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ITR भरने के बाद क्यों रिवाइज कर रहे हैं हजारों टैक्सपेयर? सामने आई बड़ी वजह, नोटिस से बचने के लिए उठाया कदम

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR Filing 2026) दाखिल करने वाले करदाताओं के बीच इन दिनों एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। रिटर्न सबमिट करने के बाद उसे दोबारा 'रिवाइज्ड' (संशोधित) करने वाले लोगों की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। इसकी सबसे बड़ी वजह इनकम टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा इस्तेमाल की जा रही आधुनिक तकनीक और डेटा निगरानी (Data Analytics) है। विभाग के पास अब पहले के मुकाबले कहीं अधिक तेजी से और विस्तृत वित्तीय जानकारी पहुंच रही है। ऐसे में कई टैक्सपेयर्स को रिटर्न भरने के बाद एहसास हो रहा है कि उनके कुछ बड़े लेनदेन रिकॉर्ड में बाद में जुड़े हैं, जिसके कारण उन्हें अपनी गलती सुधारने के लिए रिवाइज्ड रिटर्न का सहारा लेना पड़ रहा है।

डेटा निगरानी का बढ़ा जाल, AIS में बाद में जुड़ रही हैं नई एंट्रीज

इस पूरे बदलाव के पीछे की सबसे बड़ी वजह एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) का लगातार अपडेट होना है। AIS एक ऐसा डिजिटल दस्तावेज है जिसमें आपके पूरे साल की कमाई और बड़े वित्तीय लेनदेन का पूरा कच्चा चिट्ठा होता है। इसमें आपकी सैलरी, बैंक ब्याज, शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड की खरीद-बिक्री, डिविडेंड, विदेशी मुद्रा का लेन-देन और किसी भी प्रकार के कैपिटल गेन (पूंजीगत लाभ) का सटीक ब्यौरा दर्ज रहता है।

असल समस्या यह है कि AIS कोई स्थिर दस्तावेज नहीं है; यह समय के साथ बदलता रहता है। बैंक, वित्तीय कंपनियां, और शेयर ब्रोकर समय-समय पर अपने डेटा को टैक्स विभाग के पास अपडेट करते हैं। ऐसे में जो टैक्सपेयर्स वित्तीय वर्ष खत्म होते ही जल्दबाजी में अपना आईटीआर दाखिल कर देते हैं, उन्हें कुछ हफ्तों बाद अपने एआईएस में नई एंट्रीज या नए लेनदेन दिखाई देने लगते हैं। सिस्टम में आंकड़ों का यह अंतर दिखते ही रिवाइज्ड रिटर्न भरना बेहद जरूरी हो जाता है।

पहले नजरअंदाज हो जाने वाली गलतियां अब पकड़ रहा है AI सिस्टम

आज का आयकर विभाग अत्याधुनिक तकनीक, डेटा एनालिटिक्स और फेसलेस स्क्रूटनी (Faceless Scrutiny) का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा है। विभाग का ऑटोमेटेड एआई सिस्टम दाखिल किए गए आईटीआर के आंकड़ों का मिलान सीधे AIS और टैक्सपेयर इन्फॉर्मेशन समरी (TIS) से करता है।

पहले के समय में जो छोटी-मोटी विसंगतियां या वित्तीय चूक नजरअंदाज हो जाती थीं, उन्हें अब यह सिस्टम पलक झपकते ही पकड़ लेता है। यही कारण है कि समझदार टैक्सपेयर्स विभाग की तरफ से कोई कड़ा कानूनी नोटिस या पेनाल्टी आने का इंतजार करने के बजाय, खुद ही अपनी गलती स्वीकार करते हुए समय रहते रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करना ज्यादा सुरक्षित समझ रहे हैं।

असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए क्या हैं रिवाइज्ड रिटर्न की डेडलाइंस?

टैक्सपेयर्स के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के रिटर्न अभी भी पुराने 'इनकम टैक्स एक्ट, 1961' के तहत ही प्रोसेस किए जाएंगे। यह नियम तब भी प्रभावी रहेगा, जब 1 अप्रैल 2026 से देश में नया 'इनकम टैक्स एक्ट, 2025' लागू हो चुका है।

मौजूदा नियमों के अनुसार, आयकर अधिनियम की धारा 139(5) के तहत बिना किसी शुल्क के रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर 2026 निर्धारित है। बशर्ते, इससे पहले आपका असेसमेंट (कर निर्धारण) पूरा न हुआ हो।

  • बड़ी राहत का प्रस्ताव: फाइनेंस बिल 2026 में इस समयसीमा को बढ़ाकर 31 मार्च 2027 करने का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि, दिसंबर 2026 की समयसीमा बीतने के बाद रिवाइज्ड रिटर्न भरने पर करदाताओं को अतिरिक्त लेट फीस या शुल्क देना पड़ सकता है।

  • अपडेटेड रिटर्न का विकल्प: यदि यह बढ़ी हुई समयसीमा भी हाथ से निकल जाती है, तो धारा 139(8A) के तहत 'अपडेटेड रिटर्न' (Updated Return) भरने का अंतिम मौका मिलता है। यह सुविधा 48 महीनों तक उपलब्ध रहती है, लेकिन इसमें आपको भारी अतिरिक्त टैक्स और पेनाल्टी चुकानी पड़ती है।

पहली बार में ही सही ITR भरना क्यों है समझदारी? अपनाएं ये तरीका

बार-बार रिवाइज्ड रिटर्न भरने की झंझट और मानसिक तनाव से बचने का सबसे बेहतरीन तरीका यह है कि आप पहली बार में ही पूरी सावधानी के साथ सही रिटर्न भरें। इसके लिए आईटीआर दाखिल करने से पहले अपने पास मौजूद सभी दस्तावेजों का मिलान एआईएस, टीआईएस और फॉर्म 26AS से अवश्य कर लें।

मिलान के दौरान अपने फॉर्म 16, बैंक स्टेटमेंट, ब्रोकर के पीएंडएल (P&L) स्टेटमेंट, ब्याज सर्टिफिकेट और कैपिटल गेन स्टेटमेंट को अपने सामने रखें। यदि आपको लगता है कि आपके AIS में कोई ट्रांजैक्शन गलत तरीके से दर्ज हो गया है या वह आपका नहीं है, तो आप तुरंत पोर्टल पर दी गई 'Report Incorrect Information' सुविधा का उपयोग करके अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।

इन सेक्टर्स के निवेशकों को बरतनी होगी सबसे ज्यादा सावधानी

जिन करदाताओं की आय के स्रोत सीमित हैं (जैसे केवल सैलरी), उन्हें ज्यादा परेशानी नहीं होती। लेकिन जिन लोगों के पास आय के कई जरिए हैं, उन्हें विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए। शेयर बाजार में एक्टिव ट्रेडर्स, म्यूचुअल फंड में नियमित निवेश करने वाले, विदेशी संपत्तियों या विदेशी धन का लेन-देन करने वाले और रियल एस्टेट (प्रॉपर्टी) की खरीद-बिक्री से कैपिटल गेन कमाने वाले लोगों को बिना क्रॉस-वेरिफिकेशन के अपना रिटर्न लॉक नहीं करना चाहिए। आपकी थोड़ी सी सजगता आपको आयकर विभाग की लंबी जांच और नोटिस के झंझट से हमेशा के लिए दूर रख सकती है।

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