो रहा था। इन्ही तमाम आर्थिक दबावों और घाटे से उबरने के लिए सरकार ने मजबूरी में किराए में संशोधन करने का यह फैसला लिया है, हालांकि आम जनता का मानना है कि इस बढ़ोतरी से उनके परिवार का बजट पूरी तरह चरमरा गया है।

स्लैब और किलोमीटर के हिसाब से तय हुई नई रेट लिस्ट, जानिए अब कितना चुकाना होगा अतिरिक्त किराया

परिवहन विभाग द्वारा जारी की गई नई रेट लिस्ट (New Bus Fare Rate List) के अनुसार, किराए में प्रति किलोमीटर के हिसाब से बढ़ोतरी की गई है। साधारण बसों से लेकर एक्सप्रेस और एसी (AC Buses) बसों तक के किरायों में अलग-अलग स्लैब के अनुसार इजाफा हुआ है। उदाहरण के लिए, यदि आप रोजाना छोटे सफर यानी 10 से 50 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं, तो आपको अब पहले के मुकाबले 10 से 30 रुपये तक अधिक चुकाने होंगे। वहीं लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के टिकट के दामों में 50 से लेकर 150 रुपये तक की सीधी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। लोकल रूटों पर चलने वाली बसों के न्यूनतम किराए में भी बदलाव किया गया है ताकि छोटे सफर के यात्रियों पर भी इसका आंशिक असर पड़े। नई दरों की यह सूची सभी बस अड्डों और टिकटिंग काउंटर्स पर चस्पा कर दी गई है, जिससे यात्रियों को सफर करने से पहले ही बढ़े हुए दामों की पूरी जानकारी मिल सके।

यात्रियों की नाराजगी और बजट पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभाव पर एक नजर

सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम के बाद से आम यात्रियों और विभिन्न यात्री संघों में खासी नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि एक तरफ उनकी आमदनी या सैलरी में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हो रही है, और दूसरी तरफ खाने-पीने के सामान से लेकर अब यात्रा करना भी लगातार महंगा होता जा रहा है। महंगाई के इस दुष्चक्र में सबसे ज्यादा परेशानी उन मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों को उठानी पड़ रही है जिन्हें रोजाना अपने काम के सिलसिले में बसों से एक शहर से दूसरे शहर आना-जाना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बस किराए के बढ़ने से ऑटो, कैब और अन्य साधनों के किराए पर भी मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ सकता है। आने वाले दिनों में यदि महंगाई पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आम आदमी की मुश्किलें और अधिक बढ़ सकती हैं। फिलहाल यात्रियों को अपनी जेब ढीली करके ही सफर करने को मजबूर होना पड़ रहा है।