महादेव ऐप केस में मास्टरमाइंड पर भूपेश बघेल का बड़ा बयान
छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचाने वाले बहुचर्चित महादेव सट्टा ऐप सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बयानों का दौर एक बार फिर से बेहद तेज हो गया है। इस पूरे घोटाले का असली आका और मास्टरमाइंड कौन है—क्या वह दुबई में बैठा सौरभ चंद्राकर है या फिर खुद को ऐप का मुख्य संचालक बताने वाला शुभम सोनी? यह सवाल आज भी जांच एजेंसियों और आम जनता के बीच पहेली बना हुआ है। हाल ही में इस पूरे मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने जांच एजेंसियों के दावों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि पूरे मामले में राजनीतिक विद्वेष के तहत नाम घसीटे जाने की साजिश रची जा रही है, लेकिन उन्हें देश की न्यायपालिका और अदालत पर पूरा भरोसा है। पूर्व मुख्यमंत्री के इस तीखे बयान के बाद राज्य में ईडी (ED) की कार्रवाई और महादेव ऐप घोटाले की जांच को लेकर सियासी पारा एक बार फिर से चढ़ गया है।
#1. कौन है असली मास्टरमाइंड? शुभम सोनी और सौरभ चंद्राकर के बयानों में उलझी ईडी की जांच
महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप घोटाले में जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मुख्य आरोपी के तौर पर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल को नामजद किया था, जो भिलाई से निकलकर दुबई में अपनी विशाल सल्तनत चला रहे थे। लेकिन इस मामले में नया और बड़ा मोड़ तब आया जब शुभम सोनी नाम के शख्स ने दुबई से एक कथित वीडियो जारी कर खुद को महादेव ऐप का असली मालिक और सर्वेसर्वा बताया। शुभम सोनी ने दावा किया था कि उसने ऐप को निर्बाध चलाने के लिए बड़े-बड़े नेताओं और प्रशासनिक अफसरों को करोड़ों रुपये की प्रोटेक्शन मनी दी। इसके बाद से ही यह भ्रम पैदा हो गया कि इस पूरे आपराधिक सिंडिकेट की डोर वास्तव में किसके हाथ में थी—सौरभ चंद्राकर या शुभम सोनी? जांच एजेंसियां दोनों के दावों की फॉरेंसिक और वित्तीय जांच कर रही हैं, लेकिन बयानों के इस विरोधाभास ने पूरे केस को काफी उलझा दिया है।
#1. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का बड़ा हमला: 'मुझे कोर्ट पर पूरा भरोसा है, सच आएगा सामने'
महादेव ऐप सट्टा मामले में खुद का नाम घसीटे जाने और जांच एजेंसियों के आरोपों पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कड़ा रुख अपनाया है। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोधियों द्वारा उनकी छवि खराब करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। बघेल ने कहा कि "शुभम सोनी और सौरभ चंद्राकर को मोहरा बनाकर जिस तरह से झूठी कहानियां गढ़ी जा रही हैं, वह सब जनता देख रही है। मुझे देश के संविधान, कानून और न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।" उन्होंने आगे कहा कि जब यह मामला अदालत के समक्ष निष्पक्ष रूप से पहुंचेगा, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा और इस पूरे राजनीतिक षड्यंत्र का पर्दाफाश होगा।
#1. क्या है अरबों रुपये का महादेव ऐप सट्टा घोटाला? जानिए पूरा मामला
महादेव ऐप घोटाला केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश में अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी का एक बहुत बड़ा नेटवर्क बनकर उभरा था। आरोप हैं कि इस ऐप के जरिए देश भर के हजारों युवाओं को सट्टे के जाल में फंसाया गया और इससे अर्जित अरबों रुपये की अवैध राशि को शेल कंपनियों, हवाला और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए विदेशों में भेजा गया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने इस मामले में अब तक कई दलालों, पुलिस अधिकारियों, कारोबारियों और सट्टेबाजों को गिरफ्तार कर करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्तियां जब्त की हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस सट्टा नेटवर्क को संरक्षण देने के एवज में हर महीने बड़ी मात्रा में घूस दी जाती थी।
#1. कानूनी दांव-पेच और आगामी सुनवाई: क्या सामने आएगा पूरा सच?
वर्तमान में महादेव ऐप के दोनों मुख्य सरगनाओं सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी हो चुका है और उन्हें भारत लाने के लिए प्रत्यर्पण (Extradition) की कानूनी प्रक्रिया जारी है। दूसरी ओर, शुभम सोनी के वीडियो बयानों की सत्यता की जांच भी डिजिटल फॉरेंसिक लैब में की जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे कोर्ट में चार्जशीट के आधार पर सुनवाई आगे बढ़ेगी, मास्टरमाइंड का चेहरा पूरी तरह से साफ हो जाएगा। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के 'अदालत पर भरोसा' वाले बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर अब कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर आक्रामक रुख अपनाकर लड़ाई लड़ने के मूड में है।