Cervical Cancer Alert: भारत में महिलाओं के लिए साइलेंट किलर बना सर्वाइकल कैंसर! हर साल 1.22 लाख नए मामले; जानें टीका और बचाव के तरीके

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नई दिल्ली। भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक डरावनी हकीकत सामने आई है। आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) से होने वाली कुल मौतों में से लगभग एक-तिहाई हिस्सा अकेले भारत का है। हमारे देश में हर साल 1.22 लाख से अधिक महिलाएं इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आती हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि हर कुछ मिनटों में एक महिला इस कैंसर के कारण अपनी जान गंवा देती है। हालांकि, सही जानकारी और समय पर टीकाकरण इस खतरे को जड़ से खत्म कर सकता है।

क्या है मुख्य कारण? HPV वायरस का हमला

सर्वाइकल कैंसर का सबसे प्रमुख कारण ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) के उच्च जोखिम वाले स्ट्रेन हैं।

संक्रमण: यह वायरस आमतौर पर यौन सक्रियता शुरू होने के बाद शरीर में प्रवेश करता है।

जोखिम: भारत में प्रत्येक 53 में से एक महिला को जीवन भर में इस कैंसर के होने का खतरा बना रहता है।

अन्य कारण: खराब मासिक धर्म स्वच्छता (Menstrual Hygiene) और जागरूकता की कमी इस संक्रमण की संभावना को और अधिक बढ़ा देती है।

भ्रम बनाम हकीकत: केवल बुजुर्ग महिलाएं ही शिकार नहीं

समाज में यह एक आम धारणा है कि सर्वाइकल कैंसर केवल अधिक उम्र की महिलाओं को होता है, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञ इसे पूरी तरह गलत बताते हैं।

"यह बीमारी शरीर में रातों-रात विकसित नहीं होती। इसका संक्रमण युवावस्था में ही शुरू हो सकता है और वर्षों बाद यह कैंसर का रूप ले लेता है। इसीलिए, बचाव के प्रयास किशोरावस्था से ही शुरू होने चाहिए।"

बचाव का अचूक हथियार: HPV टीकाकरण (Vaccination)

सर्वाइकल कैंसर दुनिया के उन चुनिंदा कैंसरों में से है जिसे एक साधारण टीके के जरिए रोका जा सकता है।

सबसे प्रभावी उम्र: 9 से 15 वर्ष की लड़कियों के लिए यह टीका सबसे ज्यादा असरदार माना गया है।

युवाओं के लिए: 26 वर्ष की आयु तक की युवतियां भी यह टीका लगवा सकती हैं।

सुरक्षा: यह वैक्सीन HPV 16 और 18 जैसे खतरनाक स्ट्रेन्स से सुरक्षा देती है, जो भारत में 85% मामलों के लिए जिम्मेदार हैं।

नियमित स्क्रीनिंग: जल्दी पहचान ही जीवन है

भारत में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि 75% मरीजों में कैंसर का पता तब चलता है जब वह अंतिम चरण में पहुँच चुका होता है। समय रहते पहचान के लिए निम्नलिखित जांच अनिवार्य हैं:

पैप स्मीयर (Pap Smear): यह कैंसर बनने से पहले की कोशिकाओं की पहचान करता है।

HPV टेस्ट: वायरस की उपस्थिति का पता लगाने के लिए 30 से 65 वर्ष की महिलाओं को नियमित अंतराल पर यह स्क्रीनिंग करानी चाहिए।