UDAN Scheme 2.0: आम नागरिक के लिए सुगम और सस्ता हुआ हवाई सफर, 10 वर्षों में 1.49 करोड़ यात्रियों ने भरी उड़ान; अब 4 करोड़ का नया महत्वाकांक्षी लक्ष्य

UDAN Scheme 2.0: आम नागरिक के लिए सुगम और सस्ता हुआ हवाई सफर, 10 वर्षों में 1.49 करोड़ यात्रियों ने भरी उड़ान; अब 4 करोड़ का नया महत्वाकांक्षी लक्ष्य

देश के आम नागरिक को किफायती दर पर हवाई सफर की सुविधा उपलब्ध कराने और छोटे शहरों को देश के प्रमुख विमानन नेटवर्क से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई केंद्र सरकार की फ्लैगशिप योजना 'उड़ान' (UDAN - उड़े देश का आम नागरिक) ने अपने सफल संचालन के 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) द्वारा जारी ताजा समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक दशक में इस महत्वाकांक्षी रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम (RCS) के जरिए देश के 1.49 करोड़ से अधिक आम नागरिकों ने रियायती दरों पर हवाई यात्रा का लाभ उठाया है। हवाई चप्पल पहनने वाले आम आदमी को हवाई जहाज में बिठाने के जिस विजन के साथ 2016-17 में इस योजना की नींव रखी गई थी, उसने आज भारत के घरेलू विमानन परिदृश्य का कायाकल्प कर दिया है। इस शानदार उपलब्धि के साथ सरकार ने अब अगले दशक के लिए लक्ष्य का दायरा बढ़ाते हुए 4 करोड़ यात्रियों को सीधे रीजनल रूट्स से जोड़ने और दर्जनों नए अप्रयुक्त हवाई अड्डों को सक्रिय करने का नया रोडमैप तैयार किया है।

शुरुआती दौर में जब उड़ान योजना की घोषणा की गई थी, तब विश्लेषक छोटे शहरों में उड़ानों की वित्तीय व्यवहार्यता (Viability) को लेकर संशय में थे। लेकिन सरकार द्वारा एयरलाइंस को दी गई 'वायबिलिटी गैप फंडिंग' (VGF), एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर राज्य सरकारों द्वारा वैट में रियायत, और एयरपोर्ट ऑपरेटरों द्वारा लैंडिंग व पार्किंग चार्ज माफ किए जाने की बहुआयामी नीति ने इस योजना को क्रांतिकारी सफलता दिलाई। आज दरभंगा, झारसुगुड़ा, किशनगढ़, बरेली, आजमगढ़, हुबली और देवघर जैसे गैर-महानगरीय शहरों के हवाई अड्डे देश के सबसे व्यस्त रीजनल हब्स में शुमार हो चुके हैं, जहां से दैनिक उड़ानों में सीटें पूरी तरह भरी रहती हैं।

10 वर्षों का ऐतिहासिक सफर: 600 से अधिक सक्रिय रूट्स और 85+ रीजनल एयरपोर्ट्स

उड़ान योजना के तहत पिछले दस वर्षों में बुनियादी ढांचे के विकास में ऐतिहासिक प्रगति दर्ज की गई है। 2014 से पहले जहां देश में वाणिज्यिक उड़ानों के लिए लगभग 74 हवाई अड्डे ही सक्रिय थे, वहीं उड़ान योजना के लॉन्च होने के बाद पुनर्जीवित किए गए अप्रयुक्त (Unserved) और अल्पप्रयुक्त (Underserved) हवाई पट्टियों को मिलाकर यह संख्या 155 से अधिक के पार पहुंच चुकी है।

  • पुनर्जीवित हवाई अड्डे: योजना के तहत 88 से अधिक ऐसे रीजनल एयरपोर्ट्स, वॉटरड्रोम्स और हेलीपोर्ट्स को अपग्रेड कर नियमित उड़ानों के लिए खोला गया जो दशकों से वीरान पड़े थे।

  • सक्रिय हवाई मार्ग (RCS Routes): पूर्वोत्तर राज्यों, पहाड़ी इलाकों, द्वीपों और मध्य भारत के भीतरी हिस्सों को जोड़ते हुए अब तक 600 से अधिक रीजनल रूट्स चालू किए जा चुके हैं।

  • कम लागत में सफर: 500 किलोमीटर अथवा 1 घंटे की उड़ान के लिए बेस फेयर लगभग ₹2,500 के दायरे में सीमित रखने की नीति ने रेल और बस के एसी क्लास में सफर करने वाले मध्यम वर्ग को सीधे हवाई जहाज का मुसाफिर बना दिया।

पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के लिए साबित हुई लाइफलाइन

भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण पूर्वोत्तर भारत (North East) और हिमालयी राज्यों के लिए उड़ान योजना केवल पर्यटन का जरिया नहीं, बल्कि एक अनिवार्य जीवन रेखा साबित हुई है। असम के रूपसी, अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट व तेजू, सिक्किम के पाक्योंग, मेघालय के शिलांग और लद्दाख के सुदूरवर्ती क्षेत्रों को गुवाहाटी, कोलकाता और दिल्ली जैसे महानगरों से सीधा जोड़ा गया।

सड़क मार्ग से जहां पहाड़ी रास्तों को तय करने में 18 से 24 घंटे का कष्टप्रद समय लगता था, वहीं अब नागरिक महज 45 से 60 मिनट में अपनी मंजिल पर पहुंच रहे हैं। आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं, उच्च शिक्षा के लिए छात्रों की आवाजाही और स्थानीय हस्तशिल्प व कृषि उपज (कृषि उड़ान योजना के माध्यम से) को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में इस नेटवर्क ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।

अब 4 करोड़ यात्रियों का नया लक्ष्य: क्या है 'उड़ान 2.0' का नया खाका?

1.49 करोड़ यात्रियों के माइलस्टोन को पार करने के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने अगले 5 से 10 वर्षों के लिए 'उड़ान 2.0' और आगामी चरणों के तहत नए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं:

  1. 4 करोड़ यात्रियों का लक्ष्य: टियर-2, टियर-3 और टियर-4 शहरों से हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों की कुल संख्या को बढ़ाकर 4 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

  2. 50 नए अनसर्व्ड रूट्स और 100 नए एयरपोर्ट्स: आगामी वर्षों में 50 अतिरिक्त रणनीतिक रीजनल रूट्स को नीलामी प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। साथ ही हेलीकॉप्टर सेवाओं (हेली-उड़ान) का विस्तार उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और अंडमान-निकोबार के दूरस्थ टापुओं तक किया जाएगा।

  3. स्थानीय पर्यटन स्थलों की सीधी कनेक्टिविटी: धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए चित्रकूट, कुशीनगर, अयोध्या, श्रावस्ती, एलोरा और हम्पी जैसे ऐतिहासिक स्थलों के लिए विशेष पर्यटन कनेक्टिंग फ्लाइट्स शुरू की जा रही हैं।

देश के आर्थिक विकास और स्थानीय रोजगार को मिली नई गति

उड़ान योजना का प्रभाव केवल विमानन क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसने जिन शहरों में दस्तक दी, वहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था का पूरा ढांचा बदल दिया। बिहार के दरभंगा एयरपोर्ट का उदाहरण लें, जहां से उड़ानें शुरू होने के बाद पूरे मिथिलांचल क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों, होटल इंडस्ट्री, टैक्सी सेवाओं और रियल एस्टेट बाजार में जबरदस्त उछाल देखा गया।

इसी प्रकार ओडिशा के झारसुगुड़ा और छत्तीसगढ़ के बिलासपुर व जगदलपुर में औद्योगिक निवेश की रफ्तार तेज हुई है, क्योंकि कॉरपोरेट अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए इन विनिर्माण केंद्रों तक पहुंचना सुगम हो गया है। रीजनल एयरपोर्ट्स के संचालन, ग्राउंड हैंडलिंग, एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस और सुरक्षा व्यवस्था में हजारों स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं।

चुनौतियां और आगे की राह

हालांकि उड़ान योजना ने सफलता के नए आयाम गढ़े हैं, लेकिन मंत्रालय के सामने कुछ परिचालन चुनौतियां भी बरकरार हैं। कुछ मार्गों पर छोटी एयरलाइंस द्वारा विमानों की कमी, तकनीकी खराबी के चलते उड़ानों का रद्द होना और वीजीएफ सब्सिडी की अवधि (3 वर्ष) समाप्त होने के बाद कुछ रूट्स का बंद हो जाना प्रमुख चिंता का विषय रहा है।

सरकार अब इन चुनौतियों से निपटने के लिए बड़े विमानन ऑपरेटरों (इंडिगो, एयर इंडिया एक्सप्रेस, स्पाइसजेट) को रीजनल जेट्स और एटीआर विमानों के बेड़े को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। साथ ही स्वदेशी विमान विनिर्माण और पायलट ट्रेनिंग संस्थानों (FTOs) के विस्तार पर भी काम चल रहा है ताकि सस्ती उड़ानों का यह पहिया भविष्य में बिना किसी रुकावट के अनवरत घूमता रहे और भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बनकर और मजबूती से उभरे।