CRPF सब-इंस्पेक्टर ने सर्विस राइफल से खुद को मारी गोली

CRPF सब-इंस्पेक्टर ने सर्विस राइफल से खुद को मारी गोली

छत्तीसगढ़ का बीजापुर जिला देश के सबसे संवेदनशील और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शुमार किया जाता है, जहां तैनात सुरक्षा बल के जवान हर पल अपनी जान जोखिम में डालकर देश और कानून की रक्षा के लिए मोर्चा संभाले रहते हैं। इन वीरान जंगलों और कठिन परिस्थितियों के बीच ड्यूटी करने वाले जवानों को शारीरिक चुनौतियों के साथ-साथ भारी मानसिक दबाव का भी सामना करना पड़ता है। इसी बीच बीजापुर जिले से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरे सुरक्षा महकमे में शोक की लहर दौड़ा दी है। सीआरपीएफ (Central Reserve Police Force - CRPF) के एक जिम्मेदार पद पर तैनात सब-इंस्पेक्टर ने कैंप के भीतर ही अपनी सर्विस ऑटोमैटिक राइफल से खुद को गोली मारकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। शुरुआती पुलिस जांच और साथियों के बयनों से यह बात सामने आई है कि मृतक अधिकारी पिछले कुछ समय से गंभीर पारिवारिक कलह और अत्यधिक मानसिक तनाव के दौर से गुजर रहे थे, जिसके चलते यह खौफनाक कदम उठाया गया।

कैंप के भीतर अचानक चली गोली से फैली सनसनी

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यह घटना बीजापुर जिले के अंदरूनी इलाके में स्थित सीआरपीएफ की एक बटालियन कैंप के भीतर घटी। रोज की तरह सभी जवान और अधिकारी अपनी ड्यूटियों में व्यस्त थे, तभी अचानक कैंप के भीतर से एक भारी हथियार की गोली चलने की तेज आवाज गूंजी। इस अचानक हुई फायरिंग की आवाज से पूरे कैंप में हड़कंप मच गया। तुरंत अन्य साथी जवान और अधिकारी दौड़ते हुए उस बैरक या कमरे की तरफ पहुंचे जहां से आवाज आई थी। वहां का नजारा देखकर हर किसी के पैरों तले जमीन खिसक गई, क्योंकि सब-इंस्पेक्टर खून से लथपथ जमीन पर गिरे हुए थे और उनकी सर्विस राइफल उनके पास ही पड़ी थी। हालांकि उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन गंभीर चोट और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो चुकी थी।

शराब की लत और घरेलू तनाव बना इस खौफनाक कदम की मुख्य वजह

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और फॉरेंसिक टीम को बुलाकर साक्ष्य जुटाने का काम शुरू किया गया। शुरुआती छानबीन और परिजनों व सहकर्मियों से हुई पूछताछ में जो बातें सामने आई हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मृतक सब-इंस्पेक्टर पिछले कुछ हफ्तों से తీవ్ర मानसिक अवसाद (Severe Depression) से जूझ रहे थे। उनके परिवार में लंबे समय से घरेलू कलह चल रही थी, और इस बढ़ते तनाव के कारण वे अत्यधिक मानसिक दबाव में आ चुके थे। तनाव को कम करने या उससे भागने की कोशिश में वे कथित तौर पर शराब की लत के भी शिकार हो गए थे, जिसके कारण उनका पारिवारिक और मानसिक संतुलन पूरी तरह से बिगड़ता चला गया। ड्यूटी की कठिन परिस्थितियों और व्यक्तिगत जीवन की समस्याओं के बीच उपजे इस दोहरे दबाव ने उन्हें इतना कमजोर कर दिया कि उन्होंने मौत को गले लगाना बेहतर समझा।

सुरक्षा बलों के बीच बढ़ता मानसिक तनाव और डिप्रेशन एक गंभीर चुनौती

बबीजापुर की यह घटना कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि देश भर के अर्धसैनिक बलों और पुलिस महकमों में पिछले कुछ वर्षों में आत्महत्या और आंतरिक कलह के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। नक्सलियों और आतंकवादियों से लोहा लेने वाले ये जवान दुश्मन की गोली का तो डटकर मुकाबला करते हैं, लेकिन जब उनके अपने जीवन में पारिवारिक विवाद या मानसिक बीमारियां घर कर जाती हैं, तो कई बार वे अंदर से पूरी तरह टूट जाते हैं। मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) की अनदेखी और अपनी परेशानियों को अपनों के साथ खुलकर शेयर न कर पाने की मजबूरी इन जवानों पर भारी पड़ रही है। इस प्रकार की घटनाओं के बाद अब सुरक्षा एजेंसियों के भीतर भी यह गंभीर चर्चा शुरू हो गई है कि जवानों के लिए समय-समय पर काउंसलिंग सत्र, तनाव मुक्ति शिविर और मनोवैज्ञानिक सहायता केंद्र अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किए जाने चाहिए।

पुलिस जांच जारी, महकमे में छाया गहरा मातम

घटना के बाद बीजापुर पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है तथा मृतक के परिजनों को इसकी आधिकारिक सूचना दे दी गई है। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है और उन्हें यकीन नहीं हो रहा कि उनका हंसता-खेलता बेटा या पति इस तरह की चरम सीमा पर पहुंच जाएगा। सीआरपीएफ बटालियन के अधिकारियों ने इस दुखद हादसे पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा है कि इस मामले की हर पहलू से निष्पक्ष जांच की जा रही है। सुरक्षा बलों के कैंपों में इस तरह के हादसों का होना पूरे विभाग के लिए एक बड़ी क्षति है। जरूरत इस बात की है कि कठिन इलाकों में तैनात जवानों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाए ताकि कोई भी जवान अकेलेपन या तनाव के कारण ऐसा खौफनाक कदम उठाने पर मजबूर न हो।