मेरठ में फिर उठी इंसाफ की पुकार, दलित बेटी की हत्या के बाद नेशनल हाईवे पर जनता का भारी आक्रोश
News India Live, Digital Desk: मेरठ की फिजाओं में इन दिनों सिर्फ एक ही चर्चा है 'इंसाफ'। अक्सर हम ख़बरों में सुनते हैं कि बेटियां सुरक्षित हैं, लेकिन जब कोई ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आती है, तो कलेजा मुँह को आ जाता है। मामला मेरठ का है, जहाँ एक दलित युवती रितु की हत्या ने न केवल उनके परिवार को तोड़कर रख दिया है, बल्कि पूरे इलाके के लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया है।
आखिर गुस्सा इतना क्यों भड़का?
बात सिर्फ एक हत्या की नहीं है, बल्कि उस बेटी की सुरक्षा और आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की है। कई दिनों से पीड़ित परिवार इंसाफ की आस में दर-दर भटक रहा था, लेकिन जब उन्हें लगा कि बात अनसुनी की जा रही है, तो जनता का गुस्सा फूट पड़ा। कल हजारों की भीड़ सिवाया टोल प्लाजा पर इकट्ठा हुई और देखते ही देखते दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे का नजारा ही बदल गया। सड़क पर बिछी चटाइयों और हाथों में नारों ने साफ कर दिया कि जब तक कार्रवाई नहीं होगी, कोई पीछे नहीं हटने वाला।
सियासत और इंसाफ का साथ
इस विरोध प्रदर्शन में विपक्ष के बड़े चेहरे भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने पहुँचे। समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान और सांसद रामजी लाल सुमन ने पीड़ित परिवार के साथ जमीन पर बैठकर अपनी संवेदना व्यक्त की। इन नेताओं का साफ़ कहना है कि प्रशासन अपनी ज़िम्मेदारी से भाग नहीं सकता। जब रक्षक ही मूकदर्शक बन जाएं, तो पीड़ित के पास सड़क पर उतरने के अलावा कोई चारा नहीं बचता। इन चेहरों की मौजूदगी ने न केवल प्रदर्शन को ताकत दी, बल्कि सरकार और पुलिस पर दबाव भी बढ़ा दिया है।
सुरक्षा का सवाल और भारी पुलिस बल
मेरठ पुलिस के लिए कल की स्थिति संभालना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। सैकड़ों पुलिसकर्मी और आला अधिकारी मौके पर पहुँचे, लोगों को समझाने की कोशिश हुई, लेकिन भीड़ का बस एक ही सवाल था— 'हमारी बेटी को मारने वाले आज़ाद क्यों घूम रहे हैं?'। टोल प्लाजा पर हुए इस बवाल ने मेरठ-दिल्ली की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा दिया, जिससे राहगीरों को थोड़ी परेशानी तो हुई, पर प्रदर्शनकारियों का कहना था कि— "आज की ये तकलीफ कल किसी दूसरी बेटी के साथ होने वाली अनहोनी को रोक सकती है।"
उम्मीदें अब प्रशासन पर हैं
पुलिस ने आश्वासन दिया है कि आरोपियों की धर-पकड़ जल्द होगी और रितु के परिवार को हर मुमकिन मदद मिलेगी। अब देखना ये है कि क्या प्रशासन की ये फाइल सिर्फ़ आश्वासन पर टिकती है या फिर जल्द ही कोई सख्त फैसला सामने आता है। मेरठ की ये सड़कों पर बैठी भीड़ सिर्फ़ नारेबाजी नहीं कर रही, बल्कि व्यवस्था को आईना दिखा रही है।
इंसाफ में देरी, इंसाफ न होने के बराबर है। पूरा मेरठ आज उसी रितु के लिए न्याय मांग रहा है जिसे सरेराह मौत के घाट उतार दिया गया।