AI से कारोबार में बढ़ी अनिश्चितता, टैरिफ और एक्सपोर्ट कंट्रोल का भारी दबाव: पीएम के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा का बड़ा बयान
वैश्विक व्यापार व्यवस्था और उभरती हुई आधुनिक तकनीकों के प्रभाव पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा ने एक महत्वपूर्ण संबोधन में वैश्विक आर्थिक परिदृश्य का गंभीर विश्लेषण प्रस्तुत किया है। उन्होंने रेखांकित किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक डिजिटल तकनीकों के अप्रत्याशित प्रसार ने पारंपरिक कारोबारों में भारी अनिश्चितता पैदा कर दी है। इसके साथ ही, विभिन्न देशों द्वारा अपनाए जा रहे सख्त टैरिफ बैरियर्स (सीमा शुल्क) और रणनीतिक एक्सपोर्ट कंट्रोल (निर्यात प्रतिबंधों) ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर अभूतपूर्व दबाव बना दिया है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से कारोबारी मॉडल्स में पैदा हुई तीव्र अनिश्चितता
डॉ. पी.के. मिश्रा ने स्पष्ट किया कि यद्यपि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उत्पादकता और नवाचार के नए अवसर खोल रहा है, लेकिन इसके तेजी से हो रहे विकास ने कॉरपोरेट जगत और उद्योगों के सामने नीतिगत व व्यावहारिक अस्थिरता खड़ी कर दी है।
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पारंपरिक मॉडल्स का टूटना: पारंपरिक विनिर्माण, सॉफ्टवेयर सर्विसेज और बीपीओ जैसे क्षेत्र एआई ऑटोमेशन के चलते तेजी से बदल रहे हैं। कंपनियों के लिए यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि अगले तीन से पांच वर्षों में कौन सी तकनीक प्रासंगिक रहेगी।
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श्रम बाजार पर दबाव: एआई के प्रसार से उच्च और मध्यम कौशल वाली नौकरियों के पुनर्गठन की मांग बढ़ गई है, जिससे उद्योगों को अपने कार्यबल को लगातार री-स्किल और अप-स्किल करने के लिए भारी निवेश करना पड़ रहा है।
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डेटा संप्रभुता और गोपनीयता: विभिन्न देशों द्वारा डेटा सुरक्षा को लेकर बनाए जा रहे अलग-अलग नियमों के कारण सीमा पार डिजिटल व्यापार अधिक जटिल और अप्रत्याशित हो गया है।
टैरिफ नीतियां और एक्सपोर्ट कंट्रोल: बहुपक्षीय व्यापार पर मंडराता संकट
वैश्विक व्यापार में संरक्षणवाद (Protectionism) के बढ़ते चलन पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रधान सचिव ने कहा कि कई विकसित अर्थव्यवस्थाएं अपने घरेलू हितों को प्राथमिकता देते हुए भारी टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएं खड़ी कर रही हैं।
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भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक दीवारें: अमेरिका, यूरोप और एशिया के प्रमुख बाजारों में लगने वाले आयात शुल्क वैश्विक लॉजिस्टिक्स लागत को बढ़ा रहे हैं।
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एक्सपोर्ट कंट्रोल का दुरुपयोग: अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिज), हाई-एंड कंप्यूटिंग चिप्स और ड्यूल-यूज प्रौद्योगिकियों पर लगाए जा रहे निर्यात प्रतिबंध वैश्विक सप्लाई चेन को खंडित कर रहे हैं।
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विकासशील देशों पर असर: इन पाबंदियों और सख्त ट्रेड नियमों का सीधा असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है, जिन्हें आवश्यक तकनीकी उपकरणों और कच्चे माल के लिए अतिरिक्त लागत चुकानी पड़ रही है।
वैश्विक सप्लाई चेन के विविधीकरण (Diversification) की सख्त जरूरत
प्रधान सचिव ने अंतरराष्ट्रीय मंचों को आगाह करते हुए कहा कि एक ही स्रोत या देश पर अत्यधिक निर्भरता किसी भी वैश्विक संकट में पूरी अर्थव्यवस्था को ठप कर सकती है।
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सप्लाई चेन रेजिलिएंस: कोविड-19 महामारी और हालिया क्षेत्रीय संघर्षों ने यह साबित कर दिया है कि बहुपक्षीय आपूर्ति तंत्र को लचीला और बहु-आयामी बनाना कितना जरूरी है।
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विश्वसनीय साझेदारी (Trusted Partnerships): देशों को केवल लागत दक्षता के आधार पर नहीं, बल्कि रणनीतिक विश्वास और पारदर्शिता के आधार पर व्यापारिक समझौते करने होंगे।
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'चाइना प्लस वन' में भारत की भूमिका: उन्होंने संकेत दिया कि वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में भारत एक स्थिर, भरोसेमंद और लोकतांत्रिक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है, जो वैश्विक आपूर्ति को स्थिरता दे सकता है।
नीतिगत स्थिरता और नवाचार से अनिश्चितताओं को मात देगा भारत
अपने संबोधन के निष्कर्ष में डॉ. पी.के. मिश्रा ने जोर दिया कि भारत इन वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए एक संतुलित और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण अपना रहा है।
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घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन: प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) जैसी पहलों के जरिए महत्वपूर्ण कलपुर्जों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाया जा रहा है ताकि बाहरी झटकों का असर कम से कम हो।
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जिम्मेदार एआई का विकास: भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नैतिक, सुरक्षित और समावेशी उपयोग के लिए वैश्विक मानक तय करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
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व्यापार समझौतों में तेजी: वैश्विक व्यापारिक अनिश्चितताओं के बीच भारत विभिन्न विकसित देशों के साथ द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) को तेजी से आगे बढ़ा रहा है ताकि भारतीय निर्यातकों को सुरक्षित और स्थिर विदेशी बाजार मिल सकें।