भारत में रावण के नाम पर बसे हैं दर्जनों गांव, चौंकाने वाले हैं आंकड़े
विजयादशमी के पावन अवसर पर जहां एक तरफ पूरे देश में रावण के पुतले दहन करने की परंपरा निभाई जाती है, वहीं दूसरी तरफ हमारे देश में कुछ ऐसे भी स्थान और गांव मौजूद हैं जिनके नाम सुनकर हर कोई हैरान रह जाता है। हाल ही में जनगणना और भौगोलिक आंकड़ों (vlist.in) के आधार पर सामने आए तथ्यों के अनुसार, पूरे भारत में 'रावण' नाम या उससे मिलते-जुलते नामों वाले कुल 34 गांव और बस्तियां दर्ज हैं। आमतौर पर लोग यही सोचते हैं कि रावण का नाम सुनते ही बुराई का अहसास होता है, लेकिन हमारे देश के कई राज्यों में ऐसे गांव हैं जिनके नाम के साथ गर्व से 'रावण' जुड़ा हुआ है। इन गांवों के नाम और वहां की स्थानीय मान्यताएं इस बात का प्रमाण हैं कि भारत की विविधता कितनी अनूठी और दिलचस्प है।
राजस्थान में सबसे ज्यादा, छत्तीसगढ़ और यूपी भी हैं सूची में आगे
आंकड़ों के मुताबिक, रावण नाम से जुड़े सबसे ज्यादा गांव और स्थान पश्चिमी राज्य राजस्थान में स्थित हैं। राजस्थान में ऐसे लगभग 10 गांव या क्षेत्र दर्ज हैं, जिनमें रावण गुरारी, केरियां रावण, इसरवास (रावण), बरबरी रावण, बगरू रावण, महेशपुरा रावण, खेरली रावण और देओली रावण जैसे अजीबोगरीब और रोचक नाम शामिल हैं। इस मामले में छत्तीसगढ़ राज्य दूसरे नंबर पर आता है, जहां रावण नाम से जुड़े 7 गांव या स्थान आधिकारिक तौर पर सूचीबद्ध हैं। इसके बाद उत्तर प्रदेश का स्थान आता है, जहां खीरी और ग्रेटर नोएडा के बिसरख जैसे इलाकों समेत कुल 6 ऐसे स्थान दर्ज हैं जिनका संबंध किसी न किसी रूप में लंकापति रावण के इतिहास या कथाओं से जोड़ा जाता है।
छत्तीसगढ़ का अनोखा अंदाज: जहां नहीं जलता रावण, बल्कि होती है पूजा
छत्तीसगढ़ राज्य में रावण के प्रति लोगों की एक अलग ही सामाजिक और सांस्कृतिक मान्यता देखने को मिलती है। छत्तीसगढ़ के कई गांवों और बस्तियों के बाहरी हिस्से में रावण की पक्की पत्थर या सीमेंट की मूर्तियां बनी हुई हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में 'रावण भाठा' कहा जाता है। दिलचस्प बात यह है कि यहां कई जगहों पर रावण के पुतले को जलाने के बजाय उसकी प्रतिमा के सामने नारियल फोड़ने और उसकी विद्वत्ता की पूजा करने की परंपरा है। जानकारों का मानना है कि दंडकारण्य का क्षेत्र होने के कारण इस इलाके में प्राचीनकाल से ही आदिवासी संस्कृति और रावण के ऐतिहासिक जुड़ाव को अलग नजरिए से देखा जाता है, जहाँ कई लोग उन्हें एक प्रकांड पंडित और शिव भक्त के रूप में सम्मान देते हैं।
उत्तर प्रदेश के बिसरख गांव का रहस्य और रावण का ननिहाल
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के पास स्थित बिसरख गांव को लंकापति रावण का जन्मस्थान यानी पैतृक गांव माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रावण के पिता विश्रवा ऋषि ने इसी भूमि पर तपस्या की थी और यहीं रावण का बचपन बीता था। यही वजह है कि बिसरख गांव के लोग विजयादशमी के पावन पर्व पर उत्सव मनाने या पुतला दहन करने के बजाय शोक व्यक्त करते हैं और भगवान शिव की आराधना करते हैं। इस गांव के लोगों की गहरी मान्यता है कि उनके क्षेत्र के प्रकांड विद्वान पूर्वज का अपमान करना या उनका पुतला जलाना शुभ नहीं होता है, इसलिए यहां दशकों से रावण दहन की परंपरा नहीं निभाई जाती है।
देश के अन्य राज्यों में भी बिखरे हैं रावण नाम से जुड़े ठिकाने
केवल राजस्थान, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि भारत के कई अन्य राज्यों के दूरदराज इलाकों में भी इस तरह के नाम वाले गांव मौजूद हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पंजाब में रावण नाम से जुड़े 3 स्थान दर्ज हैं, जबकि बिहार, मध्य प्रदेश (जैसे विदिशा का रावण गांव) और हरियाणा में दो-दो ऐसे स्थान सूची में शामिल हैं। इसके अलावा पहाड़ी राज्यों जैसे जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में भी रावण नाम से जुड़ा एक-एक स्थान प्रशासनिक दस्तावेजों में दर्ज पाया गया है। यह तमाम आंकड़े इस बात को साबित करते हैं कि भारतीय उपमहाद्वीप की लोककथाओं, भूगोल और संस्कृति में पौराणिक पात्रों के नाम किस तरह रचे-बसे हैं।
विविधता में एकता और हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत
भारत जैसे विशाल देश में गांवों के नाम, भाषा, खानपान और परंपराओं में गजब की विविधता देखने को मिलती है। रावण के नाम पर बसे इन 34 गांवों का वजूद इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि हमारी भौगोलिक और ऐतिहासिक पहचान कितनी गहरी और विस्तृत है। चाहे कहीं पर रावण को बुराई का प्रतीक मानकर पुतला फूंका जाता हो या फिर कहीं उन्हें एक ज्ञानी ऋषि के रूप में याद किया जाता हो, यह सभी प्रथाएं हमारी उस साझा संस्कृति का हिस्सा हैं जो सदियों से चली आ रही हैं। इन अनोखे गांवों की कहानी देश-विदेश के लोगों के लिए हमेशा से एक बड़ा आकर्षण और शोध का विषय बनी रही है।