बच्चों की एक रोती हुई पुकार ने बचा ली मां की जिंदगी: रेलवे ट्रैक पर अचानक फिसला पैर

बच्चों की एक रोती हुई पुकार ने बचा ली मां की जिंदगी: रेलवे ट्रैक पर अचानक फिसला पैर

भारतीय रेलवे स्टेशनों और पटरियों के इर्द-गिर्द अक्सर ऐसी दिल दहला देने वाली और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटनाएं सामने आ जाती हैं जिन्हें देखकर किसी की भी सांसें कुछ पलों के लिए थम जाएं। उत्तर प्रदेश के एक व्यस्त रेलवे स्टेशन से इस वक्त एक ऐसी ही अत्यंत साहसिक, दिल को झकझोर देने वाली और चमत्कारिक खबर सामने आई है जिसने पूरे देश के लोगों को हैरान कर दिया है। पटरियों के बीच फंसे होने और मौत को अपनी आंखों के सामने बिल्कुल करीब देखने के बाद एक मां की जान जिस तरह से बाल-बाल बची है, उसकी कहानी सुनकर हर किसी की आंखें नम हो रही हैं। छोटे-छोटे मासूम बच्चों की एक दर्दभरी और बेबस पुकार जब स्टेशन मास्टर के कानों तक पहुंची, तो उन्होंने बिना एक भी पल गंवाए अपनी जान की परवाह किए बिना मौत के मुंह में छलांग लगा दी और मां की जिंदगी बचा ली। जिस जगह यह घटना घटी, वहां से ट्रेन इतनी तेजी से गुजरी कि यदि स्टेशन मास्टर ने एक सेकंड की भी देरी कर दी होती, तो यह मामला इतिहास का एक और बड़ा हादसा बन जाता। आज के इस विस्तृत, मानवीय संवेदनाओं से ओत-प्रोत और रोमांचक आलेख में हम आपको इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना की पूरी अंदरूनी दास्तान विस्तार से बताने जा रहे हैं।

जब रेलवे ट्रैक पार करते वक्त अचानक भयानक हादसे का शिकार हो गई महिला

यह पूरी रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना उस समय घटी जब एक साधारण परिवार की महिला अपने दो छोटे-छोटे मासूम बच्चों के साथ रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म को पार कर रही थी। ट्रेन पकड़ने की जल्दी और अन्य यात्रियों की भीड़भाड़ के बीच जब वे पटरियों को पार कर रहे थे, तभी अचानक महिला का पैर लोहे की पटरियों और गिट्टियों के बीच बने खतरनाक गड्ढे में बुरी तरह से फंस गया। महिला ने खुद को निकालने के लिए पूरी ताकत से पैर खींचने की कोशिश की, लेकिन उसका पैर उस लोहे के शिकंजे में ऐसा जकड़ गया कि वह लाख कोशिशों के बाद भी हिल नहीं पाई। इसी बीच दूर ट्रैक पर किसी भारी मालगाड़ी या एक्सप्रेस ट्रेन के हॉर्न की डरावनी आवाज सुनाई देने लगी, और कुछ ही सेकंड के भीतर वह ट्रेन बहुत तेजी से उसी ट्रैक की तरफ बढ़ती हुई दिखाई देने लगी। महिला के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई और उसे अपनी और अपने बच्चों की मौत सामने साफ नजर आने लगी।

बच्चों की दिल चीर देने वाली चीख और मासूमों की पुकार ने हिलाया सबका दिल

पटरियों के बीच अपनी मां को इस तरह मौत के साए में फंसा हुआ देखकर उन छोटे-छोटे बच्चों के मुंह से जो चीख निकली, उसने वहां मौजूद हर एक शख्स के कलेजे को चीर कर रख दिया। बच्चे जोर-जोर से रोते हुए 'मेरी मां को बचा लो अंकल' की गुहार लगाने लगे और ट्रैक के पास खड़े यात्रियों की तरफ हाथ जोड़कर मदद मांगने लगे। बच्चों की वह बेबस और दर्दभरी पुकार सीधे रेलवे स्टेशन के कंट्रोल रूम और केबिन में बैठे उस जांबाज स्टेशन मास्टर के कानों तक जा पहुंची। स्टेशन मास्टर ने जब खिड़की से बाहर झांककर देखा और बच्चों की उस चीख के पीछे की भयावह सच्चाई को भांपा, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने बिना यह सोचे कि ट्रेन उनके बिल्कुल करीब आ चुकी है और उनकी खुद की जान भी खतरे में पड़ सकती है, अपनी कुर्सी छोड़ी और बिजली की रफ्तार से सीधे ट्रैक की ओर दौड़ पड़े।

स्टेशन मास्टर की गजब की फुर्ती: एक सेकंड की देरी और चली जाती मासूम मां की जान

घटनास्थल पर पहुंचने के बाद स्टेशन मास्टर ने जो अदम्य साहस और फुर्ती दिखाई, वह किसी फिल्मी सुपरहीरो से कम नहीं थी। सामने से धड़धड़ाती हुई ट्रेन अपने पूरे वेग के साथ सीटी बजाते हुए बस कुछ ही मीटर की दूरी पर आ चुकी थी, जिसकी तेज रोशनी और हवा का दबाव महसूस होने लगा था। स्टेशन मास्टर ने अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए ट्रैक में फंसे महिला के पैर को बाहर खींचने का अंतिम प्रयास किया और एक झटके में महिला को खींचकर प्लेटफॉर्म के सुरक्षित हिस्से पर गिरा लिया। उनके गिरते ही ठीक उसी एक सेकंड के भीतर वह भारी-भरकम ट्रेन पटरियों को चीरती हुई उस जगह से पूरी रफ्तार से गुजर गई। यदि स्टेशन मास्टर ने एक सेकंड या पल भर की भी देरी की होती, तो ट्रेन उन दोनों को अपनी चपेट में ले चुकी होती। इस चमत्कारिक बचाव को देखकर प्लेटफॉर्म पर मौजूद सभी यात्री सन्न रह गए और अपनी आंखों पर यकीन नहीं कर पा रहे थे।

भगवान बनकर आए स्टेशन मास्टर को सलाम, मासूमों के सिर पर बनी रही मां की ममता

जब ट्रेन पूरी तरह से गुजर जाने के बाद धूल और शोर शांत हुआ, तो वह मां सुरक्षित रूप से अपने दोनों बच्चों के गले लगकर फफक-फफक कर रो पड़ी। बच्चों की आंखों में जहां अपनी मां को सुरक्षित देखने की असीम खुशी थी, वहीं स्टेशन मास्टर के चेहरे पर उस इंसान की संतुष्टि थी जिसने आज अपनी सूझबूझ और बहादुरी से एक परिवार को बिखरने से बचा लिया था। आसपास के लोगों ने तुरंत आगे बढ़कर उस जांबाज स्टेशन मास्टर को कंधों पर उठा लिया और उनकी इस देवदूत जैसी बहादुरी के लिए उनकी जमकर सराहना की। रेलवे अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन ने भी इस अद्भुत और साहसिक कार्य के लिए स्टेशन मास्टर को विशेष रूप से सम्मानित करने की घोषणा की है। यह घटना हमें यह सिखाती है कि दुनिया में इंसानियत और फर्ज से बढ़कर कुछ नहीं है, और कई बार समय पर लिया गया एक छोटा सा फैसला किसी की पूरी दुनिया को उजड़ने से बचा लेता है।