'रूस एक बड़ी मशीन है...', डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन पर डाला युद्ध खत्म करने का दबाव, बोले- अब कीव को खुद लेनी होगी पहल

'रूस एक बड़ी मशीन है...', डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन पर डाला युद्ध खत्म करने का दबाव, बोले- अब कीव को खुद लेनी होगी पहल

अंतरराष्ट्रीय राजनीति और भू-राजनीतिक गलियारों में इन दिनों सबसे बड़े केंद्र बिंदु बने रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) को लेकर एक बहुत ही बड़ा और चौंकाने वाला कूटनीतिक मोड़ सामने आया है। पिछले चार वर्षों से अधिक समय से दुनिया भर के देशों की नींद उड़ाने वाले इस खूनी संघर्ष को समाप्त कराने के लिए तमाम कोशिशें करने के बाद, अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने इस जंग को खत्म करने की पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर यूक्रेन के कंधों पर डाल दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने बहुत ही बेबाक अंदाज में यह बयान दिया है कि रूस इस पूरे युद्ध में एक बेहद ताकतवर और भारी मशीन की तरह आगे बढ़ रहा है, ऐसे में अब यूक्रेन को खुद आगे आकर इस युद्ध को समाप्त करने की इच्छाशक्ति दिखानी होगी। ट्रंप के इस ताजा और तीखे रुख ने वैश्विक कूटनीति में खलबली मचा दी है। आइए विस्तार से जानते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान के पीछे की असली वजह क्या है और इसके अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर क्या गंभीर मायने हैं।

ओवल ऑफिस में ट्रंप का बड़ा बयान: "रूस एक बड़ी मशीन है, यूक्रेन को अब खुद संभालनी होगी स्थिति"

व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में मीडियाकर्मियों और पत्रकारों के साथ खुलकर बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में जमीनी हकीकत काफी बदल चुकी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस जंग में यूक्रेन अब रूस से सैन्य और रणनीतिक रूप से पीछे छूटता नजर आ रहा है। मास्को की सेना लगातार आगे बढ़ते हुए यूक्रेन के कई नए और महत्वपूर्ण इलाकों पर अपना कब्जा जमाती जा रही है, जबकि कीव (यूक्रेन) अपनी रक्षात्मक और भौगोलिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है।

ट्रंप ने कहा कि रूस एक बहुत बड़ी युद्ध मशीन की तरह है, जो लगातार आगे बढ़ती ही जा रही है और इसे रोकना अब बेहद कठिन होता जा रहा है। अमेरिका द्वारा पिछले कई सालों से यूक्रेन को दी जा रही अरबों डॉलर की भारी-भरकम आर्थिक मदद (Financial Aid) और आधुनिक सैन्य उपकरणों की आपूर्ति की ओर इशारा करते हुए ट्रंप ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि इस अंधी मदद के बदले में वाशिंगटन (अमेरिका) को आखिर क्या हासिल हुआ? उनके मुताबिक, अमेरिका को इसके बदले केवल भारी आर्थिक नुकसान, तबाही और दुनिया भर की अस्थिरता के अलावा कुछ भी नहीं मिला है।

पुतिन और जेलेंस्की की व्यक्तिगत दुश्मनी बातचीत में बनी सबसे बड़ी बाधा

रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौते या संघर्ष विराम (Ceasefire) पर सहमति क्यों नहीं बन पा रही है, इस पर रोशनी डालते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच के आपसी तनाव को जिम्मेदार ठहराया। ट्रंप ने खुलासा किया कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की (Volodymyr Zelenskyy) के बीच गहरे स्तर की व्यक्तिगत दुश्मनी और नफरत है।

उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच की यह कड़वाहट और नफरत ही इस समय किसी भी शांति वार्ता की मेज पर एक साथ आने और सार्थक बातचीत करने में सबसे बड़ी और अड़ियल बाधा बनी हुई है। दोनों नेता एक-दूसरे को देखना तक पसंद नहीं करते, जिसके कारण कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद कड़वी जमीन पर कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आ पा रहा है। हालांकि, इस बीच अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकोफ और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के बीच नॉर्वे के ओस्लो शहर में एक उच्चस्तरीय बैठक भी हो चुकी है, जिसमें वाशिंगटन की तरफ से लगातार यह कोशिश की जा रही है कि मॉस्को के ताजा हमलों को किसी तरह रोका जा सके।

ट्रंप के रुख में अचानक आए इस नरमी और बदलाव के पीछे की राजनीतिक वजहें

विशेषज्ञों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अचानक रूस के प्रति अपने रुख को नरम करने और यूक्रेन पर दबाव बढ़ाने के पीछे घरेलू राजनीति और आर्थिक मजबूरियां भी बड़ी वजह हैं। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव व क्षेत्रीय संघर्षों के कारण अमेरिकी बाजार में कच्चे तेल और ईंधन की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया है, जिससे वहां की आम जनता में महंगाई की मार को लेकर भारी आक्रोश है। इस घरेलू दबाव से निपटने के लिए अमेरिकी प्रशासन ने रूस से डीजल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की खरीद पर लगी कुछ पाबंदियों को व्यावहारिक रूप से रियायत दी है, ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर किया जा सके।

इसके अलावा, अमेरिका में अगले महीने होने वाले मिड-टर्म चुनाव (Mid-term Elections) बेहद नजदीक हैं, और वर्तमान में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी की राजनीतिक स्थिति बहुत ज्यादा मजबूत नहीं मानी जा रही है। घरेलू स्तर पर बढ़ती महंगाई और अर्थव्यवस्था की चिंताओं को दूर करने के लिए अमेरिका अब मॉस्को की आर्थिक स्थिति का अप्रत्यक्ष रूप से लाभ उठाने की फिराक में है। ट्रंप ने पिछले कई महीनों के दौरान इस युद्ध को महज "एक साल के भीतर खत्म करने" का बड़ा दावा किया था, लेकिन जब वह अपने उस वादे को पूरा करने में असफल रहे, तो उन्होंने आखिरकार इस कूटनीतिक दलदल से किनारा करते हुए युद्ध को समाप्त करने की पूरी नैतिक और व्यावहारिक जिम्मेदारी यूक्रेन के ऊपर ही मढ़ दी है। आने वाले दिनों में ट्रंप का यह रुख यूक्रेन के भविष्य और युद्ध की दिशा को किस ओर ले जाता है, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।