Chhattisgarh : भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट का झटका ईडी मामले में हाईकोर्ट जाने का निर्देश
- by Archana
- 2025-08-05 15:43:00
Newsindia live,Digital Desk: सर्वोच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य को एक बड़ा झटका दिया है अदालत ने उनसे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय ईडी द्वारा दायर आरोप पत्र को चुनौती देने के लिए सीधे हाईकोर्ट जाने को कहा है यह फैसला उन्हें ईडी के आरोपों से लड़ने के लिए एक नई राह देता है
यह मामला ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप महादेव बुक से जुड़ा हुआ है जिसमें करोड़ों रुपये की अनियमितताएं और वित्तीय धोखाधड़ी के आरोप हैं इस मामले में ईडी ने आरोप पत्र दाखिल किया है जिसमें बघेल और उनके बेटे का नाम भी शामिल है यह आरोप हैं कि महादेव बुक अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी चलाती थी और इससे प्राप्त धन को राजनीति में लगाया गया था
जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह फैसला सुनाया सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री और उनके बेटे को अपने सभी कानूनी विकल्प समाप्त होने तक इंतजार करना चाहिए इससे पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मामले को उनके पक्ष में स्थगित करने से इनकार कर दिया था सुप्रीम कोर्ट ने उनसे सीधे तौर पर हाइकोर्ट में जाने को कहा क्योंकि उनका मामला प्रथम दृष्टया ट्रायल से बाहर का नहीं लगता
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह राजनीति से प्रेरित मामला है और इसका उद्देश्य आगामी चुनावों से पहले उन्हें बदनाम करना है उनका तर्क है कि केंद्रीय जांच एजेंसियाँ विपक्षी नेताओं को निशाना बना रही हैं हालाँकि भारतीय जनता पार्टी ने आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि एजेंसियाँ कानून के अनुसार अपना काम कर रही हैं
इस बीच ईडी ने आरोप पत्र में विस्तृत जानकारी दी है जिसमें कहा गया है कि सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म ने उपयोगकर्ताओं को अवैध रूप से सट्टेबाजी में शामिल होने के लिए लुभाया जिससे बड़ी रकम हासिल हुई यह पैसा कथित तौर पर नेताओं और सरकारी अधिकारियों को रिश्वत के रूप में दिया गया ताकि उनके अवैध संचालन को सुनिश्चित किया जा सके यह मामले एक बड़ी राजनीतिक और कानूनी बहस का हिस्सा बन गए हैं और आने वाले समय में इनके नतीजे सामने आने की उम्मीद है
भूपेश बघेल के वकील ने कहा कि वे हाइकोर्ट में नई याचिका दायर करेंगे और इस आरोप पत्र को चुनौती देने के लिए हर संभव कानूनी उपाय करेंगे यह घटना देश में केंद्रीय एजेंसियों और राज्य सरकारों के बीच के तनाव को भी उजागर करती है
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