म्यूचुअल फंड निवेशक की मौत के बाद किसे मिलती हैं यूनिट्स? क्या SIP जारी रहती है? समझें ट्रांसमिशन और विड्रॉल के पूरे नियम

म्यूचुअल फंड निवेशक की मौत के बाद किसे मिलती हैं यूनिट्स? क्या SIP जारी रहती है? समझें ट्रांसमिशन और विड्रॉल के पूरे नियम

म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले किसी व्यक्ति के असामयिक निधन के बाद उसके फोलियो में मौजूद यूनिट्स का मालिकाना हक सीधे तौर पर फोलियो के होल्डिंग पैटर्न और नॉमिनेशन पर निर्भर करता है:

  • जॉइंट होल्डिंग (Joint Holding): यदि फोलियो 'Anyone or Survivor' या 'Joint' मोड में खुला था, तो प्राथमिक (पहले) निवेशक की मृत्यु की स्थिति में यूनिट्स का सीधा अधिकार जीवित जॉइंट होल्डर (दूसरे/तीसरे धारक) को मिल जाता है।

  • नॉमिनी (Nominee): यदि निवेश केवल एकल (Single) नाम पर था और उसमें नॉमिनी दर्ज था, तो म्यूचुअल फंड कंपनी यूनिट्स को नॉमिनी के नाम पर ट्रांसफर करती है। कानूनन नॉमिनी एक ट्रस्टी की तरह यूनिट्स प्राप्त करता है।

  • नॉमिनेशन न होने पर (No Nominee): यदि फोलियो में कोई नॉमिनी पंजीकृत नहीं था, तो कानूनी वारिसों (Legal Heirs) को वसीयत (Will), उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate) या कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र (Legal Heir Certificate) के आधार पर यूनिट्स दी जाती हैं।

क्या निवेशक की मौत के बाद SIP जारी रहती है?

नहीं, निवेशक के निधन के बाद एसआईपी (SIP) अपने आप जारी नहीं रह सकती:

  • बैंक और एएमसी को सूचना: परिजनों या कानूनी प्रतिनिधियों को तुरंत संबंधित म्यूचुअल फंड हाउस (AMC) या रजिस्ट्रार (CAMS/KFintech) और बैंक को निवेशक के निधन की आधिकारिक सूचना देनी होती है।

  • एसआईपी का बंद होना: जैसे ही मृत्यु प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर सूचना दर्ज कराई जाती है, भविष्य की सभी सक्रिय एसआईपी, एसटीपी (STP) और एसडब्ल्यूपी (SWP) तत्काल प्रभाव से रोक दी जाती हैं।

  • ईसीएस/ऑटो-डेबिट कैंसिलेशन: निवेशक के बैंक खाते से कटने वाले ऑटो-डेबिट मैंडेट को भी रद्द कर दिया जाता है ताकि खाते से अतिरिक्त पैसे न कटें।

ट्रांसमिशन (यूनिट ट्रांसफर) की प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज

म्यूचुअल फंड में यूनिट्स को मृतक के खाते से नए दावेदार के खाते में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को 'ट्रांसमिशन' (Transmission) कहा जाता है। इसके लिए निम्नलिखित कदम उठाने होते हैं:

  1. दावेदार का नया फोलियो और केवाईसी: नॉमिनी या उत्तराधिकारी को अपने नाम पर एक नया म्यूचुअल फंड फोलियो खोलना होता है और अपनी व्यक्तिगत केवाईसी (KYC - पैन, आधार, बैंक खाता) पूरी करानी होती है।

  2. ट्रांसमिशन फॉर्म भरना: एएमसी की वेबसाइट या कैम्स/कार्वी के पोर्टल से 'फॉर्म टी3' (Form T3 - नॉमिनी के लिए) या संबंधित ट्रांसमिशन फॉर्म डाउनलोड कर भरें।

  3. अनिवार्य दस्तावेज जमा करना:

    • मृतक का मूल मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) या नोटराइज्ड/सत्यापित प्रति।

    • दावेदार का पैन कार्ड, एड्रेस प्रूफ और रद्द किया गया चेक (Cancelled Cheque)।

    • दावेदार का बैंक सत्यापन (बैंक मैनेजर द्वारा प्रमाणित हस्ताक्षर)।

    • यदि कुल निवेश ₹5 लाख से अधिक है और नॉमिनी नहीं है, तो नोटरीकृत क्षतिपूर्ति बांड (Indemnity Bond), अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) या उत्तराधिकार प्रमाण पत्र।

विड्रॉल और टैक्स के नियम-कायदे

ट्रांसमिशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यूनिट्स नए धारक के डीमैट या फोलियो में क्रेडिट हो जाती हैं:

  • पैसे निकालने (विड्रॉल) का अधिकार: ट्रांसमिशन पूरा होते ही नया धारक जब चाहे उन यूनिट्स को आंशिक या पूरी तरह रिडीम (Redeem) कर सकता है या उन्हें अपने नाम पर जारी रख सकता है।

  • टैक्स की देनदारी: यूनिट्स का उत्तराधिकार में मिलना कोई बिक्री नहीं माना जाता, इसलिए ट्रांसमिशन के समय कोई इनकम टैक्स नहीं लगता।

  • कैपिटल गेन टैक्स की गणना: जब नया धारक भविष्य में इन यूनिट्स को बेचेगा, तब उसे कैपिटल गेन टैक्स देना होगा। इसमें खरीद की मूल लागत (Cost of Acquisition) और होल्डिंग अवधि (Holding Period) वही मानी जाएंगी जो मूल मृतक निवेशक के समय से चली आ रही थी।