Chhattisgarh Assembly : बस्तर में धान खरीदी पर बवाल 44 हजार किसान नहीं बेच पाए अपनी उपज, सदन में गूंजा कर्ज का मुद्दा

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News India Live, Digital Desk: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार को बस्तर संभाग में धान खरीदी की प्रक्रिया को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। पूर्व आबकारी मंत्री और कांग्रेस विधायक कवासी लखमा ने आरोप लगाया कि बस्तर के हजारों आदिवासी किसान पंजीयन और टोकन होने के बावजूद अपना धान नहीं बेच पाए हैं, जिससे उन पर कर्ज का बोझ बढ़ गया है।

विधानसभा में क्या हुआ? (The Heated Exchange)

विपक्ष का आरोप: कवासी लखमा और लखेश्वर बघेल ने सदन में दावा किया कि अकेले बस्तर संभाग में 32,200 से अधिक किसान सरकारी केंद्रों पर अपनी उपज बेचने से वंचित रह गए हैं। उन्होंने सवाल किया कि "क्या सरकार इन किसानों का कर्ज माफ करेगी या उनका धान खरीदेगी?"

सरकार का पक्ष: खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार सभी किसानों से धान खरीदने के लिए प्रतिबद्ध थी। उन्होंने बताया कि इस सीजन में धान खरीदी का आंकड़ा रिकॉर्ड स्तर पर रहा है, लेकिन लगभग 44,000 किसान ऐसे थे जो निर्धारित समय सीमा के भीतर धान लेकर केंद्रों तक पहुँचे ही नहीं।

वॉकआउट: मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर और इसे 'रटा-रटाया' बताते हुए कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट (बहिर्गमन) कर दिया।

बस्तर में धान खरीदी के आंकड़े (District-wise Data)

खाद्य मंत्री द्वारा सदन में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, बस्तर संभाग में धान का उठाव इस प्रकार रहा:

कांकेर: सबसे अधिक 1,47,528 मीट्रिक टन धान का उठाव हुआ।

बस्तर जिला: 46,846 मीट्रिक टन।

बीजापुर: 21,888 मीट्रिक टन।

दंतेवाड़ा: 9,757 मीट्रिक टन।

कोंडागांव: 58,911 मीट्रिक टन।

नारायणपुर: 17,383 मीट्रिक टन।

सुकमा: 16,608 मीट्रिक टन।

[Image: A group of farmers waiting at a paddy procurement center in Bastar with bags of grain]

किसानों की मुख्य चिंताएं

टोकन की समस्या: कई किसानों का कहना है कि उन्हें टोकन तो जारी किए गए, लेकिन केंद्रों पर जगह की कमी या बारदाना (बोरे) न होने के कारण उनकी बारी आने से पहले ही खरीदी की समय सीमा (31 जनवरी 2026) समाप्त हो गई।

कर्ज का बोझ: किसानों ने खेती के लिए सोसायटियों से लोन लिया था। धान न बिकने के कारण वे अब अपना कर्ज चुकाने में असमर्थ हैं।

अगली रणनीति: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मांग की है कि सरकार उन किसानों का डेटा सार्वजनिक करे जिन्हें दूसरा टोकन मिलने के बाद भी धान बेचने का मौका नहीं मिला।

क्यों पिछड़ी बस्तर में खरीदी?

जानकारों के अनुसार, बस्तर के दुर्गम इलाकों में परिवहन (Transport) की धीमी रफ्तार और बीच में हुई बेमौसम बारिश ने खरीदी प्रक्रिया में बाधा डाली। हालांकि, सरकार का दावा है कि इस साल 140 लाख मीट्रिक टन से अधिक की रिकॉर्ड खरीदी प्रदेश स्तर पर की गई है।