छत्तीसगढ़ में बना नया वर्ल्ड रिकॉर्ड: 1.5 करोड़ दीयों की अलौकिक रोशनी से जगमगाया राज्य

छत्तीसगढ़ में बना नया वर्ल्ड रिकॉर्ड: 1.5 करोड़ दीयों की अलौकिक रोशनी से जगमगाया राज्य

छत्तीसगढ़ की पावन धरा ने शुक्रवार की शाम एक ऐसा स्वर्णिम अध्याय रचा, जिसे आने वाले दशकों तक जनभागीदारी और आस्था के अद्वितीय प्रतीक के रूप में याद रखा जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक सेवा एवं सक्रिय राजनीतिक जीवन के सफल 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में पूरे प्रदेश में ‘आशीर्वाद का दीया’ महाअभियान का भव्य आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व और राज्य सरकार के आह्वान पर आयोजित इस महादीपोत्सव ने भव्यता के तमाम पुराने कीर्तिमान ध्वस्त कर दिए। प्रदेश के गांवों, कस्बों, चौपालों, नदी घाटों, मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर एक साथ 1.50 करोड़ से अधिक मिट्टी के पारंपरिक दीप प्रज्वलित किए गए। इस अकल्पनीय और विहंगम दृश्य के साक्षी बने लाखों नागरिकों के उत्साह ने इस आयोजन को सीधे ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में दर्ज करा दिया, जिससे पूरे राज्य में उत्सव और गौरव का वातावरण छा गया।

राजधानी रायपुर में 25 लाख दीपों का महाकुंभ: सुनहरी आभा में नहाया पूरा शहर

इस ऐतिहासिक महाअभियान का मुख्य और केंद्रीय समारोह राजधानी रायपुर में आयोजित किया गया, जहां जनसैलाब की उपस्थिति में अकेले 25 लाख से अधिक दीये जलाए गए। शाम ढलते ही रायपुर के प्रमुख सार्वजनिक मैदान, सरोवर, प्रमुख चौराहे और ऐतिहासिक स्थल सुनहरी रोशनी से जगमगा उठे। हजारों स्वयंसेवकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्र-छात्राओं, मातृशक्ति और सामान्य नागरिकों ने कतारबद्ध होकर इन दीपों में तेल और बाती सजाई और एक साथ उन्हें प्रज्वलित किया। 25 लाख दीपों की लौ जब एक साथ प्रज्वलित हुई, तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो आकाश के तारे सीधे जमीन पर उतर आए हों। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की आधिकारिक निर्णायक टीम ने रायपुर में मौजूद रहकर तकनीकी मानकों, ड्रोन कैमरों और जमीनी गणना के आधार पर इस पूरे आयोजन का सत्यापन किया और इसे आधिकारिक तौर पर विश्व रिकॉर्ड घोषित करते हुए प्रशस्ति पत्र जारी किया।

सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के 25 वर्ष: जनभागीदारी का अद्भुत महायज्ञ

राज्य के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने इस अभूतपूर्व उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए इसे जन-जन के अटूट विश्वास का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 25 वर्षों का सार्वजनिक जीवन केवल एक राजनीतिक कालखंड नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण, अंत्योदय, सुशासन और निस्वार्थ लोकसेवा का एक जीवंत दर्शन है। उन्होंने कहा कि रायपुर में 25 लाख दीप और पूरे छत्तीसगढ़ में 1.5 करोड़ से अधिक दीयों का जलना यह स्पष्ट संदेश देता है कि राज्य की जनता प्रधानमंत्री के विकास मॉडल और गरीब कल्याण नीतियों के साथ पूरी आत्मीयता से खड़ी है। यह महाआयोजन केवल एक प्रतीकात्मक दीप प्रज्वलन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने विकसित भारत के विजन के साथ ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के सामूहिक संकल्प को एक नई सामाजिक ऊर्जा प्रदान की है।

बस्तर से सरगुजा तक हर घर में जला आशीर्वाद का दीया: सामाजिक समरसता की मिसाल

‘आशीर्वाद का दीया’ अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसका विकेंद्रीकृत और जन-जन से जुड़ा स्वरूप रहा। राजधानी रायपुर के मुख्य मंच से लेकर सुदूर बस्तर के वनांचल क्षेत्रों और उत्तर में सरगुजा की पहाड़ियों तक, हर जिले में लोगों ने अपने-अपने स्तर पर दीपोत्सव मनाया। बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई, राजनांदगांव, रायगढ़, कोरबा और जगदलपुर जैसे प्रमुख शहरों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, व्यापारिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। ग्रामीण अंचलों में महिलाओं ने घरों की देहरी, तुलसी चौरे और खेतों की मेड़ों पर मिट्टी के दीये जलाकर प्रधानमंत्री के दीर्घायु जीवन और राष्ट्र के कल्याण की कामना की। इस अभियान ने राज्य के सभी वर्गों, जातियों और समुदायों को एक सूत्र में पिरोकर सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।

स्थानीय कुम्हारों को मिला बड़ा आर्थिक संबल: आत्मनिर्भर भारत की जमीन पर उतरी सोच

इस महाआयोजन का एक अत्यंत संवेदनशील और आर्थिक पहलू स्थानीय मिट्टी शिल्पियों और कुम्हारों की आजीविका से जुड़ा रहा। 1.50 करोड़ से अधिक मिट्टी के दीयों के निर्माण के लिए राज्य भर के स्थानीय कुम्हार परिवारों को बड़े पैमाने पर अग्रिम आर्डर दिए गए थे। इससे पारंपरिक हस्तशिल्प और माटी कला बोर्ड से जुड़े हजारों ग्रामीण परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ और स्वरोजगार मिला। इसके साथ ही लाखों लीटर तिल और सरसों के तेल तथा कपास की बत्तियों की मांग ने स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संजीवनी प्रदान की। पर्यावरण संरक्षण के सख्त मानकों का पालन करते हुए इस पूरे आयोजन में पूरी तरह से मिट्टी के प्राकृतिक दीयों का उपयोग किया गया, जिससे प्लास्टिक या रासायनिक प्रदूषण को पूरी तरह दूर रखा गया और पर्यावरण अनुकूल आयोजन की नई मिसाल कायम की गई।

गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज: छत्तीसगढ़ के इतिहास का स्वर्णिम दिन

गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के प्रतिनिधियों ने जब आधिकारिक रूप से इस ऐतिहासिक उपलब्धि की घोषणा की, तो पूरा आयोजन स्थल ‘भारत माता की जय’ और ‘छत्तीसगढ़ महतारी की जय’ के गगनभेदी नारों से गूंज उठा। संस्था के अधिकारियों ने कहा कि इतनी विशाल संख्या में दीयों का सुव्यवस्थित, सुरक्षित और समन्वित तरीके से प्रज्वलन पूरे विश्व में एक दुर्लभ घटना है। रिकॉर्ड के दस्तावेजों में दर्ज हुआ कि छत्तीसगढ़ की कुल जनसंख्या के एक बड़े हिस्से ने एक ही समय पर एक साथ मिलकर इस जनआंदोलन को साकार किया। यह प्रमाण पत्र केवल सरकार की प्रशासनिक क्षमता का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जनता के संगठित संकल्प और सेवा भाव का ऐतिहासिक दस्तावेज बन गया है।