'खतरनाक है... इन्हें दंडित किया जाए', साड़ी पहनकर एसपी अंकिता शर्मा ने चलाईं गोलियां
देश की ब्यूरोक्रेसी और सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा वीडियो जबरदस्त तरीके से वायरल हो रहा है जिसने प्रशासनिक गलियारों से लेकर रक्षा विशेषज्ञों तक के होश उड़ा दिए हैं। छत्तीसगढ़ कैडर की चर्चित और तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी अंकिता शर्मा का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वह पारंपरिक साड़ी पहनी हुई हैं और उनके हाथों में एक घातक असॉल्ट राइफल यानी एके-47 नजर आ रही है। इस दौरान वह सरेआम हवा में ताबड़तोड़ गोलियां दागती हुई दिखाई दे रही हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद जहां आम जनता के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं, वहीं देश के एक जाने-माने पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल ने इस घटना पर बेहद कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने इस कृत्य को न सिर्फ नियमों के खिलाफ बताया है बल्कि यह तक कह दिया है कि यह बहुत खतरनाक प्रवृत्ति है और इसके लिए संबंधित अधिकारी को सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए। आइए जानते हैं कि इस पूरे मामले में रक्षा विशेषज्ञों और पूर्व सैन्य अधिकारियों का क्या कहना है और इस पर किस तरह की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
साड़ी पहनकर एके-47 से फायरिंग का वीडियो हुआ वायरल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जंगल की आग की तरह फैले इस वीडियो ने देश भर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि आईपीएस अंकिता शर्मा एक निजी या उत्सव जैसे माहौल में पारंपरिक परिधान साड़ी में मौजूद हैं, लेकिन उनके हाथ में कोई आम घरेलू चीज नहीं बल्कि सुरक्षा बलों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली انتہائی खतरनाक हथियार एके-47 राइफल है। वह पूरी बेफिक्र अंदाज में उस हथियार से गोलियां चलाती नजर आ रही हैं। जैसे ही यह क्लिप इंटरनेट पर आई, इसने तुरंत तूल पकड़ लिया। एक तरफ जहां कुछ लोग इसे उनके दबंग अंदाज के रूप में देख रहे थे, वहीं कानून के जानकारों, पूर्व सैनिकों और प्रशासनिक विशेषज्ञों ने इसे वर्दी की गरिमा और आचार संहिता का खुला उल्लंघन करार दिया। हथियारों का इस तरह का प्रदर्शन किसी भी जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी को शोभा नहीं देता, और यही वजह है कि यह मामला अब देश भर में बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है।
पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल ने उठाए गंभीर सवाल, कहा यह खतरनाक है
इस पूरे प्रकरण पर सबसे तीखी और जिम्मेदार प्रतिक्रिया देश के पूर्व सैन्य अधिकारियों की ओर से आई है। सेना के एक प्रतिष्ठित पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल ने इस वीडियो पर कड़ी आपत्ति जताते हुए अपने सोशल मीडिया हैंडल और साक्षात्कारों में साफ तौर पर कहा कि एक आईपीएस अधिकारी द्वारा इस प्रकार हथियारों का सार्वजनिक और गैर-पेशेवर प्रदर्शन करना अत्यंत खतरनाक है। उन्होंने कहा कि सेना और पुलिस बल के पास जो हथियार होते हैं, वे देश की रक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए होते हैं, न कि शादियों, पार्टियों या निजी उत्सवों में जश्न मनाने के खिलौने। पूर्व जनरल ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि देश के कानून के रखवाले ही इस तरह खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाएंगे और हथियारों का दुरुपयोग करेंगे, तो आम जनता को क्या संदेश जाएगा। उन्होंने मांग की है कि इस मामले में विभाग को सख्त से सख्त संज्ञान लेते हुए तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई दूसरा अधिकारी इस तरह की हरकत करने की हिम्मत न जुटा सके।
पुलिस सर्विस कंडक्ट रूल्स और आर्म्स एक्ट पर छिड़ी नई बहस
इस घटना ने एक बार फिर देश में पुलिस सेवा आचरण नियमों (Police Service Conduct Rules) और शस्त्र अधिनियम (Arms Act) की सीमाओं पर एक गंभीर राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है। सेवा नियमों के अनुसार, किसी भी पुलिस अधिकारी को केवल आधिकारिक ड्यूटी, आत्मरक्षा या फायरिंग रेंज के निर्धारित अभ्यास के दौरान ही हथियारों के इस्तेमाल की अनुमति होती है। किसी भी सार्वजनिक स्थल या व्यक्तिगत समारोह में इस तरह से हथियार लहराना और हवाई फायर करना कानूनन एक दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। यदि ऐसा कोई कृत्य आम नागरिक द्वारा किया जाए, तो पुलिस तुरंत आर्म्स एक्ट के तहत गंभीर मुकदमे दर्ज करके जेल भेज देती है। ऐसे में एक आईपीएस अधिकारी, जो खुद कानून लागू करवाने की जिम्मेदारी संभालती है, यदि वह खुद इन नियमों का उल्लंघन करे तो यह प्रशासनिक व्यवस्था के लिए एक बड़ा नैतिक संकट पैदा करता है। जानकारों का कहना है कि इस वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस महकमे की साख को जो धक्का लगा है, उसकी भरपाई के लिए सरकार को पारदर्शी और कड़ी कार्रवाई करनी ही होगी।
अंकिता शर्मा की अब तक की छवि और इस विवाद से उपरा झटका
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ कैडर की 2018 बैच की आईपीएस अधिकारी अंकिता शर्मा अपनी शुरुआती पोस्टिंग और बस्तर जैसे बेहद नक्सल प्रभावित इलाकों में बहाوري से किए गए कार्यों के कारण हमेशा से चर्चा में रही हैं। उन्हें राज्य की पहली महिला आईपीएस अधिकारी होने का गौरव भी प्राप्त है और उन्होंने कई चुनौतीपूर्ण अभियानों में अपनी नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया है। युवा पीढ़ी, विशेषकर सिविल सेवा की तैयारी करने वाली लड़कियों के बीच उन्हें एक रोल मॉडल के रूप में देखा जाता था। यही कारण है कि उनके इस गैर-जिम्मेदाराना आचरण और वीडियो के सामने आने से उनके लाखों चाहने वाले और प्रशंसक भी खासे आहत और निराश हैं। लोगों का मानना है कि एक अधिकारी जब ऊंचे पदों पर पहुंच जाता है, तो उसके कंधों पर समाज के प्रति जिम्मेदारी और भी अधिक बढ़ जाती है, और इस तरह की बचकानी हरकतें उसकी पूरी मेहनत और प्रतिष्ठा पर पानी फेर सकती हैं। अब देखना यह होगा कि पूर्व सैन्य अधिकारियों के कड़े विरोध और जनता के भारी आक्रोश के बाद सरकार और पुलिस मुख्यालय इस मामले में क्या अंतिम और निर्णायक कदम उठाते हैं।