Chhattisgarh Naxal : यह हत्या नहीं, खौफ का संदेश है ,कांकेर में दो युवकों की निर्मम हत्या के पीछे की कहानी
News India Live, Digital Desk : छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र से एक बार फिर दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहाँ शक और दहशत की आग में दो और युवा जिंदगियां जलकर खाक हो गईं। कांकेर जिले में नक्सलियों ने पुलिस मुखबिर (Police Informer) होने के सिर्फ संदेह में दो युवकों की बेरहमी से हत्या कर दी। इस घटना के बाद पूरे इलाके में खौफ और सन्नाटे का माहौल है।
यह क्रूर वारदात नक्सलवाद की उस बेरहम सच्चाई को फिर से उजागर करती है, जहाँ 'शक' ही मौत की सज़ा बन जाता है और 'जन अदालत' के नाम पर खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाई जाती हैं।
सिर्फ शक के आधार पर ले ली दो जानें
जानकारी के अनुसार, नक्सलियों ने इन दोनों युवकों को उनके गांव से या आसपास के इलाके से अगवा किया था। इसके बाद उन पर पुलिस के लिए मुखबिरी करने का आरोप लगाया गया। नक्सलियों ने बिना किसी सबूत के, सिर्फ अपने संदेह के आधार पर इन युवकों को मौत की सजा सुना दी। बताया जा रहा है कि उनकी हत्या करने के बाद, नक्सलियों ने शवों को फेंक दिया ताकि इलाके के अन्य लोगों में डर पैदा किया जा सके।
यह नक्सलियों की एक पुरानी और क्रूर रणनीति है। वे अक्सर ग्रामीणों में अपना खौफ बनाए रखने और उन्हें पुलिस से दूर रखने के लिए इस तरह की हत्याओं को अंजाम देते हैं। 'मुखबिर' का तमगा लगाकर किसी को भी मार देना उनके लिए सबसे आसान तरीका है ताकि कोई भी उनके खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत न कर सके।
गांव में दहशत, बोलने से डर रहे लोग
इस दोहरी हत्या के बाद से आसपास के गांवों में डर का माहौल है। कोई भी इस मामले पर खुलकर बोलने को तैयार नहीं है, क्योंकि उन्हें डर है कि अगला निशाना वे भी हो सकते हैं। इस तरह की घटनाएं ग्रामीणों को पुलिस और प्रशासन से और दूर कर देती हैं, जिससे नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई और भी मुश्किल हो जाती है।
जिन परिवारों ने अपने जवान बेटों को खोया है, उनका रो-रो कर बुरा हाल है। उन्हें की उम्मीद भी इस खौफ के साए में दम तोड़ती
पुलिस ने शुरू की जांच और सर्च ऑपरेशन
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और सुरक्षाबलों की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं। पुलिस ने शवों को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है और इलाके में एक बड़ा सर्च ऑपरेशन भी लॉन्च किया है, ताकि इस हत्याकांड को अंजाम देने वाले नक्सलियों को पकड़ा जा सके।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नक्सली अपनी जमीन खोते जा रहे हैं और इसी बौखलाहट में वे निर्दोष आदिवासियों और युवकों को अपना निशाना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर कब तक बस्तर के जंगलों में शक की बुनियाद पर बेगुनाहों का खून बहता रहेगा.