Gurugram Real Estate Irony: जलमग्न सड़कें, 7 करोड़ वर्ग फीट खाली पड़े घर और बिक्री में 20% की गिरावट! फिर भी गुरुग्राम में ₹21,000/sqft के पार कैसे पहुंची कीमतें? समझिए पूरा खेल
हर मानसून में मिलेनियम सिटी कहे जाने वाले गुरुग्राम की चमचमाती सड़कों का तालाब में तब्दील हो जाना, घंटों लंबा ट्रैफिक जाम और जल निकासी का ध्वस्त बुनियादी ढांचा देश भर की सुर्खियों में रहता है। इसके साथ ही प्रॉपर्टी कंसल्टेंट फर्म्स और मार्केट रिसर्च रिपोर्ट्स के आंकड़े बताते हैं कि एनसीआर में लगभग 7 करोड़ वर्ग फुट (करीब 65,000 से अधिक मकान) का आवासीय दायरा अनसोल्ड इनवेंटरी (खाली पड़े घरों) के रूप में अटका हुआ है और बीते तिमाहियों में घरों की कुल बिक्री में लगभग 20 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
अर्थशास्त्र का बुनियादी नियम कहता है कि जब मांग गिरती है और सप्लाई (इनवेंटरी) ज्यादा होती है, तो कीमतें घटनी चाहिए। लेकिन गुरुग्राम के रियल एस्टेट बाजार ने इस नियम को पूरी तरह उलट दिया है। शहर के औसत आवासीय दाम ₹21,000 प्रति वर्ग फीट के पार निकल चुके हैं, जबकि गोल्फ कोर्स रोड और द्वारका एक्सप्रेसवे के प्रीमियम प्रोजेक्ट्स में यह दर ₹35,000 से ₹50,000 प्रति वर्ग फीट को भी छू रही है। आखिर इस विरोधाभास के पीछे की असली वजह क्या है?
1. 'लक्जरी और अल्ट्रा-लक्जरी' का खेल: अफोर्डेबल हाउसिंग का खात्मा
गुरुग्राम के प्रॉपर्टी बाजार में औसत कीमतों के ₹21,000/sqft पार जाने की सबसे बड़ी वजह डेवलपर्स द्वारा प्रोडक्ट मिक्स में किया गया बड़ा बदलाव है:
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किफायती मकानों से किनारा: डेवलपर्स ने ₹50 लाख से ₹1 करोड़ वाले अफोर्डेबल और मिड-सेगमेंट प्रोजेक्ट्स लॉन्च करना लगभग बंद कर दिया है।
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लक्जरी प्रोजेक्ट्स की बाढ़: अब बाजार में आने वाले अधिकांश नए प्रोजेक्ट्स 'लक्जरी' या 'अल्ट्रा-लक्जरी' (4 BHK, प्राइवेट लिफ्ट, स्काई लाउंज, 3500+ sqft) कैटेगरी के हैं, जिनकी शुरुआती टिकट साइज ही ₹4 करोड़ से ₹12 करोड़ के बीच है।
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जब बाजार में महंगे प्रोजेक्ट्स का अनुपात 70-80% हो जाता है, तो समग्र शहर का भारित औसत मूल्य (Weighted Average Price) अपने आप ऊपर चला जाता है, भले ही कुल बिकने वाली यूनिट्स की संख्या में 20% की गिरावट आ गई हो।
2. 7 करोड़ वर्ग फुट खाली, लेकिन 'तैयार और रहने लायक' घरों का टोटा
कागजों पर 7 करोड़ वर्ग फीट खाली इनवेंटरी दिखना एक बात है, लेकिन उसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान करती है:
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अटकी और लीगल विवाद वाली इनवेंटरी: इस 7 करोड़ वर्ग फीट का एक बड़ा हिस्सा ऐसे प्रोजेक्ट्स का है जो पिछले 8-10 वर्षों से कानूनी मुकदमों, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) या फंड की कमी के चलते अधूरे पड़े हैं। कोई भी वास्तविक खरीदार इन अटके प्रोजेक्ट्स में पैसा नहीं फंसाना चाहता।
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रेडी-टू-मूव (Ready-to-Move) की भारी कमी: शीर्ष ए-ग्रेड बिल्डरों (जैसे DLF, गोदरेज, एम3एम, शोभा) के ऐसे प्रोजेक्ट्स जो अगले 1-2 साल में पूरे होने वाले हैं या पूरी तरह तैयार हैं, उनकी सप्लाई बेहद सीमित है। इसी सीमित सप्लाई पर पूरी मांग केंद्रित हो जाने से कीमतें रॉकेट बनी हुई हैं।
3. 'गेम-चेंजर' इंफ्रास्ट्रक्चर और मेट्रो-एक्सप्रेसवे का हाइप
नागरिक सुविधाओं और सीवरेज ड्रेनेज के स्तर पर भले ही नगर निगम और स्थानीय प्रशासन विफल साबित हुआ हो, लेकिन क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के मोर्चे पर गुरुग्राम को बड़े प्रोजेक्ट्स का फायदा मिला है:
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द्वारका एक्सप्रेसवे (Dwarka Expressway): इस आठ लेन वाले एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू होने और आईजीआई एयरपोर्ट से सीधी कनेक्टिविटी ने पूरे इलाके में सट्टेबाजी और निवेश को चरम पर पहुंचा दिया है।
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आगामी मेट्रो विस्तार और एसपीआर (SPR): सदर्न पेरिफेरल रोड और ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो प्रोजेक्ट के ऐलान ने निवेशकों में यह भरोसा जगाया है कि आज का ट्रैफिक और जलभराव आने वाले कुछ सालों में ठीक हो जाएगा, जिससे 'फ्यूचर वैल्यू' को आज ही कीमतों में जोड़ लिया गया है।
4. NRI और HNI निवेशकों का दबदबा: एंड-यूजर बाजार से बाहर
रियल एस्टेट रिसर्च के अनुसार, गुरुग्राम में बिकने वाले लक्जरी मकानों के 60 प्रतिशत से अधिक खरीदार सामान्य वेतनभोगी एंड-यूजर (End-User) नहीं, बल्कि हाई नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs), कॉरपोरेट एग्जीक्यूटिव्स और एनआरआई (NRI) निवेशक हैं:
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शेयर बाजार और स्टार्टअप बूम से बने सरप्लस कैश को रियल एस्टेट में सुरक्षित ठिकाना माना जा रहा है।
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एनआरआई निवेशकों के लिए कमजोर रुपये के कारण भारतीय प्रीमियम प्रॉपर्टी में निवेश करना बेहद आकर्षक और सस्ता सौदा साबित होता है।
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निवेशक प्रोजेक्ट्स के लॉन्च होते ही 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट' (EOI) के जरिए पूरा प्रोजेक्ट कुछ ही घंटों में सोल्ड-आउट करवा देते हैं, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी (Artificial Scarcity) का माहौल बनता है और रीसेल मार्केट में कीमतें और चढ़ जाती हैं।
जलमग्न सड़कों और जलभराव की मार झेल रहे आम नागरिकों के लिए यह स्थिति भले ही हैरान करने वाली हो, लेकिन गुरुग्राम का मौजूदा रियल एस्टेट मार्केट जमीनी बुनियादी ढांचे से कटकर विशुद्ध रूप से हाई-एंड लक्जरी, ब्रांडेड डेवलपर्स और वैश्विक निवेशकों की पूंजी पर दौड़ रहा है। जब तक लक्जरी सेगमेंट में निवेशकों की यह लिक्विडिटी बनी रहेगी, तब तक बुनियादी ढांचे की कमियां भी कीमतों की इस रफ्तार को थामने में बेअसर नजर आ रही हैं।