ITR-4 Form Changes 2026: ITR-4 (सुगम) फॉर्म में किराये की आय को लेकर 2 बड़े बदलाव, इनकम टैक्स विभाग ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए जारी की एक्सेल यूटिलिटी
इनकम टैक्स रिटर्न (ITR Filing 2026) दाखिल करने वाले करदाताओं के लिए आयकर विभाग ने एक बेहद महत्वपूर्ण अपडेट जारी किया है। विभाग ने असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 (वित्तीय वर्ष 2025-26) के लिए सभी प्रकार के ITR फॉर्म नोटिफाई कर दिए हैं। इसके साथ ही, नौकरीपेशा और छोटे बिजनेस व प्रोफेशनल्स से जुड़े करदाताओं के लिए सबसे लोकप्रिय फॉर्म— ITR-1, ITR-2, ITR-3 और ITR-4 (Sugam) की एक्सेल यूटिलिटी (Excel Utility) भी आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल पर लाइव कर दी गई है।
टैक्सपेयर्स के लिए बिना किसी पेनाल्टी के अपना रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। इस बार विभाग ने पारदर्शी टैक्स रिपोर्टिंग को बढ़ावा देने के लिए ITR-4 फॉर्म में किराये से होने वाली आय (Rental Income) को लेकर दो बेहद महत्वपूर्ण और व्यावहारिक बदलाव किए हैं, जिन्हें समझना हर मकान मालिक के लिए जरूरी है।
ITR-4 फॉर्म में क्या हुए हैं 2 नए बदलाव?
यदि आप अपनी प्रॉपर्टी से किराये की कमाई करते हैं और इस साल ITR-4 फॉर्म भरने जा रहे हैं, तो आपको नए प्रारूप में ये दो बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे:
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अधिकतम दो हाउस प्रॉपर्टी की सीमा: नए नियमों के तहत अब टैक्सपेयर्स ITR-4 फॉर्म में अधिकतम दो हाउस प्रॉपर्टी (मकान या व्यावसायिक संपत्ति) से होने वाली किराये की आय की विस्तृत जानकारी दे सकेंगे। इससे अधिक संपत्ति होने पर फॉर्म का चयन बदलना पड़ सकता है।
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वसूली न होने वाले किराये (Unrealized Rent) का नया कॉलम: कई बार ऐसा होता है कि किरायेदार बिना किराया चुकाए मकान खाली कर देता है या विवाद के कारण किराया फंस जाता है। ऐसे 'रेंट विच कैनॉट बी रियलाइज्ड' (Rent which cannot be realized) यानी वसूल न हो पाने वाले किराये का ब्यौरा देने के लिए फॉर्म में एक बिल्कुल नया और अलग कॉलम जोड़ दिया गया है, ताकि करदाताओं को फंसे हुए पैसे पर बेवजह टैक्स न देना पड़े।
कौन से करदाता भर सकते हैं ITR-4 (सुगम) फॉर्म?
ITR-4 फॉर्म हर किसी के लिए नहीं होता। यह फॉर्म विशेष रूप से निम्नलिखित करदाताओं के लिए डिज़ाइन किया गया है:
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पात्रता: यह फॉर्म उन व्यक्तिगत करदाताओं (Individuals), हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) और पार्टनरशिप फर्मों (LLP को छोड़कर) के लिए है जिनकी कुल सालाना आय ₹50 लाख तक है।
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बिजनेस और प्रोफेशनल आय: जिनकी आय का मुख्य स्रोत प्रिजम्टिव टैक्सेशन स्कीम (Prescriptive Taxation Scheme) के तहत आयकर अधिनियम की धारा 44AD (छोटे बिजनेसमैन), 44ADA (डॉक्टर, वकील, इंजीनियर जैसे प्रोफेशनल्स) या 44AE (गुड्स कैरिज/ट्रांसपोर्ट बिजनेस) के अंतर्गत आता है।
एक ही मकान में खुद रहना और किराया उठाना; कैसे लगेगा टैक्स?
आयकर विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी एक ही मकान या इमारत में दो या दो से अधिक स्वतंत्र फ्लैट/यूनिट बने हुए हैं, और मकान मालिक उसके एक हिस्से में खुद रहता है जबकि दूसरा हिस्सा किराये पर उठा रखा है, तो टैक्स के गणित में दोनों हिस्सों को दो अलग-अलग संपत्तियां (Properties) माना जाएगा:
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स्वयं रहने वाला हिस्सा: इस यूनिट की आय का आकलन स्व-आवासीय (Self-Occupied) संपत्ति के नियमों के तहत होगा, जिसका नेट एनुअल वैल्यू शून्य माना जाता है।
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किराये वाला हिस्सा: इस यूनिट की आय का आकलन लेट-आउट (Let-Out) संपत्ति के कड़े नियमों के अनुसार किया जाएगा और प्राप्त किराये पर नियमानुसार टैक्स लगेगा।
बकाया किराया (Arrears of Rent) मिलने पर टैक्स और 30% छूट का गणित
अक्सर टैक्सपेयर्स के मन में यह सवाल उठता है कि यदि पुराना फंसा हुआ किराया सालों बाद वापस मिलता है, तो उस पर टैक्स कब और कैसे लगेगा? नए दिशा-निर्देशों के अनुसार:
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प्राप्ति का वर्ष: जो किराया अतीत में वसूल नहीं हो पाया था और वह अब अचानक प्राप्त हो जाता है, तो उसे उसी वित्तीय वर्ष की 'हाउस प्रॉपर्टी से आय' (Income from House Property) माना जाएगा, जिस वर्ष वह पैसा असल में आपके हाथ में आया है।
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30% की बंपर छूट: सबसे राहत की बात यह है कि इस तरह प्राप्त हुए पुराने बकाया किराये पर पूरा टैक्स लगाने से पहले सरकार द्वारा 30 प्रतिशत की फ्लैट स्टैण्डर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) यानी सीधे टैक्स छूट दी जाएगी।
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स्वामित्व का नियम: यह टैक्स नियम और छूट तब भी समान रूप से लागू रहेगी, जब किराया मिलने वाले वर्ष में आप उस संपत्ति के कानूनी मालिक न भी रहे हों (यानी आपने वह मकान बेच दिया हो)। विभाग का मानना है कि इन नए कॉलम और नियमों से किराये की आय छुपाने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी और ईमानदार टैक्सपेयर्स को अपनी बात रखने का बेहतर मौका मिलेगा।