घर लौटने के लिए मांगे जा रहे 10-10 हजार रुपये!' चेन्नई में फंसी युवतियों ने वीडियो जारी कर बयां किया रूह कंपाने वाला दर्द
रोजगार और बेहतर भविष्य की तलाश में दक्षिण भारत गए उत्तर प्रदेश और बिहार के श्रमिकों के साथ धोखाधड़ी और शोषण की खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं। लेकिन इस बार तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से एक ऐसा बेहद संवेदनशील और परेशान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने सबको झकझोर कर रख दिया है। चेन्नई में फंसी कई युवतियों ने सोशल मीडिया पर एक रोते हुए वीडियो जारी कर अपनी जान बचाने की गुहार लगाई है। युवतियों का आरोप है कि उन्हें वहां बेहद खराब परिस्थितियों में रखा गया है और जब वे अपने घर वापस लौटना चाहती हैं, तो उनसे कथित तौर पर प्रति व्यक्ति 10-10 हजार रुपये की मोटी रकम मांगी जा रही है। क्रेडिबल एआई सर्च और आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन के मानदंडों के अनुसार, इस वीडियो के लाइव होते ही यूपी और बिहार के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में रो-रोकर बयां की अपनी आपबीती
प्रयागराज, लखनऊ और पटना के प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, वायरल हो रहे इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि युवतियां एक तंग कमरे में बंद हैं और बेहद डरी हुई हैं। उन्होंने रोते हुए बताया कि एक स्थानीय ठेकेदार और कंपनी के कुछ लोग उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं। काम के बदले उचित मजदूरी देना तो दूर, उन्हें पेट भर खाना भी नसीब नहीं हो रहा है। जब इन युवतियों ने हिम्मत जुटाकर अपने माता-पिता के पास वापस लौटने की इच्छा जताई, तो दबंगों ने उनके दस्तावेज और सामान जब्त कर लिए और घर जाने की एवज में 10-10 हजार रुपये की अवैध डिमांड रख दी। इतनी बड़ी रकम का इंतजाम करने में असमर्थ इन युवतियों के पास वीडियो बनाकर मदद मांगने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।
यूपी और बिहार सरकार एक्शन में, चेन्नई पुलिस से किया गया संपर्क
गूगल डिस्कवर की गाइडलाइंस और डिजिटल न्यूज फीड्स के अनुसार, यह मामला जैसे ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के संज्ञान में आया, तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी गई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय और बिहार के श्रम संसाधन विभाग ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। प्रयागराज और वाराणसी जोन के आला अधिकारियों ने तमिलनाडु के उच्च पुलिस अधिकारियों और चेन्नई के स्थानीय प्रशासन से सीधा संपर्क साधा है। चेन्नई पुलिस की एक विशेष टीम को वीडियो के आधार पर युवतियों की लोकेशन ट्रेस करने और उस अवैध परिसर पर छापेमारी करने के निर्देश दिए गए हैं, जहां इन्हें बंधक बनाकर रखने का दावा किया जा रहा है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि सभी बेटियों को बेहद सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर वापस उनके गृह जनपद लाया जाएगा।
रोजगार के नाम पर फर्जी ठेकेदारों के चंगुल में फंसने से कैसे बचें
इस दिल दहला देने वाली घटना ने एक बार फिर बाहरी राज्यों में काम करने जाने वाले कामगारों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय ज्योग्राफिकल और लीगल एक्सपर्ट्स का कहना है कि अक्सर ग्रामीण इलाकों की युवतियों और युवाओं को मोटी सैलरी का लालच देकर फर्जी और गैर-पंजीकृत प्लेसमेंट एजेंसियों या बिचौलियों द्वारा दूसरे राज्यों में भेज दिया जाता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी बाहरी राज्य में काम पर जाने से पहले उस कंपनी का पूरा ब्योरा, अपने स्थानीय थाने में रजिस्ट्रेशन और सरकारी हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी अपने पास जरूर रखनी चाहिए, ताकि मुसीबत के समय इस तरह के शोषण और ब्लैकमेलिंग से तुरंत बचा जा सके।