Chakradharpur Railway Division : फाइलों पर सिर्फ हिंदी दिखेगी , रेलवे के इस दफ्तर में आया नया फरमान, अंग्रेजी बाबूओं की बढ़ी टेंशन

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News India Live, Digital Desk: Chakradharpur Railway Division : रेलवे के दफ्तर मोटी-मोटी फाइलें... और उन पर लिखी अंग्रेजी! यह नजारा अब जल्द ही बदलने वाला है, कम से कम दक्षिण-पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर रेल मंडल में तो ऐसा ही होने जा रहा है। यहां के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को दो टूक शब्दों में कह दिया है कि अब सरकारी कामकाज में 'अंग्रेजियत' नहीं, बल्कि राजभाषा हिंदी को प्राथमिकता देनी होगी। जो भी इसमें कोताही बरतेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।

DRM ने ली राजभाषा की 'पाठशाला'

यह सख्त निर्देश शुक्रवार को चक्रधरपुर रेल मंडल मुख्यालय में आयोजित हुई 'मंडल राजभाषा कार्यान्वयन समिति' की तिमाही बैठक के दौरान दिए गए। इस बैठक की अध्यक्षता खुद DRM कर रहे थे और इसमें मंडल के सभी आला अधिकारी मौजूद थे। बैठक का मकसद यह समीक्षा करना था कि रेलवे के दैनिक कामकाज में हिंदी का कितना प्रयोग हो रहा है।

समीक्षा के दौरान जब यह पाया गया कि कई विभागों में अभी भी ज्यादातर काम अंग्रेजी में ही हो रहा है, तो DRM ने नाराजगी जाहिर की।

क्या-क्या दिए गए सख्त निर्देश?

बैठक में हिंदी के प्रयोग को शत-प्रतिशत सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण और कड़े निर्देश जारी किए गए:

  1. सभी फाइलें हिंदी में बनें: DRM ने साफ कहा कि अब से ज्यादातर फाइलें, नोटिंग और पत्राचार केवल हिंदी में ही किए जाएं।
  2. नाम-पट और सूचना-पट हिंदी में: मंडल के सभी स्टेशनों और कार्यालयों में लगे साइन बोर्ड, नाम की प्लेटें और सूचना पट पर हिंदी को प्रमुखता दी जाए।
  3. ट्रेन चार्ट और रिजर्वेशन स्लिप: यात्रियों को दी जाने वाली सभी जानकारियां, जैसे ट्रेन चार्ट और रिजर्वेशन स्लिप, अनिवार्य रूप से हिंदी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में होनी चाहिए।
  4. हिंदी में काम करने वालों को मिलेगा इनाम: जो कर्मचारी और अधिकारी अपना काम बेहतरीन तरीके से हिंदी में करेंगे, उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए पुरस्कृत भी किया जाएगा।
  5. वेबसाइट और सोशल मीडिया पर भी हिंदी: मंडल की आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया हैंडल पर भी सभी जानकारी हिंदी में अपडेट करने पर जोर दिया गया।

क्यों दिया जा रहा है हिंदी पर इतना जोर?

केंद्र सरकार की राजभाषा नीति के अनुसार, सभी केंद्रीय कार्यालयों में सरकारी कामकाज को हिंदी में करना अनिवार्य है। रेलवे भी इसी नीति का पालन सुनिश्चित कर रहा है। इसका मकसद सिर्फ एक भाषा को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि यह भी है कि आम आदमी, जो देश की बहुसंख्यक आबादी है, रेलवे की कार्यप्रणाली को अपनी भाषा में आसानी से समझ सके।

DRM के इस कड़े रुख के बाद अब उम्मीद है कि चक्रधरपुर रेल मंडल के कामकाज में जल्द ही एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा, जहां फाइलों पर अंग्रेजी की जगह राजभाषा हिंदी अपनी रफ्तार पकड़ती हुई नजर आएगी।