Chanakya Niti: मीठा बोलने वाले 'जहरीले' लोगों से रहें सावधान! आचार्य चाणक्य ने बताए धोखेबाजों को पहचानने के अचूक तरीके
लखनऊ। आज के प्रतियोगी दौर में हर व्यक्ति सफलता की सीढ़ी चढ़ना चाहता है, लेकिन अक्सर हमारी राह में सबसे बड़ी रुकावट वे लोग बनते हैं जो 'मुंह में राम, बगल में छुरी' वाली कहावत को सच करते हैं। सामने से प्रशंसा और पीठ पीछे षड्यंत्र रचने वाले चालाक लोगों को पहचानना बेहद कठिन होता है। भारत के महान कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'चाणक्य नीति' में ऐसे नकली चेहरों को बेनकाब करने के कुछ अचूक सूत्र बताए हैं। आइए, अमर उजाला की रिपोर्टर शैली में समझते हैं कि आप अपने आस-पास छिपे धोखेबाजों को कैसे परख सकते हैं।
चरित्र की पहचान: सोने की तरह इंसान को परखें
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जिस प्रकार सोने की शुद्धता जांचने के लिए उसे घिसा, काटा, गर्म किया और पीटा जाता है, ठीक उसी तरह एक व्यक्ति के असली चरित्र की पहचान उसके त्याग, आचरण, गुण और कर्म से होती है। केवल मीठी बातों से किसी को अपना समझना सबसे बड़ी भूल हो सकती है। चाणक्य के अनुसार, त्याग रहित व्यक्ति कभी वफादार नहीं हो सकता।
'विषकुम्भं पयोमुखम्': ऊपर दूध, अंदर जहर
चाणक्य नीति में अत्यधिक मीठा बोलने वाले लोगों को 'विषकुम्भं पयोमुखम्' कहा गया है—यानी ऐसा घड़ा जिसके मुख पर तो दूध लगा है, लेकिन भीतर विनाशकारी जहर भरा है।
तारीफ का जाल: एक धोखेबाज इंसान आपकी मौजूदगी में आपकी इतनी तारीफ करेगा कि आपको शक भी न हो, लेकिन आपकी अनुपस्थिति में वह आपकी छवि बिगाड़ने का कोई मौका नहीं छोड़ेगा।
अंध-समर्थन: चालाक लोग कभी आपका विरोध नहीं करेंगे, चाहे आप गलत ही क्यों न हों। वे चाहते हैं कि आप अपनी गलतियों को न सुधारें और अंततः असफल हो जाएं।
स्वार्थी मित्रों को पहचानने का 'लालच टेस्ट'
अगर आपको किसी के व्यवहार पर संदेह है, तो चाणक्य नीति उसे परखने का एक व्यवहारिक तरीका बताती है। उस व्यक्ति के सामने एक छोटा सा 'लालच' पेश करें। यदि वह अपने स्वार्थ के लिए आपके हितों को नुकसान पहुंचाने को तैयार हो जाता है, तो समझ लीजिए कि वह आपके साथ सिर्फ फायदे के लिए जुड़ा है। संकट के समय साथ छोड़ने वाला व्यक्ति कभी भी सच्चा मित्र नहीं हो सकता।
धोखे से बचने के 5 अचूक मंत्र
गुप्त बातें रखें गुप्त: अपनी व्यक्तिगत जानकारी और सफलता की योजना तब तक किसी से साझा न करें जब तक वह पूरी न हो जाए। आपका राज जानने वाला मित्र दुश्मन से भी अधिक डरावना हो सकता है।
चुगलखोरों से दूरी: जो व्यक्ति आपके सामने दूसरों की बुराई करता है, वह निश्चित रूप से दूसरों के सामने आपकी भी बुराई करेगा।
कर्मों पर ध्यान दें: लोगों के शब्दों पर नहीं, बल्कि उनके पिछले कर्मों और व्यवहार पर ध्यान दें। व्यक्ति के कर्म ही उसका असली आईना होते हैं।
अत्यधिक सीधापन हानिकारक: जंगल में सबसे पहले सीधे पेड़ों को ही काटा जाता है। इसलिए जीवन में बहुत अधिक सीधा होने के बजाय व्यावहारिक चतुराई (Smartness) अपनाएं।
कड़वा सच बोलने वाले का साथ: वह मित्र जो आपकी गलती पर आपको टोकता है और कड़वा सच बोलता है, वही आपका असली शुभचिंतक है।