क्रेडिट कार्ड से पेमेंट पर 2% एक्स्ट्रा चार्ज देना जरूरी है? जानिए RBI और बैंक के सख्त नियम, दुकानदार मांगें तो कहां और कैसे करें शिकायत

क्रेडिट कार्ड से पेमेंट पर 2% एक्स्ट्रा चार्ज देना जरूरी है? जानिए RBI और बैंक के सख्त नियम, दुकानदार मांगें तो कहां और कैसे करें शिकायत

अक्सर छोटे बाजारों, इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानों, ज्वैलरी शोरूम या थोक व्यापारियों के यहां खरीदारी करते समय जब आप क्रेडिट कार्ड निकालते हैं, तो दुकानदार तुरंत कह देता है—"सर, कार्ड से पेमेंट करेंगे तो 2% या 2.5% एक्स्ट्रा चार्ज लगेगा।"

सीधे और स्पष्ट शब्दों में कहें तो ग्राहकों से यह अतिरिक्त शुल्क (Credit Card Surcharge) वसूलना पूरी तरह से गैरकानूनी और नियमों के विरुद्ध है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और कार्ड नेटवर्क (Visa, Mastercard, RuPay) के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि कोई भी मर्चेंट (दुकानदार) बैंक या पेमेंट गेटवे को दिए जाने वाले सेवा शुल्क का बोझ सीधे ग्राहक की जेब पर नहीं डाल सकता।

दुकानदार क्यों मांगते हैं 2% एक्स्ट्रा चार्ज? समझिए MDR का गणित

दुकानदार द्वारा यह अतिरिक्त पैसा मांगने के पीछे का मुख्य कारण एमडीआर (Merchant Discount Rate) होता है।

  • एमडीआर क्या है: जब कोई व्यापारी अपनी दुकान पर पीओएस (POS/स्वाइप मशीन) लगवाता है, तो बैंक और कार्ड नेटवर्क उस पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर को प्रोसेस करने के बदले व्यापारी से प्रत्येक स्वाइप पर एक निश्चित कमीशन लेते हैं, जिसे MDR कहा जाता है।

  • क्रेडिट कार्ड पर यह शुल्क आमतौर पर 1% से लेकर 2.2% तक होता है।

  • नियमों के मुताबिक, यह शुल्क व्यापारी की व्यावसायिक लागत (Cost of Doing Business) का हिस्सा होता है, जिसे दुकानदार को अपने मुनाफे या खर्च से वहन करना होता है।

  • हालांकि, कई छोटे व्यापारी अपना 2% मार्जिन बचाने के लिए यह चार्ज सीधे ग्राहक के अंतिम बिल में जोड़ देते हैं या नकद (Cash) भुगतान के लिए दबाव बनाते हैं।

आरबीआई (RBI) और बैंक एग्रीमेंट के क्या हैं आधिकारिक नियम?

आरबीआई ने समय-समय पर परिपत्र जारी कर इस प्रथा पर कड़ा रुख अपनाया है:

  • आरबीआई सर्कुलर का नियम: आरबीआई के निर्देशों के अनुसार, व्यापारियों द्वारा बिल राशि से अधिक कोई भी अतिरिक्त सरचार्ज ग्राहक से वसूलना अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) है।

  • मर्चेंट और बैंक का करार (Merchant Agreement): जब कोई दुकानदार अपने यहां स्वाइप मशीन लगाता है, तो वह बैंक के साथ एक अनुबंध (Contract) पर हस्ताक्षर करता है। इस समझौते की मुख्य शर्त यह होती है कि वह कार्ड से भुगतान करने वाले ग्राहक और नकद देने वाले ग्राहक के बीच मूल्य में कोई भेदभाव नहीं करेगा और न ही एमडीआर ग्राहक से वसूलेगा।

  • यदि कोई दुकानदार ऐसा करता पकड़ा जाता है, तो बैंक को उसकी स्वाइप मशीन (POS Terminal) तुरंत ब्लैकलिस्ट और जब्त करने का पूरा अधिकार होता है।

ईंधन और सरकारी सेवाओं पर सरचार्ज क्यों लगता है?

कई उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल उठता है कि अगर यह अवैध है, तो पेट्रोल पंप या आईआरसीटीसी (ट्रेन टिकट) पर कार्ड स्वाइप करने पर 1% या 2% सरचार्ज क्यों कटता है:

  • पेट्रोल पंप और यूटिलिटी बिल: पेट्रोलियम और सरकारी सेवाओं को विशेष छूट (Exemption) के तहत रखा गया है क्योंकि इन क्षेत्रों में डीलरों का मार्जिन बेहद कम (0.5% से 1%) होता है।

  • हालांकि, अधिकांश बैंक अपने क्रेडिट कार्ड्स पर 1% फ्यूल सरचार्ज वेवर (Fuel Surcharge Waiver) देते हैं, जिससे यह राशि अगले महीने के स्टेटमेंट में रिफंड हो जाती है।

  • लेकिन सामान्य रिटेल दुकानों, कपड़ों, मोबाइल स्टोर या रेस्टोरेंट पर किसी भी तरह का सरचार्ज पूरी तरह प्रतिबंधित है।

दुकानदार जबरन 2% एक्स्ट्रा मांगे तो क्या करें ग्राहक?

यदि कोई दुकानदार क्रेडिट कार्ड से भुगतान पर 2% अतिरिक्त चार्ज मांग रहा है, तो आप इन 4 प्रभावी कदमों को उठा सकते हैं:

  • 1. पक्के बिल में उस चार्ज को अलग से दर्ज करवाएं: यदि आपको मजबूरी में भुगतान करना पड़ रहा है, तो दुकानदार से कहें कि वह बिल पर स्पष्ट रूप से '2% Credit Card Surcharge' या 'Convenience Fee' लिखकर टैक्स इनवॉइस जारी करे। (अधिकांश दुकानदार लिखित में देने से डरते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि यह गैरकानूनी है)।

  • 2. कार्ड जारीकर्ता बैंक से संपर्क करें: पेमेंट होने के बाद अपने क्रेडिट कार्ड बैंक के कस्टमर केयर पर कॉल करें या ऐप पर शिकायत दर्ज करें। उन्हें मर्चेंट का नाम, स्वाइप मशीन पर दर्ज टर्मिनल आईडी (TID) और बिल का प्रमाण दें। बैंक उस मर्चेंट के खिलाफ चार्जशीट जारी करता है और आपका अतिरिक्त कटा पैसा रिफंड कर देता है।

  • 3. राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) पर शिकायत: आप टोल-फ्री नंबर 1915 पर कॉल करके या 'Consumer Grievance' पोर्टल पर उस व्यापारी के खिलाफ अनुचित व्यापार व्यवहार की शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

  • 4. वैकल्पिक डिजिटल पेमेंट का उपयोग: यदि बहस से बचना चाहते हैं, तो आप यूपीआई (UPI), डेबिट कार्ड या अन्य माध्यमों से भुगतान कर सकते हैं, जिन पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगता।