RBI से LIC को मिली बड़ी हरी झंडी: ICICI बैंक में 9.99% तक हिस्सेदारी बढ़ाने की मिली मंजूरी
देश के वित्तीय और बैंकिंग जगत में शनिवार को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को निजी क्षेत्र के दूसरे सबसे बड़े ऋणदाता आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) में अपनी कुल हिस्सेदारी बढ़ाकर 9.99 प्रतिशत तक करने की औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी। आईसीआईसीआई बैंक ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के 'लिस्टिंग ऑब्लिगेशन्स एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स' (LODR) रेगुलेशंस, 2015 के नियम 30 के तहत स्टॉक एक्सचेंजों को भेजी गई एक आधिकारिक रेगुलेटरी फाइलिंग में इस महत्वपूर्ण फैसले की पुष्टि की है। बैंक के अनुसार, केंद्रीय बैंक का यह आधिकारिक पत्र 4 सितंबर 2026 को प्राप्त हुआ। इस मंजूरी के तहत एलआईसी अब आईसीआईसीआई बैंक की चुकता शेयर पूंजी (Paid-up Share Capital) अथवा उसके वोटिंग अधिकारों (Voting Rights) का कुल 9.99 प्रतिशत तक हिस्सा खुले बाजार या अन्य कानूनी माध्यमों से अधिग्रहण करने के लिए अधिकृत हो गई है। वर्तमान में समाप्त हुई जून 2026 की तिमाही के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के मुताबिक, आईसीआईसीआई बैंक में एलआईसी की मौजूदा हिस्सेदारी 4.35 प्रतिशत है, जिसकी मौजूदा बाजार मूल्यांकन के अनुसार कुल कीमत लगभग 45,447 करोड़ रुपये आंकी गई है। आरबीआई की यह हरी झंडी मिलने के बाद अब सरकारी बीमा दिग्गज के पास प्राइवेट बैंक में अपनी हिस्सेदारी को दोगुने से भी अधिक करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
1 साल की तय डेडलाइन: 4 सितंबर 2027 तक पूरी करनी होगी हिस्सेदारी खरीद की प्रक्रिया
आरबीआई द्वारा जारी किए गए अनुमोदन पत्र में हिस्सेदारी बढ़ाने की इस प्रक्रिया के लिए एक बेहद सख्त समयसीमा और कुछ वैधानिक शर्तें भी निर्धारित की गई हैं। केंद्रीय बैंक के दिशा-निर्देशों के अनुसार, यह अनुमति अनिश्चितकाल के लिए नहीं है, बल्कि एलआईसी को हिस्सेदारी अधिग्रहण की यह संपूर्ण प्रक्रिया आरबीआई के पत्र जारी होने की तारीख से ठीक एक वर्ष के भीतर यानी 4 सितंबर 2027 तक पूरी करनी होगी। यदि एलआईसी इस निर्धारित 12 महीने की समय सीमा के भीतर 9.99 प्रतिशत तक के शेयरों का अधिग्रहण करने में असमर्थ रहती है या प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाती है, तो रिजर्व बैंक द्वारा दी गई यह सैद्धांतिक मंजूरी स्वतः ही निरस्त (Cancelled) मानी जाएगी। इसके अलावा, बैंक और एलआईसी दोनों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी समय बैंक में एलआईसी की कुल पेड-अप कैपिटल या वोटिंग राइट्स का अनुपात 9.99 प्रतिशत की ऊपरी सीमा का उल्लंघन न करे। बाजार के जानकारों का यह भी स्पष्ट कहना है कि आरबीआई की यह मंजूरी एक 'इनेबलिंग प्रोविजन' (सक्षम करने वाला प्रावधान) है; इसका यह कतई मतलब नहीं है कि एलआईसी सोमवार को बाजार खुलते ही तुरंत सारे शेयर खरीद लेगी। एलआईसी अपने आंतरिक निवेश बोर्ड, मूल्यांकन और बाजार के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का निर्णय लेगी।
HDFC बैंक के बाद ICICI बैंक पर बड़ा दांव: प्राइवेट बैंकिंग दिग्गजों पर LIC का बढ़ता भरोसा
यह पहली बार नहीं है जब देश की सरकारी बीमा कंपनी ने किसी शीर्ष निजी बैंक में अपनी शेयरधारिता को 10 प्रतिशत के करीब ले जाने की रणनीति बनाई है। कुछ ही सप्ताह पहले अगस्त 2026 में ही रिजर्व बैंक ने एलआईसी को देश के सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) में भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 9.99 प्रतिशत तक करने की विशेष अनुमति प्रदान की थी। उस समय एलआईसी के पास एचडीएफसी बैंक की कुल शेयर पूंजी का लगभग 4.11 प्रतिशत हिस्सा मौजूद था। अब एचडीएफसी बैंक के तुरंत बाद आईसीआईसीआई बैंक में भी हिस्सेदारी को 4.35 प्रतिशत से बढ़ाकर 9.99 प्रतिशत तक ले जाने की मंजूरी मिलना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकारी बीमा कंपनी भारत के मजबूत और तेज विकास दर वाले निजी बैंकिंग दिग्गजों पर अपना भरोसा लगातार मजबूत कर रही है। कॉर्पोरेट विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के विस्तार और ऋण वृद्धि (Credit Growth) में निजी बैंकों की बढ़ती बाजार हिस्सेदारी को देखते हुए एलआईसी अपने भारी-भरकम प्रीमियम फंड को सुरक्षित और उच्च लाभांश (Dividend) देने वाले ब्लूचिप बैंकिंग शेयरों में तैनात करना चाहती है। आईसीआईसीआई बैंक का हालिया वित्तीय प्रदर्शन, एसेट क्वालिटी में सुधार और मजबूत रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) एलआईसी के दीर्घकालिक पोर्टफोलियो के लिए इसे एक बेहद आकर्षक विकल्प बनाते हैं।
क्या हैं RBI के शेयरहोल्डिंग नियम? क्यों जरूरी होती है 5% और 10% पर केंद्रीय बैंक की अनुमति
भारत के बैंकिंग विनियमन नियमों के तहत किसी भी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (Scheduled Commercial Bank) में शेयरों के स्वामित्व और नियंत्रण को लेकर अत्यंत कड़े दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के मौजूदा शेयरहोल्डिंग और वोटिंग राइट्स नियमों के अनुसार, यदि कोई भी एकल निवेशक, संस्था, कॉर्पोरेट घराना या वित्तीय संस्थान किसी निजी बैंक में 5 प्रतिशत या उससे अधिक की चुकता शेयर पूंजी या वोटिंग अधिकार हासिल करना चाहता है, तो उसे बैंकिंग विनियमन अधिनियम के तहत केंद्रीय बैंक से पूर्व अनुमति (Prior Approval) लेना अनिवार्य होता है। गैर-प्रवर्तक (Non-Promoter) श्रेणी के सामान्य वित्तीय निवेशकों के लिए यह अधिकतम सीमा आमतौर पर 10 प्रतिशत निर्धारित की गई है, जबकि कुछ विशेष मामलों में बड़े संस्थागत निवेशकों को 15 प्रतिशत तक की अनुमति दी जाती है। चूंकि एलआईसी पहले से ही आईसीआईसीआई बैंक में 4.35 प्रतिशत की बड़ी हिस्सेदारी रखे हुए थी, इसलिए 5 प्रतिशत की सीमा को पार करने और 10 प्रतिशत के विनियामक सीलिंग कैप के करीब पहुंचने के लिए एलआईसी को आरबीआई के समक्ष औपचारिक आवेदन करना पड़ा था। केंद्रीय बैंक निवेशक की वित्तीय साख, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और बैंकिंग स्थिरता के मानकों का परीक्षण करने के बाद ही ऐसी संवेदनशील अनुमतियां प्रदान करता है।
बैंकिंग सेक्टर में LIC का विशाल पोर्टफोलियो: SBI, PNB और एक्सिस बैंक में भी भारी निवेश
भारतीय जीवन बीमा निगम देश के शेयर बाजार का सबसे बड़ा घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) है। देश के बैंकिंग क्षेत्र की शायद ही ऐसी कोई प्रमुख सरकारी या निजी बैंक हो जिसमें एलआईसी का बड़ा हिस्सा मौजूद न हो। प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के अनुसार, एलआईसी देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में 8.47 प्रतिशत की मजबूत हिस्सेदारी रखती है। इसके अलावा पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में एलआईसी की हिस्सेदारी 8.83 प्रतिशत के स्तर पर है, जो नियामक सीमा के बेहद करीब है। वहीं निजी क्षेत्र के अन्य प्रमुख बैंक एक्सिस बैंक (Axis Bank) में 7.87 प्रतिशत और बैंक ऑफ इंडिया में लगभग 7.83 प्रतिशत की शेयरधारिता एलआईसी के नियंत्रण में है। आईडीबीआई बैंक में तो एलआईसी वर्षों से सबसे बड़ी प्रमोटर और शेयरधारक के रूप में स्थापित रही है। अब देश के दो सबसे बड़े निजी दिग्गजों एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक में 9.99-9.99 प्रतिशत हिस्सेदारी की सैद्धांतिक मंजूरी हासिल कर लेने से एलआईसी भारत के पूरे बैंकिंग परिदृश्य में सबसे प्रभावशाली संस्थागत निवेशक के रूप में अपनी स्थिति को और अधिक मजबूत करने जा रही है।
निवेशकों और शेयर बाजार पर क्या होगा असर? सोमवार को कैसी रह सकती है शेयरों की चाल
इस बड़ी विनियामक मंजूरी की खबर का असर आने वाले कारोबारी सप्ताह के पहले दिन यानी सोमवार को शेयर बाजार के शुरुआती कारोबार में स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है। पिछले कारोबारी सत्र यानी शुक्रवार को आईसीआईसीआई बैंक का शेयर मामूली उतार-चढ़ाव के साथ ₹1,423.20 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं एलआईसी का शेयर ₹415.35 के भाव पर बंद हुआ था। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि एलआईसी द्वारा हिस्सेदारी बढ़ाने की संभावना से आईसीआईसीआई बैंक के शेयर को मजबूत संस्थागत समर्थन मिलेगा, जिससे आने वाले दिनों में स्टॉक में संस्थागत खरीदारी का नया प्रवाह देखने को मिल सकता है। जब देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी किसी बैंक में अपना एक्सपोजर बढ़ाती है, तो यह रिटेल और विदेशी निवेशकों (FIIs) के बीच बैंक की वित्तीय सेहत और भविष्य की कमाई की संभावनाओं को लेकर एक सकारात्मक संदेश देता है। हालांकि, शेयर बाजार में किसी भी नए निवेश से पहले निवेशकों को बैंक के बुनियादी आंकड़ों, वैल्यूएशन और अपनी व्यक्तिगत वित्तीय जोखिम क्षमता का आकलन जरूर कर लेना चाहिए।