राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) का बड़ा एक्शन: 15 महीनों में 1.66 लाख शिकायतों का निपटारा, उपभोक्ताओं को वापस दिलाए 105 करोड़ रुपये

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) का बड़ा एक्शन: 15 महीनों में 1.66 लाख शिकायतों का निपटारा, उपभोक्ताओं को वापस दिलाए 105 करोड़ रुपये

उपभोक्ता मामलों के विभाग (Department of Consumer Affairs) के तहत संचालित राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (National Consumer Helpline - NCH) देश भर के उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा और धोखाधड़ी के मामलों में सबसे कारगर माध्यम साबित हो रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले 15 महीनों की अवधि में हेल्पलाइन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 1,66,000 (1.66 लाख) से अधिक शिकायतों का सफलतापूर्वक निपटारा किया है। इस पारदर्शी और डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से कंपनियों द्वारा अनुचित रूप से रोके गए या ठगे गए कुल 105 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे उपभोक्ताओं के बैंक खातों में वापस (Refund) कराई गई है।

किन क्षेत्रों से आईं सबसे ज्यादा शिकायतें?

हेल्पलाइन पर दर्ज मामलों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि डिजिटल लेन-देन के दौर में ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सेवाओं से जुड़ी शिकायतों में सबसे ज्यादा इजाफा हुआ है। मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को राहत मिली है:

  • ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स: गलत या खराब उत्पाद की डिलीवरी, रिफंड अटकना, वारंटी क्लेम रिजेक्ट होना और डिलीवरी में अत्यधिक देरी।

  • बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट्स: फेल्ड यूपीआई ट्रांजैक्शन, क्रेडिट कार्ड पर अनधिकृत शुल्क और हिडन चार्जेस।

  • ट्रैवल एवं एयरलाइंस: फ्लाइट कैंसिलेशन के बाद टिकट रिफंड न मिलना और होटल बुकिंग में सेवा में कमी।

  • दूरसंचार (टेलीकॉम): बिना सहमति के वैल्यू एडेड सर्विस (VAS) एक्टिवेट होना और गलत बिलिंग।

  • रियल एस्टेट और होम अप्लायंसेज: पजेशन में देरी, रिपेयर सर्विस न देना और गारंटी के बाद भी सर्विस सेंटर से सहयोग न मिलना।

'प्री-लिटिगेशन' समाधान: बिना कोर्ट जाए सुलझ रहे मामले

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह 'प्री-लिटिगेशन स्टेज' (अदालत जाने से पहले) पर काम करती है। हेल्पलाइन ने देश भर की 1,000 से अधिक बड़ी निजी और सार्वजनिक कंपनियों को अपने 'कन्वर्जेंस प्रोग्राम' (Convergence Model) के तहत सीधे पोर्टल से जोड़ रखा है। जैसे ही कोई उपभोक्ता शिकायत दर्ज करता है, वह संबंधित कंपनी के नोडल अधिकारी तक तुरंत पहुंच जाती है। अधिकांश मामलों में कंपनियां कानूनी मुकदमों और जुर्माने के डर से आपसी सहमति से 15 से 30 दिनों के भीतर रिफंड या रिप्लेसमेंट जारी कर देती हैं, जिससे उपभोक्ताओं को उपभोक्ता अदालतों (Consumer Court) के चक्कर नहीं लगाने पड़ते।

NCH पर कैसे दर्ज कराएं अपनी शिकायत? जानें 4 आसान तरीके

यदि किसी कंपनी ने आपको खराब उत्पाद दिया है, सर्विस में लापरवाही की है या रिफंड देने से मना कर रहा है, तो आप इन 4 तरीकों से मुफ्त में शिकायत दर्ज करा सकते हैं:

  • 1. टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर: देश के किसी भी हिस्से से टोल-फ्री नंबर 1915 या 1800-11-4000 पर सुबह 8:00 बजे से रात 8:00 बजे तक कॉल करें। यह सेवा हिंदी, अंग्रेजी सहित 17 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है।

  • 2. व्हाट्सएप (WhatsApp): अपने मोबाइल से 8800001915 पर 'Hi' लिखकर भेजें और चैटबॉट के निर्देशों का पालन करते हुए बिल व शिकायत की फोटो अपलोड करें।

  • 3. NCH ऐप और उमंग (UMANG): गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर से National Consumer Helpline (NCH) ऐप डाउनलोड करें या UMANG ऐप पर 'Consumer Grievance' सर्च करके फॉर्म भरें।

  • 4. आधिकारिक वेब पोर्टल: उपभोक्ता मामले विभाग के ऑनलाइन पोर्टल consumerhelpline.gov.in पर जाकर 'Sign In' करें और संबंधित ट्रांजैक्शन विवरण के साथ शिकायत रजिस्टर करें।

शिकायत करते समय इन दस्तावेजों को रखें तैयार

शिकायत के त्वरित और सटीक निपटारे के लिए कुछ बुनियादी प्रमाण अनिवार्य रूप से अपलोड करने चाहिए:

  1. उत्पाद या सेवा का पक्का बिल/इनवॉइस (Tax Invoice).

  2. ऑनलाइन ऑर्डर आईडी या ट्रांजैक्शन रेफरेंस नंबर (UTR/Transaction ID).

  3. कंपनी के कस्टमर केयर के साथ हुए ईमेल या चैट का स्क्रीनशॉट, जिसमें समाधान न मिलने का प्रमाण हो.

  4. यदि उत्पाद खराब या टूटा हुआ मिला हो, तो उसकी स्पष्ट तस्वीरें या अनबॉक्सिंग वीडियो.