Chhattisgarh Security Operation : लाल आतंक पर अब तक की सबसे बड़ी चोट, 2 साल में 503 नक्सली ढेर

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News India Live, Digital Desk : छत्तीसगढ़ के जिन जंगलों में कभी खौफ का राज हुआ करता था, अब वहां बदलाव की बयार बह रही है। माओवाद की 'लाल डायरी' अब अपने आखिरी पन्नों पर है। सुरक्षाबलों ने पिछले दो सालों में जिस तरह से मोर्चेबंदी की है, उसके आंकड़े सुनकर आप भी कहेंगे 'हां, अब बदलाव आ रहा है।'

आंकड़े गवाह हैं: 503 का 'द एंड'
बात सिर्फ़ दावे की नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत की है। आंकड़ों पर नज़र डालें तो पिछले दो साल नक्सलियों के लिए काल बनकर आए हैं। सुरक्षाबलों ने अपनी जान की परवाह किए बिना 'ऑपरेशन क्लीन' चलाया और नतीजे सामने हैं—503 नक्सली ढेर किए जा चुके हैं।

यह महज एक संख्या नहीं है, बल्कि यह बताता है कि कैसे जंगल में सुरक्षाबलों का दबदबा बढ़ा है। जो इलाके कल तक 'नो गो जोन' (जहां जाना मना हो) माने जाते थे, आज वहां जवानों के बूटों की धमक है।

अमित शाह की डेडलाइन: उल्टी गिनती शुरू
गृह मंत्री अमित शाह ने साफ कर दिया है कि नक्सलवाद के खिलाफ अब 'आर-पार' की लड़ाई होगी। सरकार ने इसके लिए एक डेडलाइन भी तय कर दी है—मार्च 2026। यानी, इरादा साफ़ है कि तय समय से पहले देश को इस नासूर से मुक्त करना है।

शायद यही वजह है कि जवान अब डिफेंसिव नहीं, बल्कि एग्रेसिव मोड में हैं। वो नक्सलियों के गढ़ में घुसकर उन्हें चुनौती दे रहे हैं। सरकार की नीति स्पष्ट है: हथियार डालो या फिर अंजाम भुगतने को तैयार रहो।

बदल रही है बस्तर की तस्वीर
इस सख्त कार्रवाई का असर भी दिखने लगा है। नक्सली बैकफुट पर हैं और उनके नेटवर्क की कमर टूट चुकी है। ग्रामीणों का भरोसा भी अब प्रशासन और पुलिस पर बढ़ रहा है। जहां गोलियों की आवाज़ गूंजती थी, उम्मीद है कि जल्द ही वहां विकास की बातें होंगी।

कुल मिलाकर, पिछले दो सालों ने यह साबित कर दिया है कि अगर राजनीतिक इच्छाशक्ति और जवानों का जज्बा मिल जाए, तो बड़े से बड़ा लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है।