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March 27 2026 04:12 am

Chaiti Chhath 2026: उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ चैती छठ का समापन, 36 घंटे का निर्जला व्रत पूरा; जानें अपने शहर में सूर्योदय का समय

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नई दिल्ली/पटना: लोक आस्था के महापर्व 'चैती छठ' का आज (25 मार्च, 2026) भावपूर्ण समापन हो गया है। चैत्र शुक्ल सप्तमी की पावन तिथि पर देश भर के नदी घाटों और जलाशयों में व्रतियों ने उगते हुए सूर्य को 'ऊषा अर्घ्य' अर्पित किया। इसके साथ ही छठ व्रतियों का कठिन 36 घंटे का निर्जला उपवास संपन्न हुआ। बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश समेत देश के विभिन्न कोनों में छठी मैया के गीतों से माहौल भक्तिमय बना रहा। व्रतियों ने भगवान भास्कर की पहली किरण को नमन कर सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना की।

उषा अर्घ्य और व्रत का पारण

छठ महापर्व के चौथे और अंतिम दिन को 'ऊषा अर्घ्य' कहा जाता है। आज सुबह 06:20 बजे (दिल्ली समयानुसार) जैसे ही सूर्य देव ने दर्शन दिए, पानी में खड़े व्रतियों ने सूप में ठेकुआ, मौसमी फल और नारियल रखकर अर्घ्य दिया। अर्घ्य देने के बाद व्रतियों ने घाट पर ही पूजा-अर्चना की और फिर कच्चा दूध व प्रसाद ग्रहण कर अपना व्रत खोला, जिसे 'पारण' कहा जाता है।

घाटों पर दिखा आस्था का सैलाब

इससे पहले मंगलवार (24 मार्च) की शाम को 'संध्या अर्घ्य' के दौरान सूर्य की अंतिम किरण को अर्घ्य दिया गया था। पटना के गंगा घाटों से लेकर दिल्ली के यमुना तट तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कई लोगों ने कोरोना काल के बाद से शुरू हुई परंपरा को जारी रखते हुए अपने घर की छतों और आंगन में पानी के टब बनाकर भी अर्घ्य दिया। बांस के सूप में सजाए गए पकवानों और दीपों की रोशनी ने घाटों की छटा को अलौकिक बना दिया।

शहर अनुसार ऊषा अर्घ्य का सटीक समय (25 मार्च 2026)

सूर्योदय का समय भौगोलिक स्थिति के अनुसार अलग-अलग शहरों में भिन्न रहा। यहाँ प्रमुख शहरों में सूर्योदय का समय दिया गया है:

पटना: सुबह 05:59 बजे

दिल्ली: सुबह 06:20 बजे

रांची: सुबह 05:48 बजे

लखनऊ: सुबह 06:05 बजे

कोलकाता: सुबह 05:36 बजे

वाराणसी: सुबह 05:57 बजे

मुंबई: सुबह 06:39 बजे

गोरखपुर: सुबह 05:55 बजे

नोएडा: सुबह 06:19 बजे

साल में दो बार मनाया जाता है यह पर्व

छठ महापर्व साल में दो बार मनाया जाता है। पहला चैत्र मास में (चैती छठ) और दूसरा कार्तिक मास में (कार्तिकी छठ)। दोनों ही बार भगवान सूर्य की उपासना की जाती है, जो ऊर्जा और जीवन के प्रत्यक्ष देवता हैं। चैती छठ का समापन गर्मी की शुरुआत का संकेत भी देता है, इसलिए इस दौरान खान-पान और शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है।

पारण के साथ ही छठ संपन्न

सप्तमी की सुबह अर्घ्य के बाद व्रती अपने घर लौटकर परिवार और पड़ोसियों के बीच प्रसाद बांटते हैं। ठेकुआ और कसार का प्रसाद ग्रहण करने के साथ ही इस चार दिवसीय अनुष्ठान का विधिवत समापन हो गया है। प्रशासन की ओर से घाटों पर सुरक्षा और सफाई के कड़े इंतजाम किए गए थे।