Chhattisgarh Crime : डोंगरगढ़ मेले के नाम पर मूक-बधिर महिला से दरिंदगी, कब रुकेगा ये सब?
News India Live, Digital Desk : छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले का डोंगरगढ़ अपनी 'माँ बम्लेश्वरी' की शक्तिपीठ के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहाँ लोग आस्था और शांति की तलाश में आते हैं। लेकिन आज डोंगरगढ़ की पवित्र धरा से एक ऐसी खबर आ रही है जिसे सुनकर किसी भी संवेदनशील इंसान का खून खौल उठेगा।
क्या कोई इतना भी गिर सकता है कि एक लाचार इंसान, जो अपनी तकलीफ बोलकर भी बयां नहीं कर सकता, उसे अपनी हवस का शिकार बना ले?
मेला घुमाने का लालच देकर की गई गंदी हरकत
पूरा मामला तब शुरू हुआ जब डोंगरगढ़ की रहने वाली एक मूक-बधिर (जो बोल और सुन नहीं सकती) महिला को एक व्यक्ति ने बातों ही बातों में झांसा दिया। उसने महिला को 'मेला' घुमाने ले जाने का भरोसा दिलाया। महिला बेचारा, यह सोचकर खुश हुई होगी कि वह कहीं बाहर घूमेगी, लेकिन उसे क्या पता था कि जिस पर वह भरोसा कर रही है, उसके दिमाग में कोई 'गंदा खेल' चल रहा है।
वो खौफनाक मंज़र...
आरोपी ने उस महिला को एक सुनसान जगह पर ले जाकर अपनी असलियत दिखाई। महिला अपनी मूक-बधिरता के कारण शायद चिल्ला भी नहीं पाई होगी, लेकिन उसके दिल पर जो बीती होगी, उसकी कल्पना करना भी नामुमकिन है। दरिंदगी की हदें पार करने के बाद आरोपी वहां से फरार हो गया।
पुलिस ने आरोपी को सलाखों के पीछे पहुँचाया
जैसे ही यह मामला परिजनों के सामने आया और पुलिस तक बात पहुँची, प्रशासन फौरन एक्शन में आ गया। मूक-बधिर होने की वजह से बयान दर्ज कराना भी एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाते हुए इशारा-संकेतों के माध्यम से जानकारी जुटाई और उस 'दरिंदे' को धर दबोचा। आरोपी फिलहाल सलाखों के पीछे है और जांच जारी है।
हमारी चुप्पी और समाज का गिरता स्तर
अक्सर हम ऐसी खबरें पढ़ते हैं और थोड़े समय बाद भूल जाते हैं। लेकिन सवाल ये है कि मूक-बधिर और लाचार वर्ग हमारे समाज का हिस्सा हैं, उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? क्या अब हमारे धार्मिक स्थलों और मेलों में भी हमारी माताएं-बहनें सुरक्षित नहीं हैं?
ये घटना न केवल डोंगरगढ़ के लिए, बल्कि हम सभी के लिए एक सबक है कि हमारे आस-पास ऐसे कितने ही 'मुखौटे' लगाए घूम रहे लोग हैं जो मौके की तालाश में रहते हैं। पुलिस अपना काम कर रही है, लेकिन पीड़ित महिला के मानसिक ज़ख्म शायद ही कभी भर पाएं।
इस घिनौने अपराध पर आपका क्या कहना है? क्या ऐसी दरिंदगी करने वालों को समाज में जीने का कोई हक़ है? हमें अपनी राय कमेंट्स में ज़रूर बताएं।