Mahashivratri 2026 : महाकाल दरबार में 44 घंटे का महा-दर्शन उत्सव नटराज थीम पर सजा मंदिर, 10 लाख भक्तों के लिए कड़े नियम जारी

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News India Live, Digital Desk : धर्मनगरी उज्जैन में आज महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के पट शनिवार-रविवार की दरमियानी रात 2:30 बजे खोल दिए गए हैं। बाबा महाकाल के भक्तों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि इस बार मंदिर के कपाट लगातार 44 घंटे तक खुले रहेंगे, ताकि हर श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन कर सके। प्रशासन ने इस बार करीब 10 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान जताया है।

नटराज मंदिर की थीम और विदेशी फूलों से श्रृंगार

इस वर्ष महाकाल मंदिर की सजावट बेहद खास है। पूरे परिसर को दक्षिण भारत के प्रसिद्ध नटराज मंदिर की थीम पर सजाया गया है।

विदेशी फूलों का उपयोग: मंदिर को सजाने के लिए थाईलैंड और नीदरलैंड जैसे देशों से मंगाए गए दुर्लभ और सुगंधित फूलों का इस्तेमाल किया गया है।

200 कारीगरों की मेहनत: सजावट और लाइटिंग के कार्य में 200 से अधिक विशेषज्ञ जुटे रहे, जिससे पूरा मंदिर परिसर अलौकिक आभा से जगमगा उठा है।

दर्शन और पूजा का विशेष शेड्यूल (15-16 फरवरी)

महाशिवरात्रि पर पूजा का क्रम रात 2:30 बजे विशेष पंचामृत अभिषेक के साथ शुरू हुआ। मुख्य कार्यक्रम इस प्रकार हैं:

भस्मारती: रविवार तड़के विशेष भस्मारती संपन्न हुई।

सतत दर्शन: 15 फरवरी सुबह से शुरू हुए दर्शन 16 फरवरी की रात 11 बजे तक निरंतर जारी रहेंगे।

दोपहर की भस्मारती: साल में केवल एक बार, महाशिवरात्रि के अगले दिन (16 फरवरी) भस्मारती दोपहर में होगी।

सेहरा दर्शन: भगवान महाकाल को दूल्हे के रूप में सजाकर 'सप्तधान मुखौटा' और विशेष सेहरा चढ़ाया जाएगा।

श्रद्धालुओं के लिए जरूरी गाइडलाइंस (Do's & Don'ts)

भीड़ को देखते हुए मंदिर समिति और पुलिस प्रशासन ने सख्त नियम लागू किए हैं:

प्रवेश द्वार: सामान्य दर्शनार्थियों के लिए प्रवेश नरसिंह घाट से शुरू होकर त्रिवेणी संग्रहालय के रास्ते रखा गया है।

VIP दर्शन: शीघ्र दर्शन के लिए 250 रुपये की रसीद काउंटर या ऑनलाइन उपलब्ध है, जिसके लिए गेट नंबर 4 से प्रवेश मिलेगा।

बैन आइटम: मोबाइल फोन, बैग, और किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है।

ड्रेस कोड: भस्मारती में शामिल होने वाले पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।

सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम

पूरे उज्जैन शहर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। करीब 3000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं और 500 से ज्यादा CCTV कैमरों के जरिए चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पार्किंग स्थल से मंदिर तक निःशुल्क बस सेवा भी चलाई जा रही है।