Chhattisgarh Naxalism : बस्तर का सबसे खूंखार चेहरा, जिस पर था 1 करोड़ का इनाम, उस महिला नक्सली कमांडर ने क्यों डाल दिए हथियार?

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News India Live, Digital Desk: Chhattisgarh Naxalism : नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई में सुरक्षाबलों को एक ऐसी कामयाबी मिली है।, जिसे बस्तर के इतिहास की सबसे बड़ी जीतों में से एक माना जा रहा है। जिस महिला कमांडर के नाम से छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश की पुलिस की नींद उड़ी रहती थी, जिसने कई बड़ी नक्सली घटनाओं को अंजाम दिया था और जिस पर कुल मिलाकर 1 करोड़ रुपये से ज्यादा का इनाम घोषित था, उस दुर्दांत नक्सली कमांडर सुजाता ने तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है।

सुजाता का सरेंडर करना सिर्फ एक नक्सली का हथियार डालना नहीं है, बल्कि यह लाल आतंक के उस किले के ढहने का संकेत है, जिसे वह अपनी मौजूदगी से मजबूत बनाए रखती थी।

कौन है सुजाता? खौफ का दूसरा नाम

सुजाता कोई मामूली नक्सली नहीं थी। उसका असली नाम मड़कम सुजाता है और वह माओवादियों की सेंट्रल कमेटी की सदस्य थी। बस्तर में उसे 'पद्मा' के नाम से भी जाना जाता था। 35 साल से ज्यादा वक्त से नक्सल आंदोलन में सक्रिय सुजाता को संगठन का एक बड़ा रणनीतिकार माना जाता था। उस पर कई राज्यों ने मिलकर 1 करोड़ रुपये से अधिक का इनाम घोषित कर रखा था, जिसमें छत्तीसगढ़ ने भी 25 लाख रुपये का इनाम रखा था।

क्यों डाली बंदूक? बताई यह वजह

एक करोड़ की इनामी कमांडर का यूं हथियार डाल देना हर किसी को हैरान कर रहा है। तेलंगाना पुलिस के सामने सरेंडर करने के बाद सुजाता ने बताया कि वह संगठन की विचारधारा और कार्यप्रणाली से तंग आ चुकी थी। उसने कहा कि नक्सली आंदोलन अब अपने रास्ते से भटक गया है और आदिवासी समाज के कल्याण का दिखावा कर उन्हें सिर्फ गुमराह कर रहा है। इसके अलावा, वह लगातार खराब हो रहे अपने स्वास्थ्य से भी परेशान थी और एक सामान्य जीवन जीना चाहती थी। सुरक्षाबलों का लगातार बढ़ता दबाव भी उसके सरेंडर की एक बड़ी वजह बना।

ताड़मेटला हमले की थी मास्टरमाइंड

सुजाता का आपराधिक इतिहास खून से सना है। उस पर 100 से ज्यादा हत्याओं और अनगिनत नक्सली वारदातों में शामिल होने का आरोप है। लेकिन उसका नाम सबसे ज्यादा कुख्यात हुआ 2010 के ताड़मेटला हमले के बाद। यह छत्तीसगढ़ के इतिहास का सबसे भीषण नक्सली हमला था, जिसमें CRPF के 76 जवान शहीद हो गए थे। माना जाता है कि इस हमले की पूरी योजना और रणनीति सुजाता ने ही तैयार की थी।

सुजाता का मुख्यधारा में लौटना निश्चित रूप से बस्तर में शांति की बहाली के लिए एक बड़ा और सकारात्मक कदम है। उम्मीद की जा रही है कि उसके सरेंडर के बाद कई और बड़े नक्सली कमांडर भी हथियार डालने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।