Chandigarh Article 240 : अब नहीं काटने होंगे सरकारी दफ्तरों के चक्कर? प्रशासन के हाथ में आई असली ताकत

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News India Live, Digital Desk : चंडीगढ़ में रहने वाले आम लोगों, खासकर मकान मालिकों और व्यापारियों के लिए एक बेहद अहम चर्चा शुरू हो चुकी है। आपने शायद सुना हो कि शहर में Article 240 of the Constitution यानी अनुच्छेद 240 के तहत बदलाव होने की बात हो रही है। लेकिन, कानूनी दांव-पेच और भारी-भरकम शब्दों के बीच आम आदमी अक्सर उलझ जाता है कि आखिर इसका मतलब क्या है और इससे फायदा क्या होगा?

तो चलिए, बिना किसी भारी भरकम शब्दावली के, सीधी और सरल भाषा में समझते हैं कि यह पूरा मामला क्या है और आपकी रोजमर्रा की जिंदगी पर इसका क्या असर पड़ने वाला है।

आखिर क्या है ये आर्टिकल 240 का मुद्दा?

देखिये, चंडीगढ़ एक केंद्र शासित प्रदेश (Union Territory) है। अक्सर यहाँ एक असमंजस की स्थिति रहती थी कि नियम कौन बनाएगा—संसद के पुराने कानून या स्थानीय प्रशासन? अभी तक Capital of Punjab (Development and Regulation) Act, 1952 के तहत यहाँ के कामकाज चलते थे, जिनमें बदलाव करना काफी पेचीदा होता था।

संविधान का अनुच्छेद 240 भारत के राष्ट्रपति को यह शक्ति देता है कि वह किसी केंद्र शासित प्रदेश की 'शांति, प्रगति और अच्छी सरकार' (Peace, Progress, and Good Government) के लिए सीधे नियम बना सकते हैं। इसका मतलब है कि अब प्रशासन को छोटी-छोटी बातों या नियमों में सुधार के लिए बार-बार संसद की लंबी प्रक्रियाओं का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा।

चंडीगढ़ के लोगों को क्या 'राहत' मिलेगी?

सबसे बड़ा सवाल—क्या इससे मुझे और आपको कोई फायदा है? जवाब है—जी हाँ, उम्मीद तो यही है।

  1. बिल्डिंग मिसयूज और पेनाल्टी से राहत (Building Misuse Penalty Relief):
    चंडीगढ़ के निवासियों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द रहा है—'बिल्डिंग वायलेशन' या नक्शे के विपरीत निर्माण पर लगने वाला भारी जुर्माना। पुराने नियमों की वजह से प्रशासन चाह कर भी लोगों को वन-टाइम सेटलमेंट या जुर्माने में छूट नहीं दे पा रहा था। आर्टिकल 240 के इस्तेमाल से प्रशासन नए नियम लागू कर सकेगा, जिससे लोगों को पुराने भारी जुर्मानों से मुक्ति मिल सकती है। यह एक बहुत बड़ी Chandigarh real estate news है।
  2. तेजी से होंगे फैसले (Faster Administrative Decisions):
    अब तक फ़ाइले मंत्रालयों (MHA) और पुराने एक्ट की पेचीदगियों में फंसी रहती थीं। अब शक्ति सीधे तौर पर चंडीगढ़ प्रशासन और राष्ट्रपति के निर्देशों के बीच रहेगी। यानी, अगर शहर के विकास के लिए कोई नया प्रोजेक्ट लाना है या लीजहोल्ड को फ्रीहोल्ड (Leasehold to Freehold conversion) में बदलने जैसे फैसले लेने हैं, तो प्रक्रिया काफी तेज हो जाएगी।
  3. जमीन और प्रॉपर्टी के नियमों में लचीलापन:
    चंडीगढ़ के व्यापारियों और इंडस्ट्री वालों की हमेशा शिकायत रहती थी कि समय बदल गया है लेकिन नियम 1952 वाले चल रहे हैं। आर्टिकल 240 के लागू होने का मतलब है कि Chandigarh building bylaws को आज की जरूरतों के हिसाब से अपडेट किया जा सकेगा। इससे न केवल बिजनेस करना आसान होगा, बल्कि प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त में भी स्पष्टता आएगी।

क्या प्रशासन 'पावरफुल' हो जाएगा?

जी हाँ, इसका सीधा मतलब है कि चंडीगढ़ प्रशासन के पास अब अपने शहर को संभालने की ज्यादा ताकत होगी। वे 'कन्वर्जन चार्ज' (Conversion charges) और 'फ्लोर-वाइज रजिस्ट्री' जैसे मुद्दों पर ज्यादा बेहतर तरीके से और तेजी से फैसला ले पाएंगे। अब उन्हें हर बात के लिए पुराने एक्ट की लकीर का फकीर नहीं बनना पड़ेगा।