Petrol-Diesel Duty Hike: सरकार का बड़ा फैसला, पेट्रोल-डीजल पर बढ़ा विंडफॉल टैक्स, आपके शहर में ईंधन की कीमतों पर क्या होगा असर
भारतीय अर्थव्यवस्था और वैश्विक ऊर्जा बाजार के बदलते समीकरणों के बीच केंद्र सरकार ने ईंधन के मोर्चे पर एक बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है। देश के ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार ने पेट्रोल और डीजल के निर्यात (एक्सपोर्ट) पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स यानी विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) में बढ़ोतरी कर दी है। इसके साथ ही विमानन ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाली ड्यूटी में हल्की कटौती की गई है। सरकार के इस ताजा फैसले से जहां एक तरफ तेल शोधन कंपनियों की नीतियों में बदलाव आएगा, वहीं दूसरी तरफ आम उपभोक्ताओं के लिए यह समझना भी जरूरी है कि इसका सीधा असर घरेलू खुदरा कीमतों पर कितना पड़ेगा। यह नई और संशोधित दरें आज यानी 1 सितंबर 2026 से देश भर में प्रभावी हो चुकी हैं।
पेट्रोल और डीजल एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स में इजाफा
वित्त मंत्रालय और संबंधित प्रशासनिक विभागों से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स को शून्य (0) से बढ़ाकर सीधे 1.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। पिछले कुछ पखवाड़े से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों की स्थिति को देखते हुए पेट्रोल के निर्यात पर टैक्स को समाप्त कर दिया गया था, लेकिन ताजा समीक्षा के बाद इसमें यह नया इजाफा किया गया है। इसके अलावा, डीजल के निर्यात पर भी लेवी में बढ़ोतरी की गई है। डीजल के एक्सपोर्ट पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस की दर को अब 24 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 25 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। सरकार का यह कदम देश के भीतर डीजल और पेट्रोल की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने और रिफाइनरी कंपनियों द्वारा घरेलू बाजार की बजाय अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक मुनाफा कमाने की प्रवृत्ति पर लगाम कसने के लिए उठाया गया है।
एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर ड्यूटी घटाई गई
एक तरफ जहां सरकार ने पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर टैक्स को बढ़ाया है, वहीं दूसरी तरफ विमानन कंपनियों और एयरलाइंस को थोड़ी राहत देते हुए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट ईंधन के एक्सपोर्ट पर लगने वाले शुल्कों में कटौती की घोषणा की गई है। संशोधित दरों के मुताबिक, ATF के निर्यात पर लगने वाले SAED को 19.5 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 19 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। विमानन क्षेत्र लंबे समय से ईंधन की ऊंची कीमतों और परिचालन लागत के दबाव से जूझ रहा है, ऐसे में ATF की ड्यूटी में हुई यह आंशिक कटौती एयरलाइंस के लिए कुछ हद तक राहत भरी साबित हो सकती है। सरकार हर दो हफ्तों पर वैश्विक बाजार के रुझानों को ध्यान में रखते हुए इन दरों की समीक्षा करती है और उसी के आधार पर यह फेरबदल किया जाता है।
घरेलू इस्तेमाल वाले पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या असर होगा?
आम नागरिकों और वाहन चालकों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि इस तरह के एक्सपोर्ट टैक्स या विंडफॉल टैक्स बढ़ने से क्या उनके रोजमर्रा के ईंधन के दाम बढ़ेंगे? इस पर सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। मंत्रालय के अनुसार, घरेलू इस्तेमाल के लिए देश के पेट्रोल पंपों पर बिकने वाले पेट्रोल और डीजल की मौजूदा खुदरा कीमतों और ड्यूटी दरों में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है। इसका मतलब यह है कि आम जनता को अपनी गाड़ियों में पेट्रोल और डीजल भरवाने के लिए कोई अतिरिक्त या बढ़ा हुआ मूल्य नहीं चुकाना होगा। यह विंडफॉल टैक्स केवल उन पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू होता है जिन्हें भारतीय रिफाइनरियां विदेशों में निर्यात (एक्सपोर्ट) करती हैं। सरकार का यह स्पष्ट संदेश है कि घरेलू उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय बाजार के भारी-भरकम उतार-चढ़ाव और महंगाई के सीधे झटकों से सुरक्षित रखना उनकीप्राथमिकता है।
क्यों और कब शुरू किया गया था विंडफॉल टैक्स का यह नियम?
देश में विंडफॉल टैक्स लगाने के इतिहास और पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो इसकी शुरुआत मुख्य रूप से पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध जैसे हालात और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी के बाद हुई थी। जब वैश्विक स्तर पर तेल कंपनियों को अत्यधिक और अचानक मुनाफा (Windfall Gain) होना शुरू हुआ, तब सरकार ने घरेलू स्तर पर ईंधन की भारी किल्लत और संकट से निपटने के लिए 27 मार्च को डीजल और ATF के निर्यात पर पहली बार यह विशेष ड्यूटी लगाई थी। इसके बाद से लगातार हर दो हफ्तों के अंतराल पर बाजार की वास्तविक स्थिति की समीक्षा की जाती है और तदनुसार दरों में संशोधन किया जाता है। इसी कड़ी में, 16 मई से पेट्रोल के निर्यात पर भी इस लेवी को लागू कर दिया गया था।
पिछली समीक्षा और वर्तमान बदलावों का पूरा गणित
इससे पहले इन करों (लेवी) में आखिरी बार संशोधन 15 अगस्त को किया गया था। उस समय स्वतंत्रता दिवस के आसपास की गई समीक्षा में सरकार ने घरेलू बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पेट्रोल पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी को पूरी तरह से घटाकर शून्य कर दिया था, जबकि डीजल पर लेवी 24 रुपये प्रति लीटर और ATF पर ड्यूटी 19.5 रुपये प्रति लीटर तय की गई थी। अब 1 सितंबर 2026 से लागू हुई नई दरों में पेट्रोल पर 1.5 रुपये प्रति लीटर का नया टैक्स जुड़ गया है और डीजल पर लेवी 24 से बढ़कर 25 रुपये प्रति लीटर हो गई है। वैश्विक ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया के हालात और ओपेक देशों (OPEC Countries) के उत्पादन निर्णयों के आधार पर सरकार इन दरों में आगे भी समय-समय पर फेरबदल करती रहेगी, ताकि देश की ऊर्जा सुरक्षा और राजकोषीय संतुलन दोनों पूरी तरह से सुरक्षित बने रहें।